Tuesday, June 25, 2024
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किस्सागोई में जबलपुर

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शहरों पर लिखना, साहित्य में अब एक अलग विधा के तौर पर विकसित हो रहा है। हालांकि, तकरीबन सभी दौर में अलग-अलग शहरों पर लिखा गया है। जिन्हें पाठकों ने खू़ब पसंद भी किया है। अच्छी बात है कि यह सिलसिला आगे बढ़ रहा है। दिनेश चौधरी, जो बुनियादी तौर पर एक रंगकर्मी हैं, उन्होंने चंद सालों में अपने आप को बड़े ही करीने से एक बेहतरीन किस्सागो के तौर पर ढाला है। सोशल मीडिया पर विभिन्न व्यक्तित्वों के बारे में उन्होंने जो लिखा है, वह खूब पसंद किया गया है। व्यक्तित्वों को केन्द्र में रखकर, दिनेश चौधरी ने मध्य प्रदेश के महाकौशल में स्थित जबलपुर की जो कहानी कही, वह काफी दूर तक गई। इक्कीस चैप्टर में उन्होंने जो रचा, वह अब किताब ‘शहरनामा जबलपुर’ के तौर पर आ गया है। किताब बेहद दिलचस्प बन पड़ी है। अमूमन शहरनामा जिस तरह से लिखा जाता है, यह किताब उस तरह की बिल्कुल नहीं। छोटे-छोटे अध्यायों में किसी एक किरदार के मार्फ़त शहर की कहानी साथ-साथ चलती है। बीसवीं और इक्कीसवीं सदी की जिन अहमतरीन शख़्सियत से जबलपुर की शिनाख़्त है, वह सब ‘शहरनामा जबलपुर’ में शामिल हैं। लेखक ने बड़े ही जतन से इन शख़्सियत से जुड़े किस्सों को किताब में एक जगह इकट्ठा किया है। जबलपुर की बात हो, और व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। कई अध्यायों में वे अलग-अलग अंदाज में आते हैं। किताब में विश्व प्रसिद्ध जादूगर आनंद, एनाउंसर मनोहर महाजन, मिमक्री आटिस्ट केके नायकर, रंगकर्मी अरुण पांडेय, चित्रकार अबधेश बाजपेयी के संघर्ष और उनकी सफलता का भी लेखा-जोखा है। लेकिन एक अलग अंदाज में। लेखक ने अपने-अपने क्षेत्र की इन बड़ी हस्तियों की कहानी परपंरागत ढंग से नहीं लिखी है। न ही वे अपनी ओर से किसी के ऊपर महानता का मुलम्मा चढ़ाते हैं। उनकी नजर में यह सब भी एक साधारण इंसान हैं, जो अपनी जिद और काम के जानिब जुनून से शिखर पर पहुंचे।

पुस्तक : शहरनामा जबलपुर, लेखक : दिनेश चौधरी, प्रकाशक : नवारुण, गाजियाबाद, मूल्य : 275 रुपये

जाहिद खान


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