- सप्ताह में एक दिन एक अस्पताल पहुंचते हैं कई चिकित्सक
- चार चिकित्सकों के कंधों पर 12 अस्पतालों का जिम्मा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिले में राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल चिकित्सकों को तरस रहे हैं। यहां दवाइयां तो हैं, लेकिन मरीज को देखने वाले चिकित्सक नहीं हैं। 12 अस्पतालों में मात्र चार चिकित्सक हैं। एक चिकित्सक सप्ताह में एक दिन ही एक अस्पताल में पहुंच पाते हैं। चिकित्सकों के साथ फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का भी टोटा होने से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी या आउट सोर्सेस के कर्मचारी मरीजों को दवाइयां बांटते हैं। चिकित्सकों के न मिलने पर अधिकांश मरीज भीषण गर्मी में इन अस्पतालों से मायूस लौट रहे हैं।
कोरोना काल में लाखों लोगों ने होम्योपैथिक चिकित्सकों से अपना उपचार कराया। क्योंकि अधिकांश होम्योपैथिक चिकित्सकों ने मनुष्य की इम्यूनिटी बढ़ाने की सबसे कारगर दवा होम्योपैथी में होने का दावा किया था। उस दौरान लोगों में होम्योपैथी में विश्वास बढ़ा, इसका भरपूर लाभ प्राइवेट चिकित्सकों ने उठाया। हालांकि राजकीय होम्योपैथिक अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ था, लेकिन बाद में इस अस्पतालों की व्यवस्था लड़खड़ाती गई, मरीजों ने इन अस्पतालों से मुंह मोड़ लिया।
जिले में 12 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल हैं। पहले यहां 10 होम्योपैथिक चिकित्सक तैनात थे। गत वर्ष छह चिकित्सकों का आकांक्षी जिलों में तबादला कर दिया गया। उनकी जगह किसी डाक्टर की तैनाती नहीं की गई। उक्त पद खाली चल रहे हैं। चिकित्सकों, फार्मासिस्ट और लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का टोटा होने से होम्योपैथिक चिकित्सालयों की व्यवस्था लचर हो गई। इन 12 अस्पताल का जिम्मा मात्र चार चिकित्सकों के कंधों पर है। जिला अस्पताल स्थित जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय में एक चिकित्सक रोजाना ड्यूटी देती हैं।

यहां फार्मासिस्ट नहीं है, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवाइयों का वितरण करता है। कंकरखेड़ा के राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में एक चिकित्सक तीन दिन ड्यूटी देते हैं। इसके अलावा एक-एक दिन दो अन्य अस्पताल में सेवाएं देते हैं। एक चिकित्सक पुलिस लाइन के अस्पताल में स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय में सप्ताह में एक दिन ड्यूटी देते हैं। यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवाइयों का वितरण करते हैं। इन अस्पतालों में दवाइयां उचित मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन चिकित्सक न होने से इन दवाइयों का लाभ मरीजों का नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सरकारी होम्योपैथिक अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है।
डाक्टरों के तबादले से खड़ी हुई समस्या: डा. मलिक
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डा. संजीव मलिक का कहना है कि गत वर्ष उनके अस्पताल से छह चिकित्सकों का तबादला आकांक्षी जिलों में कर दिया गया। इसके बाद से उक्त पद खाली पड़े हैं। इससे उक्त अस्पतालों में मरीजों का उपचार करने की समस्या खड़ी हो गई है। इसके अलावा फार्मासिस्ट की भी कमी है। मुख्यालय से चिकित्सकों व फार्मासिस्ट की मांग की गई। चुनाव बाद डाक्टर व फार्मासिस्ट मिलने की उम्मीद की जा रही है।
ये हैं होम्योम्योपैथिक
- जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, पुलिस लाइन।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, छठी वाहिनी पीएसी।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, पीएचसी कंकरखेड़ा।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, जानी।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, सरधना।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, सकौती।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, किनानगर।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, कंचनपुर घोपला।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, मवाना।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, गेसुपुर।
- राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, बटजेवड़ा।

