Tuesday, March 17, 2026
- Advertisement -

बेरोजगारी बना हथियार तो फिर कैराना में पस्त हो जाएगी भाजपा

राजपाल पारवा |

शामली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रति वर्ष दो करोड़ नौकरियां देने का वादा सिर्फ वादा बनकर रह गया है। इसलिए शिक्षित बेरोजगार रोजगार के लिए राज्य दर राज आवाज बुलंद कर रहे हैं। अगर नौकरियां निकलती हैं, तो वे पेपर लीक का शिकार हो जाती हैं। ऐसे में शिक्षित बेरोजगार हाथ मलते रह जाते हैं। कैराना लोकसभा की बात करें तो 20 से 29 आयु वर्ग के 3.43 लाख युवा मतदाता हैं। यह वह वोटर है जो नौकरी के लिए ऐड़ियां रगड़ रहा है। ऐसे में अगर 20 से 29 वर्ष के शिक्षित बेरोजगार ने लोकसभा चुनाव में बेरोजगारी को अपना हथियार बना लिया तो फिर भाजपा के पसीने छूट जाएंगे।

कैराना लोकसभा की मतदाता सूची जिला निर्वाचन अधिकारी रविंद्र सिंह द्वारा गत 23 जनवरी को फाइनल की गई। कैराना लोकसभा के अंतर्गत जनपद की कैराना, थानाभवन और शामली तथा सहारनपुर जनपद की नकुड़ व गंगोह विधानसभा सीटें आती हैं। जनपद शामली की तीन विधानसभा सीटों पर 9 लाख, 69 हजार, 956 मतदाता हैं। अगर नकुड़ और गंगोह को मिला लिया जाए तो यह संख्या 17 लाख, 14 हजार, 758 हो जाती है। सर्वाधिक 3,86027 मतदाता गंगोह विधानसभा में हैं जबकि सबसे कम 3,14,875 शामली विधानसभा में हैं।

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा जहां विकसित भारत और वर्ल्ड की थ्री ट्रिलियन अर्थव्यवस्था तथा अगले पांच वर्ष तक 80 करोड़ जनता को मुफ्त में राशन के रूप में मोदी की गारंटी दी जा रही है, तो वहीं विपक्ष के रूप में ‘इंडिया’ गठबंधन बेरोजगार, महंगाई, एमएसपी को गारंटी कानून, जातीय जनगणना को मुद्दा बना रहा है। यूपी में पहले पुलिस और अब आरओ-एआरओ की भर्ती परीक्षा को लेकर जिस तरह युवा वर्ग ने अंगडाई ली है, उसके चलते सरकार को पेपर लीक के आरोपों के चलते ये परीक्षाएं निरस्त करनी पड़ी हैं।

यही कारण है कि अगर आसन्न लोकसभा चुनाव में कैराना सीट पर शिक्षित बेरोजगार मुखर हुआ तो फिर भाजपा के पसीने छूट जाएंगे।

दरअसल, कैराना लोकसभा में जहां 18 से 19 आयु के शामली की तीन विधानसभा सीटों पर 10,865 नए वोटर जुड़े हैं, वहीं इसमें नकुड़ और गंगोह का औसत जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 18 हजार को पार कर जाता है। दूसरी ओर, शिक्षित बेरोजगार की श्रेणी में आने वाला 20 से 29 आयु वर्ग का मतदाता 3 लाख, 47 हजार,343 के लगभग है। इनमें शामली जनपद में 2 लाख, 7 हजार, 343 और सहारनपुर की नकुड़ तथा गंगोह विधानसभा को जोड़ दिया जाए तो यह 3.47 लाख से ऊपर पहुंच जाता है।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी ने 92 हजार से जीत हासिल की थी, लेकिन तब बेरोजगारी बड़ा मुद्दा नहीं था। क्योंकि युवाओं को दो करोड़ नौकरियां प्रतिवर्ष दिए जाने के सब्जबाग दिखाए गए थे। साथ ही, 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले ने पूरा लोकसभा चुनाव ही पलट दिया था, लेकिन इस बार परिस्थितियां एकदम विपरीत हैं। बेरोजगारी के साथ-साथ महंगाई, एमएसपी की गारंटी कानून, जातीय जनगणना बड़े मुद्दे बनकर उभर रहे हैं। इसलिए कैराना लोकसभा सीट प 3.47 लाख युवा वोटर चुनाव परिणाम को पलटने की क्षमता रखता है। हालांकि यह आने वाला समय ही बताएगा कि बेरोजगारी लोकसभा चुनाव में कितना बड़ा मुद्दा बनता है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP: मुरादाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई कार, चार युवकों की मौत

जनवाणी ब्यूरो । नई दिल्ली: भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी।...

सिलेंडर बिन जलाए रोटी बनाने की कला

मैं हफ्ते में एक दिन आफिस जाने वाला हर...

सुरक्षित उत्पाद उपभोक्ता का अधिकार

सुभाष बुडनवाला हर वर्ष 15 मार्च को विश्व भर में...

पुराना है नाम बदलने का चलन

अमिताभ स. पिछले दिनों, भारत के एक राज्य और कुछ...
spot_imgspot_img