- डेयरी संचालकों ने माइनर को बना दिया नाला, पूरी तरह गोबर से अटा पड़ा माइनर
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: नगर में सिंचाई विभाग डेयरी संचालकों पर खूब मेहरबान हो रहा है। डेयरी संचालकों ने सरधना माइनर को नालें में तब्दील कर दिया है। अब तो हालत यह है कि माइनर में मोबर की मोटी परत जम गई है। विभाग कार्रवाई करने के बजाए डेयरी संचालकों पर प्रेम बरसा रहा है। माइनर की सफाई के नाम पर भी खेल हो रहा है। शुक्रवार की रात माइनर गोबर से अटने के बाद टूट गया। जिससे गोबर युक्त पानी दूर तक खेतों में भर गया।
शनिवार को पटरी दुरुस्त कराने के साथ ही माइनर की सफाई कराने का काम किया गया। सिंचाई विभाग और डेयरी संचालकों की गठजोड़ किसानों पर भारी पड़ रही है। नवाबगढ़ी से होकर गुजर हे माइनर से सरधना, नवाबगढ़ी, मंढियाई आदि गांव के किसान अपने खेतों की सिंचाई करते थे। मगर सालों से इस माइनर का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। क्योंकि नंगला रोड से लेकर नवाबगढ़ी तक बनी दर्जनों डेयरियों ने माइनर को नाला बना दिया है।

डेयरी संचालक भैंसों का गोबर माइनर में बहाते हैं। इस कारण माइनर नियमित रूप से गोबर से चोक रहता है। सिंचाई विभाग के अधिकारी भी डेयरी संचालकों पर खूब मेहरबान हो रहे हैं। सेटिंग का खेल ऐसा है कि कार्रवाई नोटिस से आगे नहीं बढ़ती है। उच्चाधिकारियों को दिखाने के लिए नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बाद जेब गर्म करने का काम किया जाता है। वर्तमान में माइनर गोबर से पूरी तरह बंद है। शुक्रवार की रात नंगला रोड पर माइन की पटरी टूट गई।
जिससे गोबरयुक्त पानी दूर तक खेतों में भर गया। दर्जनों किसानों की फसल को भारी नुकसान हुआ। सूचना मिलने पर सिंचाई विभाग ने पटरी दुरुस्त कराई। साथ ही माइनर से गोबर निकलवाने का काम किया। हैरत की बात यह है कि हर साल कागजों में इस माइनर की सफाई होती है। मगर मौके पर हालत देखकर कोई नहीं बता सकता है कि यह माइनर है। सेटिंग के खेल में सिंचाई विभाग डेयरी संचालकों पर खूब मेहरबान हो रहा है। वहीं, इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
पिठलोकर मार्ग पर बने ‘मौत’ के गड्ढे
सरधना: पिठलोकर गांव में मुख्य मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में पहुंच चुका है। नदी पुल की ओर जाने वाले इस रास्ते में गहरे-गहरे गड्ढे हो गए हैं। गड्ढे भी इतने गहरे की उसमें पूरा आदमी समा जाए। इन गड्ढों की चपेट में आकर राहगीर खूब घायल हो रहे हैं। मगर ग्रामीणों की लगातार शिकायत के बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं। शायद अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।

क्षेत्र के पिठलोकर गांव में नदी की ओर जाने वाला रास्ता करीब एक दशक पूर्व बना था। सड़क निर्माण के कुछ दिन बाद ही क्षतिग्रस्त हालत में पहुंच गई थी। ग्रामीणों ने अधिकारियों से इस बात की शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक तो ठीक था, लेकिन वर्तमान में सड़क पर गहरे-गहरे गड्ढे हो गए है। सड़क धंसने के कारण यहां इतने गहरे गड्ढे हो गए हैं कि पूरा आदमी समा जाए।
मौत के इन गड्ढों की चपेट में आकर राहगीर आए दिन घायल होते रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह सड़क निर्माण के लिए कई बार नेताओं से लेकर अधिकारियों तक से मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। शायद अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।

