- बारिश के आगे बिजली पानी-पानी, महानगर के कई इलाकों में तार टूटने से घंटों का शटडाउन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ऊर्जा विभाग का खेल भी निराला है, क्रांतिधरा पर बत्ती गुल है, फिर भी मीटर चालू है। मौसम का मिजाज क्या बादला बिजली की सांसें फूलने लगीं। दो दिन हल्की बारिश और तेज हवाओं को ऐसा झटका लगा कि बारिश के आगे बिजली पानी-पानी हो गयी। वहीं, दूसरी ओर बारिश और तेज हवाओं के साथ बिजली की आंख मिचौनी की वजह को कमजोर तार और तारों का जंजाल माना जा रहा है।
दावा किया गया था कि मेरठ समेत पीवीवीएनएल के सभी 14 जनपदों में अंडरग्राउंड बिजली सिस्टम तैयार किया जाएगा, लेकिन हालत ये है कि जो सिस्टम अभी वर्तमान में चालू है, वहीं नहीं संभल पा रहा है। बारिश के चंद बूंदे क्या पड़ी बिजली पानी पानी हो गयी। महानगर के कई इलाकों में सुबह से गयी बिजली शाम पांच बजे आयी। गांव देहात में तो और भी ज्यादा बुरा हाल रहा।
कई घंटे गुल रही बिजली
लगातार दूसरे दिन भी तेज हवा और बारिश के चलते हालांकि रविवार को इतनी बारिश भी नहीं हुई की बिजली की सांसें फूलने लग जाएं, लेकिन जितनी भी बारिश हई उसने बिजली को तगड़ा झटका दे दिया। शहर के एक बड़े इलाके की बिजली घंटों गुल रही। इसमें रुड़की रोड व मोदीपुरम का इलाका भी शामिल है।
बाइपास के कई इलाकें व कालोनियां बिजली का इंतजार करते रहे। शाम को करीब पांच बजे बिजली के दर्शन हुए। इससे एक दिन पहले भी बिजली ऐसे ही नखरे दिखाती रही जिसके चलते माधवपुरम, रेलवे रोड, मेडिकल में लाइट गुल रही। बताया गया कि 33 केवी लाइन फाल्ट हुआ था। तीन स्थानों पर बिजली के खंभे गिर गए।
अंधाधुंध कटौती से बेहाल
इससे पहले पीवीवीएनएल सूत्रों ने बताया कि रंगोली फीडर से दिन में चार से पांच घंटे कटौती रही। बिजली बंबा बाइपास स्थित गृहम, सुपरटेक ग्रीन विलेज, शिवपुरम, मोहकमपुर में पांच-छह घंटे तक लोग बिना बिजली के परेशान रहे। फूलबाग कालोनी में घंटों लो वोल्टेज की समस्या बनी रही। हवा के चलते हाइवोल्टेज की लाइनों में ट्रिपिंग की समस्या आई।

अधीक्षण अभियंता राजेंद्र बहादुर ने बताया कि तीन दिन से लगातार तेज हवाएं चल रही है। उसकी वजह से कुछ इलाकों में तकनीकि परेशानी आयी है। कंकरखेड़ा, घंटाघर और विश्वविद्यालय रोड बिजली उपकेंद्र के क्षेत्रों में हाइवोल्टेज लाइन के खंभे गिर गए। इससे आपूर्ति बाधित हुई और उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कमजोर तारों का मकड़जाल
शहर के पुराने मोहल्लों में गलियों में बिजली के तारों के कारण बने हैं। खंभों पर बेतरतीब तरीके से झूलते बिजली के तारों से कई बार दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। शहर की मलिन बस्तियों, सराफा बाजार आदि इलाकों में तो हालत और भी खराब है। जनवाणी ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि हालत बद से बदतर बने हुए हैं। शहर की पुरानी आबादी वाले इलाकों में तो हालत यह हो गयी है कि यदि बिजली गुल हो जाए तो बिजली वाले भी वहां खंभों पर चढ़ने से डरने लगे हैं।
दावे साबित हुए खोखले
बिजली व्यवस्था सुधारने के अनेक बार दावे किए गए, लेकिन वो खोखले ही साबित हो रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि काम नहीं हुआ, लेकिन जैसे दावे किए गए वैसा काम नजर नहीं आता। बिजली के तारों के जंजाल, जर्जर और झुके हुए खंभे, कालोनियों के बीच से जाती हाइटेंशन लाइन समेत तमाम समस्याएं अभी बनी हुई हैं।
इन क्षेत्रों का बुरा हाल
पुराने शहर के कोतवाली के इस्माइल नगर, बनिया पाड़ा, शाहघासा, मीरपाती की छावनी, मुफ्तीबाड़ा, अंदरकोर्ट, नक्कार चियान, गुजरी बाजार, कैंची वालान, डालमपाड़ा, शीश महल, देहलीगेट का खैरनगर, कबाड़ी बाजार, कोटला, अनाज मंडी, कागजी बाजार, शीश महल, डालमपाड़ा, लिसाड़ीगेट पिलोखड़ी रोड, श्याम नगर, विकासपुरी, इस्लामाबाद, देहलीगेट का सराय लाल दास, शहर सराफा,
कोटला, कबाड़ी बाजार, सदर बाजार क्षेत्र के तिलक पार्क, सांई मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, एल ब्लॉक शास्त्रीनगर, आरके पुरम कंकरखेड़ा, गोविंदपुरी, मॉडल टाउन, नटेशपुरम, लाला महूमदपुर कंकरखेड़ा, जाकिर कालोनी, विकासपुरी आदि क्षेत्रों में 47 जगहों पर जर्जर तारें इंतजामों व दावों की पोल खोल रही हैं। हालांकि अब कहा जा रहा है कि इन्हें बदला जाएगा।

