- पहला ऐसा बैंक जहां पैसों के साथ शिक्षा की जली अलख
- अब लोग जरूरत के हिसाब से कर सकते हैं मदद
- वकील, शिक्षक अपने समय के अनुसार दे रहे हैं सहयोग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: क्या आप जानते हैं कि मेरठ में एक ऐसे अनोखे बैंक की स्थापना की गई है, जहां लोग सिर्फ गरीब की पैसों से ही मदद नहीं कर सकते हैं, बल्कि वह उसको पढ़ा-लिखाकर समाज में बराबरी का हक दिलाने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। इस बैंक में वकीलों के साथ-साथ शिक्षक भी अपने कीमती वक्त में से कुछ वक्त देकर सवाब का काम कर सकते हैं। यही नहीं लोग चाहें तो पैसों और दीगर सामान से भी गरीब को ऐसे मदद पहुंचा सकते हैं कि गरीब तक मदद पहुंच भी जायेगी और उसका ढिंढोरा भी नहीं पिट सकेगा। यानि गरीब के दरवाजे तक सीधे मदद। अभी तो इस राहत बैंक की एक ही शाखा खोली गई है, लेकिन जरूरत और शहर के असीमित दायरे को देखते हुए इसकी और कई ब्रांच खोलने की दिशा में भी कार्य चल रहा है।
बैंक का नाम सामने आने पर हर किसी के दिल में ख्याल आता है कि जहां पैसों का लेन-देन होता है। होता भी यही है कि लोग अलग-अलग बैंको की अलग-अलग शाखा में अपनी जरूरत के हिसाब से खाता खोलकर इसमें रकम जमा करते हैं। फिर जैसी उनकी जरूरत होती है, वह उस खाते में से पैसे निकालकर उसका इस्तेमाल करते हैं। लोगों की सुविधा के लिए हर बैंक ने अलग-अलग खाते खोल रखे हैं। मुख्यत: बचत खाता और दूसरा करंट एकाउंट यानि चालू खाता होता है। बचत खाते में तो एक सीमित समय में आपको जमा धनराशि पर ब्याज मिलता है। जबकि करंट एकाउंट में दिन में कितने भी लेन-देन किये जा सकते हैं। इस तरह के खाते पर बैंक कोई ब्याज नहीं देता है।
लेकिन मेरठ में एक राहत बैंक खुला है। जो काम तो बिल्कुल बैंक की तर्ज पर है। लेकिन अलग स्टाईल में। यानि लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से मदद करना। इस बैंक का नाम है खिदमत बैंक। इस बैंक में पुराने कपड़े, किताबें, जूते आदि जमा किये जाते हैं। यानि आपके पास अपने ऐसे कपड़े हैं, जो अभी नये जैसे हैं, या आपके कपड़े छोटे हो गये हैं। इसी तरह से आपके जूते छोटे हो गये हैं तो आप उन कपड़ों या जूतों को फेंके या कबाड़ी को बेचे नहीं, बल्कि आप यह कपड़े इस खिदमत बैंक तक पहुंचा दें।
गरीब और जरूरतमंद की मदद का जज्बा
खिदमत बैंक को चलाने का जिम्मा सोशल एंड जस्टिस फाउंडेशन के तत्वावधान में किया जा रहा है। इस संस्था के सरबराह रियासत अली खां एडवोकेट बताते हैं कि हमारा एक मात्र उद्देश्य यह है कि जो लोग समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहते हैं और खिदमत करना चाहते हैं तो वह यहां पहुंच सकता है। अगर कोई व्यक्ति शिक्षक है और वह समाज के गरीब लोगों को लिए काम करना चाहता है तो वह अपना समय प्रतिदिन एक घंटा या जितना भी उसके पास समय हो या हफ्ते में एक दिन या महीने में एक दिन देने के लिए नाम लिखा सकता है। उस व्यक्ति द्वारा दिए गए समय को बैंक ऐसे बच्चों के लिए इस्तेमाल करेगा जो गरीब हैं और उन्हें उसे शिक्षा की जरूरत है।
इसी प्रकार कोई व्यक्ति अगर गरीब लोगों की कानूनी मदद करना चाहता है जैसे वकील या कोई पुलिसकर्मी या अन्य अधिकारी तो वह अपना नाम खिदमत बैंक में लिखा दे और वह किस प्रकार से मदद करना चाहता है उसका तरीका भी बताएं ताकि ऐसे गरीब लोगों को उनके जरिए से कानूनी मदद पहुंचा सके। इसके अलावा भी और भी कोई व्यक्ति जैसे डॉक्टर या अन्य कोई व्यक्ति अपनी खिदमत समाज के लिए देना चाहते है तो वह अपना नाम खिदमत बैंक में आकर लिखा दे ताकि उनकी सलाहियत को समाज की जरूरतमंद लोगों के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
कपड़ों के साथ जूते और स्टेशनरी मौजूद
इस खिदमत बैंक में कपड़े और जूतों के साथ-साथ किताबें, कोर्स, कापियां व स्टेशनरी का सामान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इंदिरा चौक हापुड रोड मेरठ पर खिदमत बैंक के नाम से एक संस्था चलाई जा रही है जिसमें पुराने कपड़े ,किताबें, जूते आदि लोग सदके और मदद की नीयत से जमा कर सकते हैं और वहां से जरूरतमंद लोग फ्री में सामान को ले जा रहे हैं और अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। इस खिदमत बैंक में इन कपड़ोें को धुलवाकर उनके साइज के हिसाब से अलग-अलग पैकिंग में रखा जाता है।
फिर जो कोई गरीब आदमी चाहे तो वह इस खिदमत बैंक में पहुंचकर अपने या अपने किसी परिजन के साइज को बताकर कपड़े ले सकता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस बैंक में किसी की मदद करते हुए यह नहीं पूछा जा रहा है कि वह शहर का है, या गांव का। हिन्दू है या मुसलमान। बस यहां उस गरीब की जरूरत देखी जा रही है और उसकी इस तरह से मदद की जा रही है कि इस गरीब को अपने कमतर होने का अहसास भी नहीं हो।

