नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को कमजोरी के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 253 अंक गिरकर 80,290 के स्तर पर पहुंच गया, वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 78 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 24,495 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और अमेरिका की ओर से भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के फैसले का असर घरेलू बाजार पर साफ देखा गया।
क्यों गिरे बाजार?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर आयात शुल्क को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। यह फैसला भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के चलते लिया गया। टैरिफ का यह कदम भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका को भेजे जाने वाले अधिकांश उत्पाद महंगे हो जाएंगे और उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता घटेगी।
इस फैसले से निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर पड़ा है, जिससे बाजार पर दबाव देखने को मिला।
वैश्विक बाजारों का हाल?
एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला रुख देखने को मिला।
जापान का निक्केई 225 और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 स्थिर रहे।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.12% गिर गया।
अमेरिकी बाजारों में हालांकि मजबूती देखी गई।
NASDAQ में 1.21% की तेजी,
S&P 500 में 0.73% और
Dow Jones में 0.18% की बढ़त रही।
हालांकि, ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान के बाद से सेमीकंडक्टर और चिप बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।
ट्रंप का टैरिफ फैसला, क्या असर होगा?
ट्रंप द्वारा घोषित अतिरिक्त 25% टैरिफ, पहले से लागू 25% शुल्क के ऊपर है, जिससे भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर कुल 50% शुल्क प्रभावी हो गया है। यह शुल्क WTO के मौजूदा नियमों से परे माना जा रहा है और इससे भारत को आर्थिक झटका लग सकता है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव पहले ही उच्च स्तर पर है और तेल, डेयरी, टेक्सटाइल, फार्मा और जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर जरूरी।
ट्रंप की टैरिफ नीति के चलते रुपये पर भी दबाव बन सकता है।
IT और फार्मा सेक्टर को निकट भविष्य में झटका लग सकता है।

