जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने इस्तीफे की विपक्ष की मांग पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें कांग्रेस से जुड़े होने और दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र के मंत्रियों और सांसदों के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज हैं, तो सिर्फ उनसे इस्तीफा क्यों मांगा जा रहा है।
नागेंद्र ने कहा, “आज आप मुझे इसलिए निशाना बना रहे हैं क्योंकि मैं कांग्रेस पार्टी से हूं और दलित हूं।” उन्होंने दावा किया कि 326 लोगों में से 126 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें अपहरण, दुष्कर्म, हत्या के प्रयास और यौन उत्पीड़न जैसे आरोप भी शामिल हैं।
नागेंद्र ने 126 लोगों के इस्तीफे की मांग की
नागेंद्र ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले उन 126 लोगों के इस्तीफे लिए जाने चाहिए, जिनके खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ 29 मामले हैं। इसके साथ ही उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के इस्तीफे की भी मांग की।
नागेंद्र ने कहा कि वह जमीन से उठकर मेहनत के दम पर राजनीति में आगे बढ़े हैं और अब उन्हें दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है।
अपने खिलाफ लगे आरोपों पर मंत्री ने कहा कि वह अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं और उन्हें राहत भी मिल चुकी है। उनके मुताबिक, अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है और फिलहाल उनके खिलाफ केवल आरोप हैं। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति खुद न्यायपालिका की भूमिका निभाते हुए किसी को आरोपी या दोषी घोषित नहीं कर सकता।
अदालत के फैसले पर भरोसा: नागेंद्र
नागेंद्र ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। अगर अदालत उन्हें दोषी ठहराती है और सजा सुनाती है, तो वह फैसले को स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि अदालत के सामने वह सिर झुकाएंगे और उसके फैसले का सम्मान करेंगे।
इस बीच, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की ओर से भी नागेंद्र को समर्थन मिला है। उनके राजनीतिक सचिव एएस पोन्नन्ना ने भाजपा को चुनौती दी कि अगर उसके पास नागेंद्र के खिलाफ कोई ठोस सबूत है तो उसे विधानसभा में पेश किया जाए।
पोन्नन्ना ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर भाजपा और केंद्र सरकार का मुखपत्र होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार कर्नाटक पुलिस और अपराध जांच विभाग पर भरोसा करती है। उनके मुताबिक, जांच अपराध जांच विभाग को सौंपे जाने के बाद नागेंद्र ने पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए तत्काल इस्तीफा दे दिया था और खुद को जांच से अलग रखते हुए अधिकारियों के साथ सहयोग किया।
पोन्नन्ना ने दावा किया कि करीब 79 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं और बाकी 4-5 करोड़ रुपये से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड व दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि निगम का एक भी रुपया गायब नहीं हुआ है। अदालत के आदेश के अनुसार बरामद 79 करोड़ रुपये वाल्मीकि निगम को लौटाए जाने हैं और यह रकम खातों में मौजूद है।
विपक्ष ने विधानसभा में किया विरोध
इससे पहले भाजपा नेताओं ने विधानसभा में काले शॉल पहनकर नागेंद्र को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का विरोध किया था। पार्टी नेताओं ने बेलगावी में धरना देकर भी उनके इस्तीफे की मांग की। विधानसभा में लगातार दूसरे दिन विपक्ष ने नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर हंगामा किया।
नागेंद्र पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन से जुड़े आरोप हैं। विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है।
डीके शिवकुमार ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के विरोध को राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को नोटिस देकर विधानसभा में चर्चा करनी चाहिए और सरकार को यह बताना चाहिए कि नागेंद्र को मंत्रिमंडल से क्यों हटाया जाना चाहिए।
शिवकुमार ने दावा किया कि कथित घोटाले में नागेंद्र की कोई भूमिका नहीं है। उनके मुताबिक, करीब 84 करोड़ रुपये के कथित गबन में से 79 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं और नागेंद्र से कोई रकम बरामद नहीं हुई है।
नागेंद्र पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा
नागेंद्र ने इससे पहले सिद्धारमैया सरकार में मंत्री रहते हुए आरोप लगने के बाद इस्तीफा दिया था। करीब दो साल बाद उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्हें 3 अगस्त को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और फिलहाल वह योजना एवं सांख्यिकी मंत्री हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने जुलाई 2024 में बेल्लारी के विधायक नागेंद्र को वाल्मीकि निगम घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। बंगलूरू की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में उन्हें जमानत दे दी थी। ईडी और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दाखिल आरोपपत्रों में भी उनका नाम शामिल है।
शिवकुमार ने कुमारस्वामी पर साधा निशाना
इस बीच, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बंगलूरू दक्षिण जिले के बिदादी के पास ग्रेटर बंगलूरू एकीकृत टाउनशिप परियोजना के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण के विरोध में जनता दल (सेक्युलर) के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी पर निशाना साधा।
शिवकुमार ने सवाल किया कि जब उन्होंने कुमारस्वामी को चर्चा के लिए बुलाया था, तो वह बैठक में क्यों नहीं आए। उन्होंने कहा कि जनता दल (सेक्युलर) को इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा करनी चाहिए।
कुमारस्वामी के कथित रियल एस्टेट कारोबार को लेकर लगाए गए आरोपों पर शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत किसने की थी, कुमारस्वामी इसके “पितामह” हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य रियल एस्टेट कारोबार करना नहीं, बल्कि जनता का कल्याण और विकास करना है।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी और जनता दल (सेक्युलर) रामनगर, कनकपुरा, चन्नपटना और मगड़ी के लोगों का विकास नहीं चाहते। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली जाएंगे। इसके बाद गुरुवार को तमिलनाडु के मामल्लपुरम में होने वाली दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे।

