- नगर निगम से नहीं छूटे ठेके, अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा व्यापार
- आरोप: अधिकारियों से सेटिंग करके सड़क पर ही बना दी गई पार्किंग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम द्वारा कुछ पार्किंगों के ठेके छोड़े गये हैं, जोकि पुराने समय से चलते आ रहे हैं। हर बार उन्ही ठेकों को लेकर बोली लगाई जाती है, लेकिन शहर में ऐसे कई स्थान है। जहां नगर निगम द्वारा ठेके तो छोड़े नहीं गये हैं, बल्कि अधिकारियों से सेटिंग करके सड़क पर ही पार्किंग बना दी गई है। जैसे बेगमपुल नाला रोड, कचहरी रोड, मेरठ कॉलेज के पास, मेडिकल के सामने, भैंसाली बस अड्डे के पास अवैध पार्किंग चल रही है।
जिसका पैसे नगर निगम को नहीं जाता बल्कि ठेकेदार को व जिस अधिकारी की मिलीभगत से अवैध पार्किंग चल रही है, उनको जाता है। पहले भी कई बार कचहरी के बाहर चारों गेटों पर बनी पार्किंग को लेकर भी विवाद हो चुका है, लेकिन उसके बाद भी अभी तक यहां की पार्किंग का ठेका नगर निगम द्वारा नहीं छोड़ा गया है। चारों गेट के बाहर चल रही पार्किंग का समय कई साल पहले समाप्त हो चुका है, लेकिन अधिकारियों से सेटिंग करके इन पार्किं गों से अब भी कार व बाइक वालों से वसूली की जा रही है।
इसी प्रकार का टाउन हाल में बनी पार्किंग का कुछ हिस्सा नगर निगम द्वारा बोली पर छोड़ा गया है, लेकिन ठेकेदार द्वारा टाउन का पीछे का हिस्सा भी पार्किंग के अंदर प्रयोग में लिया जा रहा है, जबकि वह हिस्सा घूमने आने वाले लोगों के लिए है, लेकिन उस पर पार्किंग का कब्जा हो चुका है। वहीं, बेगमपुल कचहरी रोड पर दयानंद नर्सिंग होम के सामने नाला पाटकर पार्किंग बनाई गई थी। जिसको नगर निगम द्वारा ठेकेदार को छोड़ भी गई है, लेकिन ठेकेदार द्वारा बेगमपुल नाले से लेकर दयानन्द नर्सिंग होम तक नाले के किनारे पड़ी जगह को भी अवैध पार्किंग बना दी है। जहां पर कार व बाइक खड़ी करने वालों से पैसे वसूले जाते हैं।
कॉरिडोर में रैपिड रेल के साथ वाटर हार्वेस्टिंग भी
दिल्ली से मेरठ के बीच बन रहे देश के पहले आरआरटीएस कॉरिडोर पर वर्षा जल संचयन के लिए प्रभावी तंत्र तैयार किया जा रहा है। दिल्ली के सराय काले खां से लेकर मोदीपुरम तक के एलिवेटेड वायडक्ट, स्टेशनों और डिपो में 900 से ज्यादा वर्षाजल संचयन पिट्स बनाए जा रहे हैं। इनमें से लगभग 75 प्रतिशत से ज्यादा का काम पूरा हो चुका है और बाकी का कार्य प्रगति पर है। इसके जरिए लाखों क्यूबिक मीटर ग्राउंड वॉटर रिचार्ज होने की अपेक्षा है।
कॉरिडोर के एलिवेटेड हिस्से में बनाए जा रहे ये पिट्स एलिवेटेड वायाडक्ट स्पैन पर इस तरीके से बनाए जाते हैं, जिससे वर्षा-जल का अपने वास्तविक रूप में संग्रहण किया जा सके। कॉरिडोर का ज्यादातर हिस्सा सड़क मार्ग के बीच से होकर जाता है, इसलिए यह पिट्स अधिकतर सड़क के बीच में मीडियन पर बनाए जा रहे हैं। स्टेशनों पर प्रवेश-निकास द्वारों के पास 2-2 वर्षा पिट्स विकसित किए जा रहे हैं। कॉरिडोर पर ट्रेनों के रखरखाव और संचालन के लिए दुहाई डिपो तैयार हो चुका है और दूसरा मोदीपुरम में निर्मित किया जा रहा है।
दुहाई डिपो में 20 से ज्यादा वर्षा जल संचयन पिट्स हैं। आरआरटीएस कॉरिडोर पर 34 किमी सेक्शन में पिट्स सक्रिय कर दिए गए हैं। इसके साथ ही कॉरिडोर के अन्य हिस्सों के निर्माण के साथ-साथ इनका निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन पिट्स में वर्षाजल को साफ करने के लिए रोड़ी और बालू के तीन परत वाले फिल्टर्स भी बनाए जा रहे हैं, ताकि जमीन के भीतर गंदगी मुक्त जल ही पहुंचे। पिट्स की गहराई लगभग 16 से 22 मीटर भूजल स्तर के मुताबिक रखी गई है। इससे भूजल स्तर को बढ़ाने में सहयोग मिलेगा।

