Saturday, February 28, 2026
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Cricket News: जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी में रचा इतिहास, पहली बार जीता खिताब

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी का ऐतिहासिक खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इस मुकाबले में जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक को हराया और पहली पारी में 291 रन की बढ़त के आधार पर जीत हासिल की। पांचवे दिन जम्मू-कश्मीर ने अपनी दूसरी पारी में चार विकेट पर 342 रन बनाकर कुल बढ़त 633 रनों तक पहुंचाई। कप्तान पारस डोगरा ने पारी घोषित करने का फैसला किया और इसके बाद दोनों टीमों के कप्तान दिन के खेल के अंत पर सहमत हुए, जिससे जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित हुई।

इकबाल-साहिल की शानदार साझेदारी

इस मैच में जम्मू-कश्मीर के आकिब नबी डार ने पहली पारी में पांच विकेट लिए, वहीं दूसरी पारी में सलामी बल्लेबाज कामरान इकबाल और साहिल लोटरा ने जबरदस्त साझेदारी की। दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए 197 रनों की अविजित साझेदारी की। इकबाल ने 311 गेंदों पर 16 चौकों और तीन छक्कों के साथ 160 रन बनाए, जबकि साहिल ने 226 गेंदों पर आठ चौकों और तीन छक्कों की मदद से नाबाद 101 रन बनाए।

कर्नाटक के गेंदबाजों को मिले निराशा

जम्मू-कश्मीर ने पांचवें दिन अपनी दूसरी पारी 186 रन से आगे बढ़ाई। कर्नाटक के गेंदबाजों को इस दिन कोई सफलता नहीं मिली। इकबाल और साहिल ने पूरी तरह से कर्नाटक के गेंदबाजों को परेशान किया। पहले सत्र में इकबाल ने शतक पूरा किया और फिर साहिल भी पीछे नहीं रहे। दोनों बल्लेबाजों ने लंच ब्रेक तक कर्नाटक को कोई सफलता नहीं लेने दी और दिन के अंत तक कर्नाटक के गेंदबाज इस साझेदारी को तोड़ने में नाकाम रहे, जिसके बाद मैच ड्रॉ रहा।

फॉलोऑन न देने का जम्मू-कश्मीर का निर्णय

कर्नाटक की टीम 293 रन पर सिमट गई थी, जबकि जम्मू-कश्मीर ने अपनी पहली पारी में 584 रन बनाकर 291 रन की बढ़त हासिल की थी। हालांकि, जम्मू-कश्मीर ने फॉलोऑन देने का निर्णय नहीं लिया। अगर मैच का नतीजा नहीं निकलता तो जम्मू-कश्मीर को पहली पारी की बढ़त के आधार पर यह मुकाबला अपने नाम करना था। इस तरह, टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने में सफलता प्राप्त की।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी

रणजी ट्रॉफी के फाइनल को देखने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी स्टेडियम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने मैच की तस्वीरें अपने एक्स अकाउंट पर साझा कीं।

जम्मू-कश्मीर की यात्रा का कठिन सफर

जम्मू-कश्मीर ने पहली बार 1959-60 में रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था, लेकिन शुरुआत से ही वह एक मजबूत दावेदार नहीं माना जाता था। इसने अब तक 334 रणजी मैच खेले थे, जिनमें से केवल 45 मैचों में जीत हासिल की थी। 44 साल बाद 1982-83 में उसे अपनी पहली जीत मिली थी। नॉकआउट तक पहुंचना भी कभी आसान नहीं था, लेकिन 2013-14 में उसने नेट रन रेट के आधार पर गोवा को पीछे छोड़ते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। 2015-16 में परवेज रसूल की कप्तानी में जम्मू-कश्मीर ने मुंबई को हराकर अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल की थी। इस सत्र में कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर ने अपनी मेहनत का फल पाया और रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने के बेहद करीब पहुंच गया।

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