Thursday, March 26, 2026
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अस्पताल बीमार, मरीज लाचार, बेबसी का आलम

  • मरीजों को व्हील चेयर और स्ट्रेचर पर ले जाने वाले वार्ड ब्वॉय नहीं आते नजर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल के सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल हो या फिर शहर घंटाघर स्थित प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल व डफरिन या फिर जनपद की सीएचसी व पीएचसी सभी स्टाफ खासतौर से डाक्टरों की कमी के दौर से गुजर रहे हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वेस्ट यूपी के प्रमुख मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल के अस्पताल में अरसे से भर्ती नहीं होने की वजह से भाड़े के डाक्टरों से गुजारा करना पड़ रहा है।

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एलएलआरएम की जहां तक बात है तो फैकल्टी की कमी का असर वहां पढाई करने वाले स्टूडेंट के साथ-साथ गंभीर किस्म के रोगियों के इलाज पर भी पड़ रहा है। मेडिकल व जिला अस्पताल में केवल डाक्टरों की कमी भर नहीं है, स्वास्थ्य सेवाओ के लिए बेहद जरूरी समझे जाने वाले संसाधनों की भी भारी कमी है। वार्ड ब्वॉय जैसे स्टाफ की कमी तो तो अब स्वास्थ्य सेवाओं ने आत्मसात कर लिया है। वार्ड ब्वॉय द्वारा किसी मरीज को लाते ले जाते देखे मुद्दत बीत गयी है।

इलाज महंगा, जाएं तो जाएं कहां

गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज लाचार हैं। निजी अस्पताल में इलाज महंगा है और सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं। यह हालात तब हैं। जबकि केंद्र और यूपी सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं पर खासा जोर दे रही है, मगर अभी भी मेरठ के सरकारी अस्पताल सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। सुविधाओं के अभाव में लाखों मरीजों को परेशानी हो रही है। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय और जिला महिला अस्पतालों में हर साल करीब 15 से 20 लाख से ज्यादा मरीज आते हैं।

लंबी कतारें, जांच की सुविधा नहीं

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इन्हें लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। चिकित्सक जांच लिखते हैं तो पता चलता है कि यह जांच सुविधा उपलब्ध ही नहीं है। नतीजतन, मायूस होकर वहां से जाना पड़ता है। इसके अलावा गंभीर रोगियों का इलाज भी इन अस्पतालों में नहीं मिलता है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल को हर साल सरकार करोड़ों रुपये बजट देती है, हर मद के लिए अलग बजट है। सिर्फ दवाइयों के लिए ही 25 करोड़ से ज्यादा का बजट दिया जाता है। इसके बावजूद मरीजों को गंभीर बीमारी होने पर दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।

सुविधाओं को तरसते मरीज

अस्पताल में लेजर तकनीक से आंखों का इलाज, जले हुए मरीज के लिए बर्न वार्ड, कैंसर के मरीजों के लिए रेडियोथैरेपी और लिवर और हृदय रोग। मस्तिष्क से संबंधित न्यूरो सर्जरी, कैंसर से संबंधित आंकोलोजी, त्वचा से संबंधित प्लास्टिक सर्जरी, गुर्दे से संबंधित नेफ्रोलॉजी, कैंसर से संबंधित रेडियोथैरेपी, बच्चों की बीमारी से संबंधित पीडियाट्रिक्स सर्जरी, हार्मोंन से संबंधित एंडोक्राइनोलॉजी, महिलाओं की बीमारियों से संबंदित स्त्री एवं प्रसूति रोग की कमी अखरती है।

बीमारियों का सीजन

जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक चिकित्सका डा. ईश्वरी देवी बत्रा कहा कहना है कि यह इन दिनों बीमारी का सीजन है। मरीज ज्यादा संख्या में आ रहे हैं। सभी को अटैंड करना पहली प्राथमिकता होती है। कई बार तिमारदार खुद ही मरीज इधर से उधर लाते ले जाते हैं।

इधर-उधर छोड़ देते स्ट्रेचर

मेडिकल के प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता ने बताया कि सभी संसाधन पूरे हैं, लेकिन कई बार तिमारदार स्ट्रेचर इधर उधर छोड़ देते हैं। इन दिनों में मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। इसको लेकर लगता है कि चीज ठीक नहीं है, लेकिन सभी व्यवस्थाएं पूरी है और कंट्रोल में भी हैं।

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