Tuesday, June 18, 2024
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जंगल में पानी और भोजन की कमी

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  • इसलिए आबादी की ओर रुख कर रहे तेंदुए, जानवरों के अस्तित्व पर मंडराया खतरा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बेतहाशा शहरीकरण और खत्म होते जंगल ने जंगली जानवरों के लिए जीवन पर संकट खड़ा कर दिया है। जंगली जानवर लगातार बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेष रूप से तेंदुए की स्थिति बेहद सोचनीय है। हाल ही में देशभर में कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। जिनके कारण जानवरों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जंगलों में लगातार आग की घटनाएं हुई, दूसरी ओर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई। इससे उत्तर प्रदेश में तेंदुए के आबादी वाले इलाके में घुसने की कई घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद इन्हें पकड़कर सुरक्षित वापस जंगल में छोड़ दिया।

हस्तिनापुर सेंक्चुरी से सटे जिलों में आजकल तेंदुए की दहाड़ बहुत सुनाई दे रही है। हाल ही में मेरठ के पल्लवपुरम में सुबह के समय घर में तेंदुआ घुसने की सूचना पर हड़कंप मच गया था। जिसको 10 घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग टीम द्वारा पकड़ा गया। उसके दो दिन बाद खतौली के आसपास फिर से तेंदुआ दिखाई दिया है। वहीं, कुछ समय पहले इंचौली और मवाना क्षेत्र में तेंदुआ देखे जाने की खबर भी सामने आई थी। तेंदुए खुद ही इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। कभी-कभार खाने की तलाश में वो अंजाने ही इंसानी आबादी में घुस जाते हैं। लगातार शिकार के चलते बीते दशकों में तेंदुए और बाघ की संख्या देश में बेहद कम हो गई थी। हस्तिनापुर सेंक्चुरी और बिजनौर के जंगलों में कई बार इनके शिकार की सूचना मिली।

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ऐसे में लग रहा कि मानो अपनी रिहाइश को लेकर इंसान और जंगली जानवरों के बीच जंग-सी छिड़ी हुई है। असंतुलित एवं अनियंत्रित विकास से जंगल नष्ट हो रहे हैं और वहां रहने वाले जंगली जानवर कंक्रीट के आधुनिक जंगलों में भूखे-प्यासे और बौखलाए हुए भटक रहे हैं। मेरठ ही नही पूरे देश में ऐसी घटनाएं रुकने की बजाय बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में सवाल पूछा जाना चाहिए कि जानवर इसानों की बस्ती में घुस रहे हैं या इंसान जानवरों के क्षेत्र को कब्जा रहे हैं?
वास्तव में मानवीय हस्तक्षेप और दोहन के कारण न सिर्फ वन क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं, बल्कि वन्य जीवों के शांत जीवन में मानवीय खलल में भी सीमा से अधिक वृद्धि हुई है। घास के मैदान कम होने से वे जीव भी कम हुए हैं, जो मांसाहारी जंगली जानवरों का भोजन होते हैं।

भोजन की अनुपलब्धता उन्हें इंसानी बस्तियों में खींच लाती है, जिसके बाद मानव और वन्यजीव संघर्ष की लखनऊ जैसी वीभत्स तस्वीरें सामने आती हैं। दुनियाभर में जंगली जानवरों के हमलों में हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते हैं तो बड़ी संख्या में लोग घायल भी होते हैं। मानव और वन्य जीवों का यह संघर्ष अब राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।

शहर में तीन बार आया तेंदुआ

  • मेरठ में अप्रैल 2018 में कैंटोनमेंट अस्पताल आया तेंदुआ
  • फरवरी 2014 में आबूलेन पर कई दिन तेंदुआ घूमता रहा।
  • 4 मार्च 2022 को पल्लवपुरम में आया।

तेंदुए के बारे में जानकारी

  • भारत में करीब 12 हजार हैं तेंदुए
  • संसार में 37 वन्य बिल्ली प्रजातियों में आता है तेंदुआ
  • बहुत ही चालाक, फुर्तीला और रात्रिचर है
  • हिरण, नील गाय, कुत्ते, जंगली सूकर और बकरी बेहद पसंद

एटा में घुसे बाघ का रेस्क्यू कराने पहुंची मेरठ की टीम

पल्लवपुरम इलाके में तेंदुआ रेस्क्यू कराने वाली मेरठ वन विभाग की टीम डा. आरके सिंह के नेतृत्व में एटा में घुस आए रायल बंगाल टाइगर प्रजाति के बाघ का रेस्क्यू कराने पहुंच गई है।

जानकारी देते हुए डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि एटा के कोतवाली क्षेत्र में गांव नंगला समल में बाघ के घुसने की सूचना के बाद मेरठ से वन विभाग टीम को रवाना किया गया। इसमें पशु चिकित्सक एवं वन्य जीव प्राणी एक्सपर्ट डा. आरके सिंह टीम में शामिल रहे। आगरा, अलीगढ़ की वन विभागों की टीमों के साथ मेरठ वन विभाग की टीम वहां रेस्क्यू करेगी।

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