Friday, February 13, 2026
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मनुष्य प्रवृत्तियां

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रामायण काल की बात है, जब प्रभु राम लंका पर आक्रमण करने और चढ़ाई करने के लिए समुद्र देवता से रास्ता देने का आग्रह करते हैं और समुद्र मार्ग देने को तैयार नहीं होता। तब प्रभु राम लक्ष्मण को कहते हैं : हे लक्ष्मण! धनुष बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सुखा डालूं। प्रभु श्री राम कहते हैं कि मूर्ख से विनती नहीं करनी चाहिए, मूर्ख व्यक्ति प्रार्थना का मोल नही समझता क्योंकि वह जड़ बुद्धि होता है। आप उससे कितना भी अनुविनय करें पर वह उस पर गौर नही करता । ऐसे व्यक्ति भय से ही काम करते हैं।

इसी प्रकार कुटिल मनुष्यों के साथ प्रेमपूर्वक बात नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कुटिल व्यक्ति को दूसरों को कष्ट देने में ही आनंद की अनुभूति होती है। यह किसी के भी विश्वास पात्र नहीं होते। इनसे प्रीतिपूर्वक की गर्इं बातें आपके नजदीक नहीं ला सकतीं। कुटिल व्यक्ति अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी को भी संकट में डाल सकते हैं। तीसरे प्रकार के मनुष्य वे हैं, जो स्वभाव से कंजूस होते हैं। इस प्रकार के व्यक्तियों से उदारता या उपदेश से काम नहीं चलता। ये धन के लोभी होते हैं।

अत: उनसे किसी की मदद करने या फिर उनसे दान की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। कंजूस से बात करने पर समय की बर्बादी ही होती है। प्रभु श्री राम, अपने अनुज से कहते हैं, जीवन में इन तीन प्रकार के मनुष्यों से सावधान रहना चाहिए। मूर्ख, कुटिल और कंजूस व्यक्ति आप को किसी भी तरह से भी सुख नहीं दे सकते। मूर्ख अपनी जड़ बुद्धि से, कुटिल अपनी बुरी सोच से और कंजूस अपने लोभी व्यवहार से कष्ट के सिवा और कुछ नही दे सकते अत: इनसे सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।
                                                                                           प्रस्तुति : राजेंद्र कुमार शर्मा


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