- पांच चिता और दो मासूम बच्चियों का ब्रजघाट पर अंतिम संस्कार देख परिजन रिश्तेदार रो पड़े, गमगीन माहौल में किया अंतिम संस्कार
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिसने भी एक साथ सात लाशें देखीं उसका कलेजा मुंह को आ गया। हर घर से महिलाओं की चीत्कार और मासूम बच्चों के साथियों के रुदन ने लोगों को हिलाकर रख दिया। आसपास से आए लोगों का भी धैर्य जवाब दे गया। सड़क हादसे में जिंदा जलकर मरे दो मासूमों समेत सात लोगों के शवों का सोमवार को गमगीन माहौल में ब्रजघाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।

एक साथ सात लोगों की अर्थी उठी तो हर किसी की आंखें नम हो गई। इस दृश्य को हर कोई देख नहीं पाया। सभी की आंखों से आसूं टपक रहे थे। हृदय विदारक इस हादसे से हर कोई हिल गया हैं। हंसता-खेलता परिवार आखिर चला गया। सनातन संस्कृति के अनुसार वेद मंत्रों उच्चारण के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
राजस्थान के चुरु सालासर बालाजी स्टेट हाइवे फतेहपुर में कार ट्रक की भिड़ंत में मेरठ के दो परिवार की दो मासूम बच्चियों सहित सात लोगों की दर्दनाक मौत के बाद सोमवार को गमगीन माहौल में सभी का अंतिम संस्कार ब्रजघाट पर किया गया। देर शाम एक साथ पांच चिता जली तो परिवार और रिश्तेदार पूरी तरह फफक पड़े। आंखों के सामने दो परिवार की जलती चिताओं को देखकर सभी का कलेजा मुंह को आ गया।
गम चिंता और उदासी भरे माहौल में लोग दर्द विदारक शून्य भाव से चिताओं को जलती देखते रहे। ब्रहमपुरी क्षेत्र के शिवशंक र पुरी निवासी हार्दिक बिंदल उनकी पत्नी स्वाति, मां मंजू और दो छोटी मासूम बेटियां सिद्धीक्षा और रिदीक्षा और सांईपुरम गली नंबर-5 निवासी मौसी नीलम गोयल व मौसेरे भाई आशुतोष गोयल सेन्ट्रो कार से राजस्थान में जीण माता के दर्शन करने गये थे। रात को सभी लोग वहीं रुके थे।


रविवार सुबह सभी ने जीण माता के दर्शन किये और वहां से इसके बाद सालासर चूरु जिले के पास मालासी, भैरु के दर्शन किये। उसके बाद वहां से रानी सती मंदिर जाने के लिए निकले थे। फतेहपुर चुरु सालासार स्टेट हाइवे पर आशीर्वाद पुलिया पर चढ़ते ही चंद मीटर दूरी पर उनकी कार ओवरटेक करते हुए सामने जा रहे ट्रक में जा घुसी। जिसके चलते कार में भीषण आग लग गई।
ट्रक में लदी रुई में भी भयंकर आग लग गई। हादसे के दौरान सातों की कार में जिंदा जलने पर मौत हो गई थी। रविवार को सातों शवों को फतेहपुर के राजकीय धानुका उपजिला अस्पताल ले जाया गया था। मृतकों के परिवार और तमाम रिश्तेदार भी हादसे की सुनकर फतेहपुर पहुंचे गये थे। सोमवार को सभी शवों को मेरठ में घर ब्रहमपुरी में शिवशंक र पुरी और आर के पुरम में लाने की बात तय थी, लेकिन हादसा दर्दनाक था। जिसके चलते तमाम रिश्तेदार और परिजनों ने निर्णय लिया कि शवों को सीधे घर न लाकर सीधे ब्रजघाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया जाये।
देर शाम फतेहपुर से सातों शवों को ब्रजघाट पर लाया गया। मेरठ से सीधे ब्रजघाट पर परिवार के लोगों के अलावा तमाम रिश्तेदार सहित 50 लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए। करीब सवा नौ बजे के आसपास सभी पांच शवों का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं दो मासूम बच्चियों को भी अंतिम संस्कार कर उनके शवों को गंगा में प्रवाहित कर दिया गया।
बेटे के शव को दी मुखाग्नि तो बेसुध हुए मुकेश
सोमवार देर शाम जैसे ही राजस्थान के फतेहपुर से सात शव गाड़ियों में सफेद कफन में लिपटे गढ़ गंगा ब्रजघाट पर पहुंचे तो अंतिम संस्कार में शामिल लोगों का दिल चित्कार उठा। उधर, बेटे आशुतोष गोयल और पत्नी नीलम का शव उनके पति मुकेश गोयल ने देखा तो बेसुध हो गये। मृतकों के परिवार के तमाम खानदानी लोग और रिश्तेदार व संबंधी भी खुद को रोक नहीं पाये।
जलती पांच चिताओं को देखकर लोग आंसु नहीं रोक पाये। ब्रजघाट पर एक साथ पांच चिता जल उठी तो मां गंगा का भी निश्चल जल शांत भाव से निहारते हुए आगे शून्य भाव में एकांतीय होता चला गया। सभी के होठों पर एक ही आवाज थी, आखिर इन लोगों ने भगवान का क्या बिगाड़ा था। ये तो जीण माता सालासर में दर्शन कर लौट रहे थे।

ब्रजघाट पर देर शाम मृतक हार्दिक बिंदल 40, हार्दिक की पत्नी स्वाति बिंदल 37, बेटी सिद्धिक्षा 6 वर्ष, रिद्धिक्षा और मां मंजू 62 वर्ष व हार्दिक के मौसेरे भाई आशुतोष गोयल व उसकी मां नीलम गोयल के शव वहां आये तो मौके पर मौजूद कई सौ लोग भावुक हो उठे। उधर, आशुतोष के पिता मुकेश गोयल बेटे का शव देखकर तो बेहोश होकर गिर पड़े। एक तरफ बेटे का शव और दूसरी तरफ पत्नी नीलम का शव रखा हुआ था।
वहीं हार्दिक और उसकी पत्नी स्वाति और मां मंजू के शवों व दो मासूम बच्चियों के शव को देखकर मुकेश गोयल गश खाकर गिर पड़े। हार्दिक और उसकी पत्नी स्वाति व मां मंजु और मुकेश गोयल की पत्नी नीलम को हार्दिक के मामा देवपुरी निवासी रजनीश गोयल ने चिता को मुखाग्नि दी। वहीं, मुकेश गोयल ने जवान बेटे की चिता में जैस ही मुखाग्नि दी तो सभी लोगों की आंखें नम हो गई।
पांच चिता जली तो अंतिम संस्कार के लिए आये कई सौ लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाये। अंतिम संस्कार में मृतक आशुतोष के ताऊ चाचा लोकेश, राकेश, दिनेश, महेश, वहीं हार्दिक के ताऊ संत सहित तमाम रिश्तेदार सगे संबंधी सहित करीब तीन सौ लोग मौजूद रहे।
मासूम रिद्धि और सिद्धि की मौत पर स्कूल किया बंद
हार्दिक की बेटी सिद्धिक्षा 6 वर्ष और छोटी बेटी रिद्धि की हादसे की मौत के बाद गुरुनानक नगर में एबीसी स्कूल में भी अवकाश घोषित कर दिया गया। हादसे में मारे गये मृतकों के लिए स्कूल में दो मिनट का मौन रखा गया। उसके बाद प्रबन्धन ने स्कूल में सोमवार को अवकाश घोषित कर दिया। दोनों मासूम बच्चियां प्री नर्सरी और यूकेजी में पढ़ती थी।

ट्रक में टकराने के बाद कार की बैट्री से लगी थी भीषण आग
आशुतोष गोयल के दोस्त मोहित ने बताया कि हादसे के दौरान कार ओवरटेक करने के चक्कर में आगे चल रहे ट्रक में जा घुसी थी। जिससे कार में रखी बैट्री में आग लगने पर धमाका हुआ था। उधर, ट्रक में लदी मेडिकल के लिए प्रयोग में लाये जाने वाली रुई भी सीधे आकर कार के अगले हिस्से में गिर गई।
रुई ने तुरंत आग पकड़ ली और कार चंद सेकंड में आग का गोला बन गई। जब तक लोग आते तब तक कार में बैठे सभी लोग हादसे का शिकार हो गये। बताया जाता है कि कार की सीएनजी किट में कोई धमाके जैसी वाली बात सामने निकलकर नहीं आयी। बैट्री फटने से कार में आग लगी।
खंदक बाजार बंद रखा व्यापारियों ने मनाया शोक
ब्रहमपुरी और आरकेपुरम के सात लोगों की हादसे में हुई मौत पर कोतवाली क्षेत्र के खंदक बाजार के व्यापारियों ने पूरा बाजार बंद रखकर शोक मनाया। चूंकि हादसे में मारे गये आशुतोष गोयल की खंदक में दुकान थी। जिसकी वजह से व्यापारी अपने साथी व्यापारी की मौत पर रविवार और सोमवार पूरे दिन शोक मनाते देखे गये। सोमवार को पूरे दिन व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रख मृतकों के परिवार को ढांढस बंधाया।

शिवशंकरपुरी व आरकेपुरम में पसरा सन्नाटा
सीकर जिले के फतेहपुर में हादसे में मारे गये पांच लोग और दो मासूम बच्चियों की मौत को सुनकर ब्रहमपुरी के शिवशंकरपुरी मे लोगों के घरों में खाना तक नहीं बना। लोग उदासी रुंधे भाव से हार्दिक के घर पहुंच उनके परिवार के लोगों को ढांढस बंधाते रहे। घर में मौजूद महिलाओं का रो रोकर बुरा हाल था। एक तरफ हार्दिक के घर पर ताला लटका हुआ मौत के उस मंजर की कहानी को याद दिला वीरानी बयां कर रहा था।
लोग कह रहे थे कि कैसा पूरा परिवार नवरात्र पर माता के दर्शन करने गया और लौटकर नहीं आया। हार्दिक के घर को देखकर महिलाओं और लोगों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। कालोनी की महिलाएं घर आती और रो पड़ती। ऐसा ही हाल आरकेपुरम कालोनी का था। जहां मुकेश गोयल के पूरे घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। हर किसी की जुबान पर कोई शब्द न होकर सिर्फ आंंखों में आंसू छलकते दिखाई दे रहे थे।
उधर, पति आशुतोष की मौत और सास नीलम को घर में न देख पत्नी पारुल का हाल तो बेहाल था। पारुल का गम उदासी वाला वो चेहरा महिलाओं से नहीं देखा जा रहा था। पारुल अपने पति के फोटो को देखती तो कभी अपनी सास को लेकर बेसुध हो जाती। रिश्तेदार और तमाम सगे संबंधी भी उसे संभालने की कोशिश करते, लेकिन उसे कुछ होश नहीं बनता दिखाई देता था। पति की मौत की सुनकर पारुल का बुरा हाल था।

