- शिव चौक सदर जॉली स्टोर, सर्राफा बाजार और दाल मंडी में भव्य निर्माण पर हर कोई साधे है चुप्पी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रिहायशी पुराने मकानों की मरम्मत के नाम पर नए व्यवसायिक, लेकिन अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। इन सभी अवैध निर्माण में कैंट बोर्ड के भाजपा से जुड़े बड़े सदस्यों का नाम लिया जा रहा है। हालांकि सेटिंग-गेटिंग की बात को भी एक सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसके बगैर इतने बड़े स्तर पर अवैध व्यवसायिक निर्माण संभव नहीं हैं।
अवैध निर्माण के इन तीन बडे मामलों में रिहायशी भवनों की मरम्मत की बात का उल्लेख किए जाने की वजह से कैंट बोर्ड कार्रवाई नहीं कर रहा है। हालांकि जग जाहिर है कि तीनों ही निर्माण व्यवसायिक हैं। नजर न आए ये दूसरी बात है। जिन तीन निर्माणों का यहां जिक्र किया जा रहा है उनमें सबसे ज्यादा खामियां व झोल जॉली स्टोर के अवैध निर्माण में है।

जीएलआर में नाम तक नहीं
शिव चौक सदर स्थित जॉली स्टोर के अवैध निर्माण को भवन की मरम्मत दर्शाया गया है। भाजपाइयों से कनेक्शन की बदौलत किए जा रहे इस अवैध निर्माण में सुना तो यहां तक जा रहा है कि जिन रिहायशी भवनों में कायदे कानून ताक पर रखकर अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं। उनको खाली कराया गया है। यहां रहने वाले परिवारों को हर तरह से मजबूर किया गया।
सदर सर्राफा बाजार
कैंट के शहर सर्राफा बाजार में खुलेआम कराए जा रहे अवैध निर्माण पर भी सब कुछ देखते हुए कोई मुंह खोलने या कार्रवाई को तैयार नहीं। अवैध निर्माण कर तीन मंजिला व्यवसायिक भवन खड़ा कर दिया गया है। जहां अवैध निर्माण किया जा रहा है कुछ समय पूर्व उसके ठीक सामने वाले भवन में भी इसी प्रकार से अवैध निर्माण कराया गया था। अवैध निर्माण के बाद वहां शानदार शोरूम बनकर खड़ा कर दिया जहां व्यवसायिक गतिविधियां की जा रही है। उसी तर्ज पर उन्हीं लोगों द्वारा सराफा मार्केट में ये अवैध निर्माण कराया जा रहा है।
सदर दाल मंडी
कैंट के सबसे व्यस्त व भीड़ वाले स्थानों में शामिल सदर दाल मंडी में भी तमाम कायदे कानूनों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण किया जा रहा है। रात के अंधेरे नहीं बल्कि कैंट बोर्ड पर आंखें तरेरते हुए जिस प्रकार से अवैध निर्माण किया जा रहा है उससे कैंट बोर्ड प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्यों नहीं कार्रवाई की जा रही है। कितने का नक्शा पास है और कितने निर्माण की अनुमति है तथा मौके पर कितना निर्माण किया जा रहा है।
ये लिखा है कैंट ऐक्ट में
कैंट ऐक्ट के नियमानुसार जब तक भवन स्वामी का नाम जीएलआर में न चढ़ा हो, तब तक उस भवन का न तो नक्शा पास किया जा सकत है न ही किसी प्रकार के निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। आमतौर पर इस प्रकार के अवैध निर्माण के पीछे मरम्मत की अनुमति का प्रचलन है, लेकिन जिन उक्त अवैध निर्माणों की यहां बात की जा रही है जानकारों की मानें तो उनमें तो अवैध निर्माण करने वालों का नाम तक जीएलआर में दर्ज नहीं। उसके बाद भी इसे दबंगई ही कहा जाएगा कि तमाम कायदे कानून होते हुए भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ये कहना है बोर्ड प्रशासन का
बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि जहां भी अवैध निर्माण की सूचना मिलती वहां उचित नोटिस दिया जाता है। इन नोटिस की सुनवाई जीओसी इन चीफ व पीडी स्तर के सीनियर अधिकारी करते हैं। जिनकी सुनवाई में अपनी खारिज कर दी जाती है उन निर्माणों को ध्वस्त कर दिया जाता है, लेकिन ध्वस्तीकरण की भी एक प्रक्रिया है। उसके तहत ही कार्रवाई की जाती है। पहले नोटिस, फिर सुनवाई और सुनवाई में अपील खारिज होने के बाद ध्वस्तीकरण या फिर सील सरीखी कार्रवाई।
बंगला नंबर-210 में बड़े स्तर पर किया जा रहा अवैध निर्माण
वेस्ट एंड रोड शिव चौक के समीप ओल्ड ग्रांट के बंगला नंबर-210 जो नवाब की कोठी के नाम से पहचाना जाता है, उसमें इन दिनों बड़े स्तर पर अवैध निर्माण किया जा रहा। पहले यहां कैसल व्यू के नाम से विवाह मंडप बनाया गया था। ओल्ड ग्रांट के बंगल में चेज आॅफ परपज तथा सब डिवीजन सरीखी तमाम कारगुजारियां कर दी गयी, लेकिन उसके बाद भी कार्रवाई नहीं। अब यहां ग्रांड कैसल व्यू के नाम से नया व्यवासायिक निर्माण किया जा रहा है।
जानकारों की मानें तो मल्होत्रा एन्क्लेव आर्मी कालोनी में रहने वाले फौजी अफसरों के परिवारों के लिए बड़ा खतरा माने जाने वाले इस अवैध निर्माण का मकसद यहां हुक्का बार सरीखा रैस्टारेंट की तैयारी है। हालांकि हम इसकी पुष्टि नहीं करते, लेकिन आसपास रहने वालों का का कुछ ऐसा ही कहना कि अवैध निर्माण करने वालों का मकसद हुक्का है। इसके लिए इन दिनों दिल्ली से बुलाए कारीगर काम कर रहे हैं।

हैरानी की बात तो यह है कि कैंट अफसरों की टीम भी यहां काम रूकवाने के लिए आयी बतायी जाती है, उसके बाद भी यहां निर्वाध तरीके से अवैध निर्माण जारी है। न कैंट प्रशासन न ही कैंट बोर्ड के सदस्य इसको लेकर ऐक्शन मोड में दिखाई देते हैं। विगत दिनों इससे चंद कदम की दूरी पर किए गए एक ध्वस्तीकरण के बाद यहां भी ध्वस्तीकरण की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

अवैध निर्माण करने वालों ने जता दिया है कि उन्हें किसी का खौफ नहीं। भले आसपास के लोग इस अवैध निर्माण को बड़ा खतरा मानकर चल रहे हों। इस बीच यह भी जानकारी मिली है कि अवैध निर्माण को लेकर एक शिकायत कैंट बोर्ड के नए अध्यक्ष अर्जुन सिंह राठौर की मेल पर भी की गयी है।

