नीतू गुप्ता
लंबी ग्रीष्म ऋतु की गर्मी की परेशानी के बाद इंतजार होता है वर्षा ऋतु का। वर्षा ऋतु का मौसम सुहावना होता है। भीषण गर्मी के बाद मनुष्य, जीव जन्तु, जानवर, पौधे सभी बारिश के लिए तरस रहे होते हैं। वर्षा ऋतु में मंदाग्नि के कारण शरीर दुर्बल पड़ जाता है, इसलिए खान-पान में भी सावधानी बरतनी पड़ती है, वर्षा ऋतु में थोड़ी सी खान पान में हुई लापरवाही कई बीमारियों को आमन्त्रित करती है जैसे ज्वर, दस्त, पीलिया, टाइफायड, उलटी होना और फोड़े फुन्सी आदि। पानी गंदा पीने के कारण कई रोग हो सकते हैं-जैसे पीलिया, टाइफाइड, हैजा, आदि। सबसे उत्तम है इन दिनों पानी को उबालकर पीना, पर इतना समय किस के पास है कि सारा पीने का पानी उबालकर ठंडा कर फ्रिज में रखा जाए। पानी को फिल्टर कर या एक्वागार्ड आदि से साफ पानी ही विशेषकर वर्षा ऋतु में पीना चाहिए।
मक्खियां मच्छर भी इन दिनों जहां पानी रूका, वहीं अपना घर बना लेते हैं और मक्खियां हमारी खाने पीने की चीजों पर बैठती हैं और भोजन दूषित कर देती हैं। इन दिनों कॉकरोच आदि भी अधिक होते हैं। अपना भोजन ढककर रखें। ताजा भोजन ही खाएं। बर्तनों को भी अच्छी तरह साफ कर भोजन परोसना चाहिए। भोजन बनाने से पहले अपने हाथ धोकर भोजन पकाएं।
वर्षा ऋतु में पानी दूषित होने के कारण शरीर पर खुजली होने लगती है। पैरों की उंगलियों के बीच खुजलाने के बाद जख्म हो सकते हैं या उंगलियां सूज जाती हैं। वर्षा में नहाने के बाद या बारिश में भीगने के बाद शरीर को अच्छी तरह से पोंछ कर सूखे वस्त्र पहनें। उंगलियों के बीच तेल आदि लगायें।
फोड़े-फुंसी होने पर डॉक्टर को दिखा कर उचित इलाज करवाएं। फोड़े फुंसी ढक कर रखें नहीं तो मक्खी-मच्छर इन पर बैठ कर और अधिक जख्म बढ़ाएंगे। नीम की पत्तियों को उबाल कर ठंडा कर उस पानी को दूसरे पानी में मिलाकर स्नान करें। जल्दी आराम मिलेगा।
भीगे कपड़े अधिक समय तक पहने रखने से सर्दी भी लग सकती है। सर्दी लगने से खांसी, जुकाम हो जाता है। बारिश में बाहर न जायें। यदि अचानक भीग जायें तो शरीर पोंछकर सूखे वस्त्र बदल लें। पसीना ज्यादा आने पर प्रतिदिन अपने अंदर के वस्त्र बदलें।
मच्छरों से स्वयं को बचा कर रखें नहीं तो टायफाइड या तेज ज्वर हो सकता है। दरवाजे, खिडकी पर जाली लगवा कर रखें और उन्हें बंद रखें ताकि बाहर से मच्छर घर में न घुस सकें। मच्छरदानी या मच्छरों को भगाने वाली दवा का प्रयोग करें। घर में, कूलर में तथा आस पास की नालियों में पानी इकटठा न होने दें। घर के फर्श और बाथरूम आदि को फिनायल या मिट्टी केतेल से पोंछा लगायें।
हल्का और ताजा भोजन लें। अधिक गरिष्ठ भोजन से पेट खराब होने की संभावना रहती है। दूध, दही, लस्सी का प्रयोग भी सीमित मात्र में करें। बेसन और बेसन से बने भोज्य पदार्थ न खाएं। नींबू का सेवन या पुदीने की चटनी इस ऋतु में लाभप्रद होती है। थोड़ी सी अधिक सावधानी बरत कर आप स्वयं को और परिवार को वर्षा ऋतु से होने वाले नुकसानों से बचा सकते हैं।

