Tuesday, March 17, 2026
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नेताजी के ‘सुदामा’ कितना दिला पाएंगे सजातीय वोट

  • किरणपाल कश्यप को विधान परिषद सदस्य प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर चल रहीं अटकलें
  • 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले स्टिंग आॅपरेशन में फंसे थे कश्यप
  • 2017 में अहसयोग के चलते सपा के सुधीर पंवार तीसरे स्थान पर खिसके

जनवाणी संवाददाता |

शामली: समाजवादी पार्टी द्वारा विधान परिषद सदस्य प्रत्याशी के लिए उप्र के पूर्व दर्जा राज्यमंत्री किरणपाल कश्यप पर दांव लगाए जाने की चर्चाएं दिनभर राजनीतिक गलियारों में तैरती रहीं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि नेताजी पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव के ‘सुदामा’ किरणपाल कश्यप कैराना लोकसभा सीट पर पार्टी प्रत्याशी इकरा हसन को अपने समाज के वोट दिला पाएंगे या नहीं।

क्योंकि 2012 के विधानसभा चुनाव के समय एक न्यूज चैनल के स्टिंग आॅपरेशन में चुनाव का परिणाम प्रभावित करने की स्वीकारोक्ति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। साथ ही, 2017 में पार्टी प्रत्याशी के चुनाव में उनका असहयोग जगजाहिर रहा था जिसके चलते प्रोफेसर सुधीर पंवार तीसरे स्थान पर खिसक गए थे।

मुजफ्फरनगर जनपद के गांव भौराकलां के मूलनिवासी किरणपाल कश्यप करीब तीन दशक शामली शहर में आकर बस गए थे। उन्होंने अपनी कर्मठता से जल्द ही नेताजी मुलामय सिंह यादव का विश्वास हासिल कर लिया था। वर्ष 2002 में नेताजी ने कश्यप को थानाभवन विधानसभा से चुनाव मैदान में उतारा था। किरणपाल कश्यप 42 हजार मत लेकर विधायक बने जबकि भाजपा के ठा. जगत सिंह को 32 हजार मत प्राप्त हुए थे।

प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार बनी। तो, नेताजी ने अपने ‘सुदामा’ किरणपाल कश्यप को खाद्य एवं रसद विभाग का चेयरमैन बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव के ऐनवक्त एक न्यूज चैनल के स्टिंग आॅपरेशन में किरणपाल कश्यप फंस गए। चैनल ने रुपये लेकर चुनाव परिणाम प्रभावित करने की स्वीकारोक्ति के साथ वीडियो क्लिप चलाकर राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया था।

यही कारण रहा कि 2012 में वे महज 10 हजार वोटों के साथ चौथे नंबर पर खिसक गए थे। सपा सुप्रीमो और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पश्चिमी उप्र में कश्यप बिरादरी का वोट बैंक साधने के लिए किरणपाल कश्यप को एमएलसी प्रत्याशी बनाने की चर्चाएं हैं। अगर कश्यप एमएलसी बनते हैं तोलोकसभा चुनाव में उनकी असली अग्नि परीक्षा कैराना लोकसभा पर ही होगी।

क्योंकि थानाभवन विधानसभा सीट जहां से वे 2002 में विधायक रहे, कैराना लोकसभा के अंतर्गत ही आती है। कैराना से सपा ने पूर्व सांसद मरहूम मुनव्वर हसन की बेटी इकरा हसन को प्रत्याशी बनाया है। मुनव्वर हसन दो बार कैराना लोकसभा से सांसद रहे हैं। इकरा हसन के दादा चौ. अख्तर हसन 1984 तथा उनकी माताजी तबस्सुम हसन 2009 में कैराना से सांसद रही हैं।

किरणपाल कश्यप पर 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी प्रो. सुधीर पंवार का असहयोग करने का आरोप लगे थे। इसके चलते सुधीर पंवार 13 हजार वोटों पर सिमट गए थे। दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों से खबरें छन कर आ रही हैं, उन पर विश्वास किया जाए तो रविवार को लखनऊ में किरणपाल कश्यप का नाम दो बार सूची में जुड़ा और दो बार ही कटा है। दूसरी ओर, मेरठ से सपा के पूर्व दर्जा मंत्री सुधाकर कयश्प भी लाइन में बताए जा रहे हैं।

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