
गर्मी इस समय शिखर पर है। बाहर लू जोरों से चल रही है पर घर पर बैठा भी नहीं रहा जा सकता, बाहर भी निकलना है, काम भी करने हैं। फिर गर्मी से कैसे बचा जाए। गर्मी हो या सर्दी। हर मौसम में हमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है ताकि इस मौसम की चपेट में हम और हमारा परिवार न आ पायें।
क्या करें
’ गर्मी की वजह से होने वाले रोगों से बचने के लिए बेवजह गर्मी में बाहर न जाएं। जाना आवश्यक हो तो सुबह या शाम का प्रोग्राम बनाएं। धूप के समय जाना भी पड़े तो छाता, चश्मा, पानी साथ लेकर जाएं ताकि अल्ट्रावायलेट रेज आंखों और बालों को हानि न पहुंचा सकें।
’ घर से बाहर जाने से पहले घर से खूब पानी पीकर चलें ताकि बाहर का पानी न पीना पड़े।
’ घर पर आरओ, एक्वागार्ड या फिल्टर की सुविधा नहीं हो तो पानी उबाल कर ठंडा कर पिएं।
’ यदि बाहर आपको फलों का रस पीना भी पड़े तो साफ सुथरी दुकान पर ही पिएं। उसमें बर्फ न डलवायें।
’ सब्जी, सलाद व फल काटने से पूर्व हाथ साफ पानी से धो लें और सब्जी, सलाद और फल भी साफ पानी से धोकर काटें।
’ खाना बनाने और परोसने से पूर्व भी हाथ धो लें। बच्चों के हाथ भी खाना खाने से पूर्व धुलवाएं।
क्या न करें
’ गर्मी के मौसम में अपनी भूख व प्यास को हावी न होने दें। समय पर भोजन का सेवन करें। अधिक समय तक भूखे रहने से शरीर को नुकसान पहुंचता है।
’ धूप से वापिस घर आने पर एकदम ठंडा पानी या कोई पेय न पिएं। पहले पसीना सूख जाए, तभी ठंडा पिएं।
’ बासी खाना न खायें, न परिवार में किसी को दें।
’ अधिक मसाले वाले भोजन का सेवन न करें। न ही अधिक तले भोज्य पदार्थ खाएं।
गर्मियों में धूप लगने से व लू लगने से कई रोग हो जाते हैं। बदलते मौसम का खामियाजा बूढ़ों और बच्चों को अधिक भुगतना पड़ता है। थोड़ी सी लापरवाही से उनकी जान खतरे में पड़ सकती है। गर्मियों में दूषित पानी व पानी की कमी से कई रोग पैदा होते हैं जैसे हैजा, पीलिया, टाइफाइड आदि। बच्चे अपना बीमारी एक्सप्लेन नहीं कर पाते, बस उनके लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है। बच्चों को बाहर कटे खीरा, ककड़ी, तरबजू न खाने दें, बाजार का बर्फ का गोला, बाजारी बर्फ वाली शिकंजी, लस्सी न पीने दें। इससे पेट दर्द व उलटियां व दस्त हो सकते हैं। ऐसी अवस्था में प्रारंभ से ही बच्चों को जीवन रक्षक घोल देना प्रारंभ कर दें नहीं तो शरीर में पानी की कमी हो जाएगी और हालत गंभीर हो सकती है। पीलिया दूषित पानी पीने के कारण होता है। प्रारंभ में भूख कम लगती है, उल्टियां आती हैं, आंखें और नाखून पीले लगते हैं, बुखार और पेट दर्द होता है। यदि प्रारंभ से ही इलाज न करवाया जाए तो लिवर में सूजन आ सकती है। पीलिया के रोगियों को पूर्ण आराम करना चाहिए। भोजन सादा, कम तेल, कम मसाले और बिना हल्दी वाला करना चाहिए। टाइफायड भी दूषित खान पान की बीमारी है। इसमें बुखार, सिरदर्द और कभी-कभी उल्टियां होती हैं। इसका इलाज भी लक्षण दिखते ही प्रारंभ करवा देना चाहिए नहीं तो बाद में कई समस्याएं हो सकती हैं।
आंत्रशोथ होने पर क्या करें
’ खाने में दही और खिचड़ी का सेवन करें।
’ पानी पर्याप्त मात्र में पिएं।
’ एक गिलास पानी उबाल कर ठंडा कर उसमें 1 चम्मच चीनी और चुटकी भर नमक, 1 नींबू का रस मिला लें उस घोल को थोड़े-थोड़े अंतराल में बच्चों को देते रहना चाहिए।


