Tuesday, March 31, 2026
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प्रकृति प्रेम, जल संचय और स्वच्छता अपनाना जरूरी

जनवाणी संवाददाता |

रुड़की: गंगनहर के महर्षि कश्यप घाट पर आयोजित नुक्कड़ नाटक में बच्चो ने वृक्ष लगाओ जीवन बचाओ, स्वच्छता अभियान, जल ही जीवन जैसे अनेक महत्वपूर्ण संदेश समाज को दिए। बच्चों ने अपनी कला से बड़ों को यह बताने की हर संभव कोशिश की कि यदि आज जल संचय नहीं होगा तो भविष्य में मानव पानी की बूंद बूंद को तरसेगा।

इस अवसर पर समाजसेविका मनीषा बत्रा ने कहा है कि मनुष्य अगर प्रकृति की रक्षा में अपनी रुचि नहीं दिखाएगा तो भगवान नाराज हो जाएंगे। प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा, जिसका परिणाम कहीं अनावृष्टि के रूप में सामने आएगा तो कहीं अतिवृष्टि के रूप में। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण करो। वृक्ष की सेवा करो। वह ईश्वर की पूजा के समान है, क्योंकि उन्हीं वृक्षों में ईश्वर का वास है। वृक्ष की पूजा से वर्षा समय पर और उचित मात्रा में होगी।

समाजसेविका मनीषा बत्रा ने जल संचय पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा है कि संसार के प्रत्येक प्राणी का जीवन आधार जल ही है। शायद ही ऐसा कोई प्राणी हो जिसे जल की आवश्यकता न हो। जल हमें समुद्र, नदियों, तालाबों, झीलों, वर्षा एवं भूजल के माध्यम से प्राप्त होता है। गर्म हवाओं के चलने से समुद्र, नदियों, झीलों, तालाबों का जल वाष्पित होकर ठंडे स्थानों की ओर चलता है जहां पर न्यून तापमान के कारण संघनित होकर वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरता है।

जबकि पहाड़ों पर और भी कम तापमान होने के कारण जल बर्फ के रूप में जम जाता है जो कि गर्मी के दिनों में पिघलकर नदियों में चला जाता है। उन्होंने कहा है कि साफ-सफाई हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह हमारे जीवन की प्राथमिकता भी है। स्वच्छता जरूरी है क्योंकि साफ-सफाई से हम जीवन में आने वाली कई परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं। स्वच्छता का अर्थ है सफाई से रहने की आदत।

सफाई से रहने से जहां शरीर स्वस्थ रहता है, वहीं स्वच्छता तन और मन दोनों की खुशी के लिए आवश्यक है। स्वच्छता, सभी लोगों को अपनी दिनचर्या में अवश्य ही शामिल करना चाहिए। वही, इस अवसर पर बच्चों को पुरस्कृत किया गया। गंगा को स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प भी लिया गया।

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