- टेंडर नौ वाटर कूलर को छोड़कर 12 लाख 58 हजार रुपये वाटर कूलर पर किए गए खर्च
- पंचायत निधि से सीसीटीवी कैमरे पर खर्च कर दिए गए लाखों रुपये, जो आमन्य है, डीडीओ ने बैठायी जांच
- प्रधान व पंचायत सचिव के कार्याें पर बैठायी जांच, सचिव की अन्य ग्राम पंचायतों में कार्यों के जांच के आदेश
जनवाणी संवाददाता |
बागपत: ग्राम पंचायतों में भी धनराशि को ठिकाने लगाने का कार्य किया जा रहा है, क्योंकि अभी एक मामला किशनपुर बराल गांव का सामने आया है। वहां पर 33 लाख 34 हजार रुपये की धनराशि का गबन करने की आशंका जतायी गयी है, क्योंकि वहां जो कार्य किए गए है वह अनुमान्य नहीं है।
यह खुलासा डीडीओ की जांच करने पर हुआ है। किशनपुर बराल गांव के कार्यों की जांच की गयी तो वह भी पंचायत द्वारा की गयी धनराशि को देखकर हैरान हो गए। बताया कि पंचायत में नौ वाटर कूलर लगाने के लिए टेंडर छोड़ा गया, लेकिन यह वाटर कूलर भी अलग-अलग कंपनी से लिए गए और एक कूलर की कीमत एक लाख 39 हजार है, लेकिन 12 लाख 58 हजार रुपये कूलर के नाम पर निकाले गए है।
इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे लगाने पर भी पैसे खर्च कर दिए गए है, जो नियम विरूद्ध है। उन्होंने प्रधान व पंचायत सचिव के कार्यों की जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए। वहीं पंचायत सचिव के अन्य पंचायतों के भी कार्यों की जांच कराने के आदेश डीपीआरओ को दिए गए है।
जिला विकास अधिकारी हुबलाल ने किशनपुर बराल गांव के विकास कार्यों की जांच करने के लिए पहुंचे और वहां पर कार्यों के अभिलेख देखे गए तो वह हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि गांव में कार्यों की जांच की गयी तो प्रधान व पंचायत सचिव को जिन आवश्यक कार्यों पर पंचायत निधि को खर्च करनी चाहिए थी उसपर तो की नहीं और जिनपर धनराशि को खर्च करनी नहीं थी उन कार्यों पर कर दी गयी, जो पूरी तरह से गबन की श्रेणी में आती है।
बताया कि किशनपुर बराल गांव में 33 लाख 34 हजार 900 रुपये 14वां/15वां व राज्य वित्त आयोग से निकाला गया है, जो पूरी तरह से गलत है। प्रधान व पंचायत सचिव द्वारा निकाली गयी धनराशि गबन की श्रेणी में आती है और यह पूरी तरह से नियम विरूद्ध है। बताया कि गांव में बिजली के कार्य कराए थे, जिनका 28887, 29717 व 58604 रुपये बकाया था, लेकिन इसका भुगतान करना तक जरूरी नहीं समझा और जो कार्य करने नहीं थे उनपर 33 लाख 34 हजार 900 रुपये खर्च कर दिए गए है।
यह धनराशि नौ वाटर कूलर पर 12 लाख 58 हजार 470 रुपये से दो कंपनी से खरीदे गए है और इसकी कीमत एक लाख 69 हजार 830 रुपये दिखायी गयी। वहीं गांव में 28 सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए और इनपर तीन लाख 38 हजार रुपये खर्च किए गए। वहीं दो इंटर लॉक सडक पर दो लाख 49 हजार व चार हैंडपंप रिबोर पर तीन लाख चार हजार रुपये खर्च किए गए है।
उन्होंने डीपीआरओ को पत्र भेजकर मामले की गहनता से जांच कराकर कार्रवाई करने के आदेश दिए, ताकि धनराशि का दुरूपयोग व गबन होने से रोका जा सकें। वहीं पंचायत सचिव लोकेन्द्र राठी की अन्य ग्राम पंचायतों में भी जांच कराने के आदेश दिए है, ताकि पता चल सकें वहां तो इस तरह की धनराशि का दुरूपयोग कर गबन करने का प्रयास तो नहीं किया गया है। साथ ही जांच के बाद प्रधान व पंचायत सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी अमल में लायी जाए।
ब्लॉक में अनुपस्थित मिले कर्मचारियों का रोका वेतन
डीडीओ हुबलाल ने खेकड़ा, पिलाना, बिनौली व बड़ौत ब्लॉक का औचक निरीक्षण किया तो वहां उन्हें कई कर्मचारी अनुपस्थित मिले, जिसमें खेकड़ा ब्लॉक में सहायक विकास अधिकारी उपेन्द्र सिंह, पिलाना में लेखाकार सुनील कुमार वर्मा, बड़ौत में वरिष्ठ सहायक अरविंद शर्मा, लेखाकार शिवकुमार व बिनौली ब्लॉक में सहायक विकास अधिकारी पंचायत रणधीर सिंह शामिल है और इन सभी को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही उनका अग्रिम आदेशों तक वेतन रोकने के आदेश दिए है।

