जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पाकिस्तान और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर टिप्पणी की है। पत्रकारों से बातचीत में अय्यर ने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को ‘शर्मनाक’ बताया। उन्होंने दोनों चुनाव आयुक्तों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
अय्यर ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों का रवैया भी संतोषजनक नहीं रहा, क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उन 14-15 नोट्स का समर्थन नहीं किया, जिन्हें उन्होंने लिखा था। उन्होंने दावा किया कि उनके नजरिए से ये अब तक के सबसे खराब चुनाव आयुक्त रहे हैं।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल
मणिशंकर अय्यर ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हाल तक चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र तरीके से काम करता था।
अय्यर के मुताबिक, किसी संवैधानिक संस्था को अलग से कानूनी तौर पर स्वतंत्र बनाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि वह एक संवैधानिक संस्था है और इसी वजह से उसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव हुआ है और चुनाव आयुक्तों तथा न्यायाधीशों की नियुक्ति का तरीका पूरी तरह पारदर्शी नहीं है।
भारत की विदेश नीति पर भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता ने भारत की कूटनीति को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को यह संदेश देता है कि यह युद्ध का दौर नहीं है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति बनती है।
अय्यर ने कहा कि भारत कूटनीति और बातचीत की बात करता है, लेकिन पाकिस्तान के साथ संवाद नहीं हो रहा है। उन्होंने क्वाड में भारत की भागीदारी का भी जिक्र किया और कहा कि इससे चीन के साथ संबंधों पर असर पड़ा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा विदेश नीति को किस तरह की कूटनीति कहा जा सकता है और इसका भारत की रणनीतिक स्वायत्तता से कितना संबंध है।
भारत-पाकिस्तान बातचीत की पैरवी
इससे पहले मणिशंकर अय्यर भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साध चुके हैं। श्रीनगर में आयोजित पांचवें ‘हल्ला बोल’ सम्मेलन में उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने की वकालत की थी।
अय्यर ने कहा था कि अगर भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है, तो दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू करने का साहस भी होना चाहिए।
अटारी-वाघा बॉर्डर पर बातचीत का सुझाव
अय्यर ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के लिए अटारी-वाघा सीमा का विकल्प भी सुझाया था। उन्होंने कहा था कि सीमा पर ही एक टेबल लगाकर दोनों देशों के प्रतिनिधि बातचीत कर सकते हैं। इससे संवाद के लिए किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच अतीत के विवादों पर लगातार बहस करते रहना विदेश नीति का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, किसी भी रचनात्मक समाधान तक पहुंचने का रास्ता बातचीत और संवाद से होकर गुजरता है।

