Sunday, March 22, 2026
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फ्लोमीटर बनाने की अवैध फैक्ट्री पकड़ी, 800 बरामद

  • एसओजी ने पांच लोग गिरफ्तार किये, कई कस्बों में थी सप्लाई
  • 300 का फ्लोमीटर बेच रहे थे दो से ढाई हजार में

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक ओर जरूरतमंद लोगों को आक्सीजन गैस के सिलेंडर में लगने वाला फ्लोमीटर नहीं मिल रहा वहीं लिसाड़ीगेट में अवैध रूप से फ्लोमीटर बनाये जा रहे हैं। पुलिस ने बुनकर नगर में छापामारी करके पांच लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से 800 बने हुए फ्लोमीटर और कई अधबने फ्लोमीटर बरामद किये हैं। आरोपियों ने बताया कि वो इनको कई कस्बों में दो से ढाई हजार रुपये में बेच रहे थे।

कोरोना वैश्विक महामारी के बीच लोग महामारी में जिंदगी बचाने में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों की भी कालाबाजारी जोरों पर है। ऐसे में लोग कालाबाजारी कर मोटी रकम जुटा रहे हैं। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि मामला लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के बुनकर नगर खेड़े वाली मस्जिद के पास का है। जहां क्राइम ब्रांच और एसओजी को सूचना मिली थी आॅक्सीजन सिलेंडर पर इस्तेमाल किए जाने वाले फ्लोमीटर बनाए जा रहे हैं।

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जब पुलिस ने फैक्ट्री पर छापा मारा तो वहां भारी मात्रा में फ्लोमीटर बनाए जा रहे थे। वहीं, पुलिस ने फैक्ट्री मालिक इमरान और वहां काम कर रहे, जुबीन, शादान, जैद, नाइम वसीम, पुलिस ने जब उनसे पूछताछ की तो पूछताछ में इमरान ने बताया कि उसका यह कारखाना गैस के नोजल बनाने का है, लेकिन कोरोना काल में फ्लोमीटर की डिमांड लगातार बढ़ रही थी। ऐसे में इमरान को आइडिया आया कि क्यों न अपनी फैक्ट्री में फ्लोमीटर तैयार किए जाएं इमरान ने बताया कि वह मेरठ की विभिन्न स्थानों पर बनी दुकानों पर इन फ्लोमीटर को 1000 से 1200 की कीमत में बेचा करता था। वहीं, फिलहाल पुलिस ने इमरान और उसके पांच साथियों को गिरफ्तार करते हुए भारी मात्रा में फ्लोमीटर अपने कब्जे में ले लिए हैं। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि एक फ्लोमीटर बनाने में 300 रुपये का खर्च आता था। वो इसे आसपास के कस्बों में डेढ़ से ढाई हजार रुपये में बेच देते थे। पुलिस ने जब छापा मारा उस वक्त भी एक परेशान व्यक्ति डेढ़ हजार रुपये में फ्लोमीटर लेकर जा रहा था। पुलिस ने बताया कि इन फ्लोमीटर में मानक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। आॅक्सीजन कितनी रिलीज होनी है, इसकी व्यवस्था नहीं थी। आरोपियों ने बताया कि शहर के बी और सी ग्रेड के नर्सिंग होमों में इनकी सप्लाई की जा रही थी। फैक्ट्री मालिक इमरान ने पुलिस को बताया कि तीन महीने से फ्लोमीटर बनाने का काम चल रहा था।
खैरनगर में छह हजार तक में बिका अवैध फ्लोमीटर
कोरोना काल में जब आॅक्सीजन की कमी से लोगों की जान जा रही थी तब ब्लैक करने वालों की चांदी आ गई। इन मुनाफाखोरों ने छह हजार रुपये तक में एक फ्लोमीटर बेचा। शहर में आसपास के जनपदों में फ्लोमीटर की कमी पड़ गई। पूरे 40 दिन तक जरूरतमंद लोगों को फ्लोमीटर के लिये भटकना पड़ा और एक हजार रुपये का फ्लोमीटर मुंह मांगे दामों में खरीदना पड़ा।

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