- 45 रुपये में मिलने वाला सरसों का तेल आज हुआ 185 रुपये किलो
- आएदिन बढ़ रही महंगाई ने तोड़ी अब हर वर्ग की कमर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया वाली लाइन आज जनता पर महंगाई की मार पर सटीक बैठ रही है। इस समय बेकाबू होती महंगाई से लोग परेशान है। परिवारों का मासिक बजट बिगड़ गया है। खाद्य तेल, रसोई गैस सिलेंडर सब्जी की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। पेट्रोल-डीजल के दाम तो हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। इससे यातायात के साधन भी महंगे हो गए हैं। इन खचों को व्यवस्थित करने में लोगों को अन्य चीजों में कटौती करनी पड़ रही है।
बता दें की महंगाई ने सभी का बजट बिगाड़ दिया है। खान पान से लेकर पढ़ाई तक का बजट बिगाड़ दिया है। रसोई गैस की कीमतें रोज आसमान छू रही है। बाकी कसर सब्जियों ने पूरी कर रखी है। सरसों के तेल का दाम 15 वर्ष में चार गुना बढ़ चुका है। इतना ही नहीं शहर में इधर-उधर जाने के लिए बस और आॅटो तक का किराया बढ़ चुका है।
महंगाई की सबसे अधिक मार मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड रही है। ऐसे में लोगों का कहना है कि क्या खाए, क्या पहने और क्या बचाए समझ में नहीं आता है। कोरोना के बाद से सरसों तेल, रिफाइंड और दालों के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई है। लोकल में जाने के लिए जहा लोगों को 5 से 10 रुपये देने होते थे आज पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बड़ जाने की वजह से वो भी 15 से 20 रुपये हो गया है।
घरेलू महिलाओं का कहना है कि निरंतर बढ़ रही महंगाई ने जहां घर का बजट बिगाड़ रखा है। वहीं अब लोगों की कमर भी तोड़ कर रख दी है। क्योंकि घर में कमाने वाले व्यक्तियों का वेतन तो बढ़ नहीं रहा है और खर्चे आए दिन बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
सब्जियों के दाम ने तोड़ी कमर
प्रतिभा कोठरी का कहना है कि पेट्रोल और डीजल के दामों के बढ़ने की वजह से जहां घरेलू सामानों में महंगाई की मार है। वहीं, फल और सब्जियां भी महंगी हो गई है। सब्जियों को खरीदने के लिए भी सोचना पड़ रहा है। वहीं, बाहर जाने के बारे में भी विचार करना पड़ रहा है।
40 प्रतिशत बढ़ा घर का बजट
रीना सिंघल का कहना है कि महंगाई बढ़ती जा रही है। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया है। दो साल पहले सरसों का तेल 90 रुपये हुआ करता था। आज वह 180 रुपये मिल रहा है। आलू और प्याज के दाम भी लगातार बढ़ रहे है। खाने पीने के दाम बढ़ने की वजह से लगातार घर खर्च के अन्य कार्यों में कटौती करनी पड़ रही है। ऐसे में घर का बजट 40 फीसदी बढ़ गया है और लोगों की आमदनी बढ़ नहीं रही है।
संभालना पड़ रहा बजट
आरती का कहना है कि सीमित कमाई के बीच आसमान छूती महंगाई से आमजन पर चौतरफा मार पढ़ रही है। खानपान से लेकर पढ़ाई लिखाई तक के बड़े खर्चे ने जेब काटने शुरू कर दी है। एक परिवार का मासिक खर्च लगभग 12 से 18 तक बढ़ गया है। इसके चलते कम आय, नौकरी पेशा और मध्यम वर्ग की मुश्किलें बढ़ गई है। रही सही कसर पेट्रोल, रसोई गैस और सब्जियों के बढ़े दामों ने पूरी कर दी है।
सभी सामान हुए महंगे
अलका का कहना है कि रसोई से लेकर घर की हर चीज महंगी हो गई है। इसकी वजह से घर के बजट को संतुलित कर पाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। पेट्रोल और डीजल की वजह से सब्जियां, तेल, कपड़े आदि सबकुछ महंगे हो गए हैं। ऐसे में घर का खर्च चलाना और भी अधिक भारी होता जा रहा है।
नहीं हो रही बजट में कटौती
रेखा शर्मा का कहना है कि रसोई का बजट तीन से चार गुना बढ़ गया है। तेल, सब्जी, फल, गैस, बिजली हर चीज महंगी हुई है। जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है। उसे देखते हुए अब तो बहुत सोच-विचार कर खर्चा करना पड़ रहा है। वहीं, बच्चों के लिए पैसा बचाना भी मुश्किल हो गया है। आने दिनों में महंगाई और भी अधिक बढ़ जाएगी, जो कम होने का नाम नहीं लेगी।

