Sunday, February 22, 2026
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अधूरे एक्सप्रेस-वे पर दौड़ाये जा रहे वाहन

  • दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर चल रहा अभी निर्माण कार्य

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को फिलहाल चालू नहीं किया गया है, मगर फिर भी खतरनाक लापरवाही की जा रही है। यहां पर अधूरे एक्सप्रेस-वे पर वाहन दौड़ाये जा रहे हैं। एक्सप्रेस-वे पर काम चल रहा है, ऐसे में वाहनों की भिड़ंत हो सकती है, मगर इसकी परवाह एनएचएआई को भी नहीं है। अधूरे एक्सप्रेस-वे पर कतई वाहन नहीं दौड़ाये जा सकते।

काशी गांव से वाहनों को एक्सप्रेस-वे पर चढ़ा दिया जाता है,जहां से डासना तक वाहनों को ले जाया जाता है। क्योंकि 27 किमी तक डामर सड़क बन चुकी है। (मेरठ से डासना) अभी निर्माणाधीन है और उसे आम वाहनों को चलने के लिए खोला भी नहीं गया है, लेकिन लोग हैं कि मानते नहीं है।

आधे अधूरे बने एक्सप्रेस-वे पर दिन रात गाड़ियों के गुजरने का सिलसिला चलता रहता है। कार, बाइक, ट्रैक्टर, भैंसा-बुग्गी ही नहीं, बल्कि ट्रक और बसें भी निकल रही हैं। कई बार तो परिवहन निगम से संबद्ध डग्गामार यात्री बस भी इससे निकल रही हैं। लोगों के लिए ये समय बचाने और जाम से बचने का तरीका हो सकता है, लेकिन अगर थोड़ी-सी भी लापरवाही हो गई तो ये समझदारी किसी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

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एक्सप्रेस वे का काम लगातार गति से चल रहा है। कहीं खंभे लगाए जा रहे हैं तो कहीं डामर का कार्य हो रहा है। सफेद पट्टी लगाने वाली मशीन चल रही है तो वहीं क्रैश बेरियर और नाली को फिट करने के लिए क्रेन समेत तमाम भारी-भरकम मशीनें उसी एक्सप्रेस-वे पर खड़ी रहती हैं।

मिट्टी ढोने वाले डंपर भी फर्राटे के साथ उस पर चलते हैं, अब यदि किसी वाहन से टक्कर हो गई तो किसी दिन बड़ी अनहोनी हो सकती है। इस एक्सप्रेस वे पर क्योंकि पर क्योंकि अभी काम चल रहा है, इसलिए कई जगह पर वनवे भी है, अभी इससे सिर्फ कार्यदाई कंपनी के वाहन, मशीनें डंपर आदि ही चलते हैं बाकी वाहनों को इस पर पर चलने की अनुमति नहीं है। निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे पर वाहन चालक वाहनों को लेकर इसलिए निकल पड़ते हैं क्योंकि उन्हें 27 किमी तक न गड्ढा मिलता है न ही जाम।

मेरठ में गगोल रोड से एक रास्ता बहादुरपुर की ओर जाता है। उसी रास्ते से काशी टोल प्लाजा पर चढ़ने का रास्ता भी है। उसी रास्ते का फायदा उठाकर लोग एक्सप्रेस-वे पर वे पर चढ़ जाते हैं और आराम से भोजपुर, कुशलिया और डासना तक पहुंच जाते हैं।

डासना जाने वाले लोगों को कुशलिया में उतरना पड़ता है और वहां से मात्र दो किमी दूर एनएच-24 पर पहुंच जाते हैं। इसी तरह से दिल्ली और गाजियाबाद की तरफ से आने वाले बहुत से लोग अब इसी एक्सप्रेस वे वे का सहारा लेने लगे हैं। अब इस पर सुबह हो सुबह हो दोपहर, शाम हो या फिर रात रात। वाहनों के गुजरने का सिलसिला चलता रहता है।

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