Monday, April 13, 2026
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किरण के पदक से दिखी प्रेरणा की रोशनी

  • खुशी के पल: किरण 72 साल बाद महिला शाटपुट में भारत को कोई पदक मिला

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हांगझोऊ चीन में एशियन गेम्स के दौरान कैलाश प्रकाश स्टेडियम की खिलाड़ी किरण बालियान के शाटपुट में कांस्य पदक जीतने की खबर से स्टेडियम में जश्न का माहौल है। खुशी का एक खास अवसर यह है कि किरण 72 साल बाद महिला शाट पुट में भारत को कोई पदक मिला है। शनिवार को कैलाश प्रकाश स्टेडियम में प्रेक्टिस करने के लिए पहुंचने वाले खिलाड़ियों के बीच किरण बालियान की पदक वाली उपलब्धि को लेकर ही चर्चा देखने को मिली। जिसको लेकर खेल के हर क्षेत्र से जुड़े महिला-पुरुष खिलाड़ी गदगद नजर आए।

उनका कहना था कि मेरठ स्टेडियम के हिस्से में आने वाली हर उपलब्धि उन्हें अपना प्रदर्शन बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। किरण के साथ ट्रेनिंग कर रही विधि सब जूनियर में एशियाई गेम में प्रतिभाग कर चुकी हैं हालांकि इसमें उनका चौथा स्थान रहा है। लेकिन किरण को मिलने वाली हर उपलब्धि विधि के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। विधि बताती है कि जैसे ही यह खबर उन तक पहुंची, एक खुशी का माहौल बन गया।

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यह उम्मीद पहले से की जा रही थी कि विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली किरण कोई न कोई मेडल जरूर लेकर आएंगी। हालांकि थोड़ा परफॉर्मेंस को लेकर जरूर कहा जा सकता है। अभ्यास में 18 मीटर से अधिक तक थ्रो करने वाली किरण और बेहतर कर प्रदर्शन करके गोल्ड या सिलवर मेडल ले सकती थी। विधि का कहना है कि सुबह शाम तीन-चार घंटे तक प्रेक्टिस करने वाली किरण का व्यवहार उनके

और दूसरे खिलाड़ियों के साथ बहुत ही मिलनसार प्रवृत्ति का रहा है। खानपान के बारे में पूछने पर विधि ने कहा कि खिलाड़ी को अपनी डाइट तो बहुत अच्छी रखनी ही होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करने के लिए 50 प्रतिशत भूमिका डायट और 50 प्रतिशत अभ्यास की होती है।

पहली बार देश के बाहर प्रदर्शन से जीता मेडल

प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़धिकारी वाईपी सिंह ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि किरण बालियान पहली बार देश के बाहर अपना प्रदर्शन करने के लिए पहुंची। और इसी में उसने शॉट पुट में कांस्य पदक जीत कर 72 साल बाद इस स्पर्धा में भारत को पदक दिलाया है। यह स्टेडियम, घर परिवार, प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव की बात है। एक और उल्लेखनीय बात यह है कि किरण बालियान स्टेडियम में अपने अभ्यास के दौरान 18 मीटर से अधिक दूरी तक गोला फेंकने की क्षमता रखती है,

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लेकिन इस स्पर्धा के दौरान किरण बालियान ने 17.36 मीटर के थ्रू के साथ कांस्य पदक जीता है। अगर वह अपना प्रदर्शन और बेहतर कर पाती तो भारत के लिए सिल्वर मेडल ला सकती थी। इसके बावजूद स्टेडियम में बच्चों में भारी उत्साह है। यह एक शुभ घड़ी है जिसमें मेरठ स्टेडियम में अभ्यास करने वाली एक बेटी ने एशियन गेम में पदक जीतकर भारत का झंडा लहराया है।

…तो पक्का था भारत का गोल्ड

एथलीट कोच गौरव का कहना है कि किरण बालियान बचपन से ही मेरठ स्टेडियम से जुड़ी रही हैं। उनकी विशेषता यह रही है कि जब से शॉट पुट हाथ में उठाया है उन्हें एक दिन भी अपने अभ्यास से गैर हाजिर नहीं देखा है। वह नियमित रूप से सुबह-शाम दोनों समय स्टेडियम पहुंचकर गोला फेंक से संबंधित हर जरूरी अभ्यास करती रही हैं। जितनी अच्छी तकनीक के साथ किरण बालियान थ्रू करती है,

उन्हें ऐसा लगा कि वह थोड़ा जल्दी थ्रू कर गई। कोच के अनुसार अगर वह अपने तकनीक का 80 प्रतिशत भी कर पाती, तो भारत का गोल्ड पक्का था, लेकिन इतने बड़े कंपटीशन में इतनी भीड़ भरे स्टेडियम के बीच पहली बार प्रतिभा करके 72 साल बाद इस स्पर्धा में भारत में कांस्य पदक लाना कम उपलब्धि नहीं है। इस उपलब्धि को लेकर स्टेडियम में खुशी का माहौल है।

अन्नु, पारुल और प्रियंका से काफी उम्मीदें

प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी वाईपी सिंह का कहना है कि मेरठ स्टेडियम से जुड़ी प्रियंका गोस्वामी, पारुल और अन्नु रानी एशियाई खेलों की इस प्रतिस्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। तीन से पांच अक्टूबर के बीच सीमा पूनिया डिस्कस थ्रो, पारूल चौधरी 3000 और 5000 मीटर दौड़, प्रियंका गोस्वामी 30 किलोमीटर पैदल चाल और अनु रानी भाला फेंक में अपना प्रदर्शन करने वाली हैं। यही उम्मीद है की मेरठ की यह बेटियां कोई न कोई पदक लेकर मेरठ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और देश का नाम दुनिया भर में रोशन करेंगी।

माता-पिता की रही है महत्वपूर्ण भूमिका

कोच गौरव का कहना है कि किरण बालियान की इस उपलब्धि में उसके माता-पिता की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिसमें किरण की खुराक से लेकर मानसिक रूप से प्रोत्साहित करना माता-पिता का बहुत बड़ा सहयोग किरण को मिला है। किरण के माता-पिता की बदौलत ही देश को इतना बड़ा खिलाड़ी मिल सका है।

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