- सिद्धचक्र महामंडल विधान का चौथा दिन
जनवाणी संवाददाता |
बिनौली: श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र बरनावा की तपोभूमि में अष्टह्निका महापर्व के उपलक्ष्य में चल रहे नो दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन रविवार को श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर भगवान को 64 श्रीफल समर्पित किए।
ब्रह्मचारी पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि अंहकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। व्यक्ति को अपने जीवन में हमेशा अंहकार का त्याग करना चाहिए। अंहकारवश व्यक्ति अपने जीवन में बहूमुल्य रिश्तों को भी खो देता है।है। यदि जीवन में प्रेम, सुख और शांति प्राप्त करना चाहते हैं|
तो हमेशा मीठा बोलना चाहिए और सभी के साथ विनम्रता पूर्वक व्यवहार करने से जीवन में मधुरता आती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को कभी भी लोभ नहीं करना चाहिए। जो लोग दूसरों का धन देखकर लोभ करते हैं। वे गलत कार्यों में संलिप्त हो जाते हैं|
जिसके कारण जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोभ के कारण व्यक्ति को कभी आत्मिक शांति प्राप्त नहीं होती है। यदि जीवन में सुख-शांति और आत्म संतुष्टि चाहते हैं तो लोभ का त्याग कर देना चाहिए।
विधान में मोहित जैन, शिखा जैन, अंशिका जैन, अरहंत जैन, प्रशांत जैन, प्राची जैन,।कृष्णा जैन, रमाबाई, सरिता जैन, पवन जैन,सतीश जैन,नीरज जैन आदि उपस्थित रहे।

