
स्वाधीनता के पूर्व हम भारतीय अंग्रेजों के गुलाम थे, इसलिए आत्याचार, शोषण का शिकार हुए, किंतु आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो स्वतंत्र भारत में रहते हुए भी हम अपने ही चुने हुए सरकार के भ्रष्टाचार के शिकार हैं। स्वतंत्रता के पूर्व लोगों के मन में यही आस थी कि अंग्रेजों को भगाकर हम अपनी सरकार बनाएंगे, जिसमें जिस सरकार में हमारे अपने भाई और हम राज करेंगे, जिसमें हर प्रकार कि स्वतंत्रता सभी को प्राप्त होगी, कोई किसी का हक नहीं मारेगा। हमारी अपनी सामूहिक शक्ति शासन को चलाएंगी स्वतंत्र भारत का निर्माण होगा, किंतु आज आजादी के इतने वर्षों बाद हम सब देख रहे हैं कि यह लोकतंत्र किस हद तक जनता का बना रह सका है।