- बड़ौत में 2011 में यांत्रिक कत्लखानों के खिलाफ करीब माह तक किया था जैन मुनि ने आंदोलन
जनवाणी संवाददाता |
बड़ौत: प्रदेश में यांत्रिक कत्लखानों के खिलाफ करीब एक माह तक आंदोलन चला था। जैन मुनि मैत्री प्रभ सागर जी महाराज ने एक माह तक अन्न त्याग किया था। उनके नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन के दौरान बड़ौत में हिंसा भी हुई थी। कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा था।
प्रदेश सरकार की ओर से यांत्रिक कत्लखानों को लगाने का कानून बनाया था। मूल रूप से गुजरात के रहने वाले जैन मुनि मैत्री प्रभसागर जी ने इसके विरोध में बड़ौत को आंदोलन का केन्द्र बनाते हुए नगर के दिगंबर जैन इंटर कालेज में आंदोलन शुरु किया था। बात 2011 के अगस्त माह की है। उन्होंने आमरण अनशन शुरु किया तो उनके समर्थन में हजारों लोग आए। आए दिन सभाएं होने लगी।
शासन की ओर से आंदोलन को कुचलने के लिए तरीके अपनाए जाने लगे। आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा था। तब तत्कालीन मंडलायुक्त के आदेश पर पुलिस व प्रशासन ने रात्रि में अनशन कर रहे जैन मुनि मैत्री प्रभ सागर समेत एक दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर उन्हें दूर जंगल में छोड़ दिया गया था।
सुबह दिन निकलते हुए समर्थकों में आक्रोश फैल गया था। पुलिस प्रशासन को विरोध झेलना पड़ा। बड़ौत में दंगा हो गया। पुलिस व भीड़ आमने-सामने हो गई। बाजार बंद हो गए। अश्रु गैस के गोले दागे गए तो भीड़ ने ईंट-पत्थरों से पुलिस को जबा दिया। बड़ौत बस अड्डा चौकी को तहस-नहस कर दिया गया था।
काफी लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई। कई लोगों को जेल जाना पड़ा था। इसके बाद जैन मुनि मैत्री प्रभ सागर का बड़ौत में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर कई बार बड़ौत में आए। यहां उनका खूब आदर-सत्कार किया गया। आखिर उनका मंगलवार को देवलोक गमन हो गया। उनके देहांत से जैन समाज में ही नहीं अपितु सभी समाज के लोगों में शोक बना हुआ है।
फोटो:जैन मुनि मैत्री प्रभसागर का फाइल फोटो।

