जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार में तीव्र बिकवाली ने निवेशकों के लिए चिंता के लाल झंडे दिखा दिए। सेंसेक्स ने 2,320 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,598 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 700 अंक टूटकर 23,764 पर आ गया। बैंक निफ्टी में भी 2,288 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 92.25 पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिकवाली के पीछे पांच मुख्य कारण हैं:
ईरान-इस्राइल युद्ध और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव – इस्राइल और ईरान के बीच मिसाइल हमले और बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों में डर पैदा किया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी टिप्पणियों ने भी अस्थिरता बढ़ाई।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल – मध्य पूर्व में तनाव और प्रमुख तेल उत्पादक देशों की उत्पादन कटौती के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो जून 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।
विदेशी निवेशकों की निरंतर निकासी – विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने लगातार छठे दिन भारी बिकवाली की, कुल 9,459 करोड़ रुपये की निकासी हुई। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 6,972 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को थोड़ा सहारा देने की कोशिश की।
वैश्विक बाजार में बिकवाली का दबाव – एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई 225 में 7.4%, ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 में 4.3% और अमेरिकी एसएंडपी फ्यूचर्स में 2.2% तक की गिरावट हुई।
सेक्टोरल बिकवाली और बढ़ता ‘फियर इंडेक्स’ – इंडिया VIX में 21% का तेज उछाल आया और यह 24.04 के स्तर पर पहुंच गया। पीएसयू बैंक, ऑटो, फाइनेंशियल, मीडिया और मेटल सेक्टर में भारी गिरावट हुई, जबकि डिफेंसिव सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व की कूटनीतिक स्थिति स्थिर नहीं होती और तेल की आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं दूर नहीं होतीं, बाजार में दबाव और जोखिम भरा माहौल बना रहेगा। इस बीच निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं।

