Wednesday, March 25, 2026
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भारतीयों को लूट रहे हैं लोन देने वाले ऐप्स, आखिर कब होगी कार्रवाई?

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। भारत में भारत में इन दिनों महज कुछ मिनट में लोन देने वाले ऐप का बिजनेस खूब फल-फूल रहा है। इन्हीं ऐप्स को इंस्टेंट लोन ऐप भी कहते हैं। ये लोन देने वाले ऐप बिना किसी केवाईसी डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन और बिना किसी लोन एग्रीमेंट के ही हर किसी को लोन दे रहे हैं। ये कर्ज देने वाले किसी बैंकों या कंपनी की तरह शख्स के CIBIL स्कोर भी नहीं चेक करती हैं।

बता दें कि CIBIL स्कोर तीन अंकों का नंबर है, जिसका उपयोग बैंक आपकी क्रेडिट यानि योग्यता का आंकलन करने के लिए करती हैं। यही वजह है कि इस तरह के ऐप्स भारत में खूब पॉपुलर हो रहे हैं। साल 2022 में गूगल ने भारत के 3500 इंस्टेंट लोन ऐप को प्ले स्टोर से हटाने का फैसला लिया।

नियमों को तोड़ने की वजह से गूगल ने इन्हें बैड ऐप्स बताया था। इसके बावजूद प्ले स्टोर पर अब भी सैकड़ों इंस्टेंट लोन ऐप्स एक्टिव हैं, जो आए दिन लोगों को कर्ज के जाल में फंसा रहे हैं। भारत में सैकड़ों ऐसे ऐप काम कर रहे हैं, जो लोगों को तुरंत लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों की उगाही के खेल में शामिल हैं। इन सभी ऐप्स के काम करने का तरीका लगभग एक जैसा है। आइए समझते हैं पूरी कहानी…

  • कोई व्यक्ति तुरंत लोन पाने के लालच में इन लोन देने वाले ऐप्स को इंस्टाल करता है।

  • डाउनलोडिंग के समय ये ऐप्स यूजर से उसकी गैलरी, कॉन्टैक्ट्स, लोकेशन आदि के एक्सेस की परमिशन मांगते हैं, जो अक्सर यूजर दे देते हैं।

  • कई बार ये ऐप्स यूजर के फोन में बिना उसकी जानकारी के ही थर्ड पार्टी ऐप्स या मालवेयर इंस्टाल कर देते हैं और इसके जरिए यूजर की निजी जानकारियां चुरा लेते हैं। इन जानकारियों का इस्तेमाल उसे ब्लैकमेल करने में होता है।

  • ये तुरंत लोन के नाम पर पूरा पैसा भी नहीं देते बल्कि 60-70% ही यूजर के खाते में ट्रांसफर किया जाता है।

  • मान लीजिए किसी ने 6 हजार रुपए लोन लिए, तो उसे महज 3,700-3,800 रुपए ही दिए जाएंगे, बाकी के 2,200-2,300 रुपए सर्विस और दूसरे चार्ज के नाम पर काट लिए जाते हैं।

  • अब लोन लेने वाले को ब्याज समेत 6,000 रुपए लौटाने हैं। इन ऐप्स की ब्याज दर इतनी ज्यादा होती है कि कई बार हफ्ते भर में ही लोन अमाउंट 40-50 हजार रुपए तक पहुंच जाता है।

  • फिर शुरू होता है लोन लेने वाले के साथ ब्लैकमेलिंग और शोषण का खेल, जो उससे कई गुना पैसे ऐंठने तक जारी रहता है।

  • इन ऐप्स की खासियत ये है कि ये 2 हजार से 5-7 हजार रुपए के छोटे-छोटे लोन ही देते हैं।

जब यूजर पैसा नहीं लौटा पाते हैं तो यूजर की पूरी डिटेल इकट्ठा कर चुके ये लोन ऐप मार्फ्ड और अश्लील तस्वीरें उसके परिवार को भेजकर ब्लैकमेल करने लगते हैं। ऐसे में व्यक्ति मजबूर होकर उन्हें लोन अमाउंट से कई गुना ज्यादा पैसा दे देता है। कई बार ये ऐप लोगों को इतना परेशान करते हैं कि लोग सुसाइड तक कर लेते हैं, लेकिन इन ऐप्स का धंधा चलता रहता है, क्योंकि ये कोई नया शिकार तलाश लेते हैं।

किसी भी ऑनलाइन ऐप्स से कर्ज लेने से पहले उसके बारे में सही से रिसर्च करना जरूरी है। इस तरह के ऐप्स अगर किसी बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी से जुड़े होते हैं, तभी इस पर भरोसा किया जा सकता है।

ये ऐप्स जिस बैंक या NBFC कंपनी से जुड़े होने का दावा करते हैं, उसकी वेबसाइट पर जाकर एक बार जरूर रिसर्च करना चाहिए। इसके अलावा इस तरह के ऐप्स में ऑफिस एड्रेस नहीं होता है।

कर्ज देने वाले सही ऐप्स आपसे फोटो, वीडियो आदि पर्सनल जानकारी नहीं मांगते हैं। ये ऐप्स केवल पैन, आधार जैसे डेटा KYC के लिए मांगते हैं।

इस तरह के कोई ऐप्स कानून का पालन नहीं करते हैं। इन ऐप्स को लेकर दिसंबर 2022 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने चेतावनी जारी की थी। RBI ने आम लोगों को इस तरह के फ्रॉड डिजिटल लोन ऐप्स से दूर रहने को कहा था।

RBI ने लोगों से अपील की थी कि वे किसी अनजान व्यक्ति, अनवेरिफाइड/अनऑथराइज्ड ऐप्स के साथ अपने KYC न शेयर करें। RBI ने साथ ही लोगों से ऐसी किसी भी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस या RBI को देने की अपील की थी।

ऐसे फ्रॉड को रोकने के लिए डिजिटल लेंडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी DLAI ने कहा था कि इसके लिए एक नियम बनना चाहिए। इस नियम के तहत 60 दिनों से कम के शॉर्ट टर्म लोन को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही लोन को प्रॉसेस करने से पहले निश्चित ब्याज दर दिखाई जानी चाहिए।

इस तरह के ज्यादातर लोन ऐप्स चीन से ऑपरेट होते हैं। इन लोन ऐप्स के जरिए फ्रॉड का धंधा नया नहीं है। 2012 में चीन में इस धंधे ने बहुत जोर पकड़ा था। इन इंस्टेंट लोन ऐप्स ने चीन में 100 अरब डॉलर के लोन बांट डाले थे।

2016 में चीनी सरकार ने इन ऐप्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की और इन पर लगाम कसने के लिए चीन ने इंटरनेट फाइनेंशियल रिस्क स्पेशल रेक्टिफिकेशन वर्क लीडरशिप टीम ऑफिस का गठन किया।

चीन सरकार ने इन ऐप्स को सभी बकाया लोन को चुकाने और अपना बोरिया-बिस्तर बांधने के लिए 2 साल का समय दिया। इसके बाद इन कंपनियों ने अपना ध्यान भारत की ओर लगाया। 2020 में कोरोना महामारी के बाद इन ऐप्स ने भारत में तेजी से पैर पसारे।

चीन के साथ ही लोन ऐप्स कंपनियां ब्रिटेन, अफ्रीकी देशों, इंडोनेशिया समेत कई अन्य देशों में भी लोगों से फ्रॉड कर चुकी हैं। हालांकि, इन सभी देशों ने ऐसे ऐप्स पर बैन लगा दिया था।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, कैश एडवांस नामक लोन ऐप को एंड्रॉयड डिवाइस में प्रॉक्सी नेटवर्क बनाकर चीन में स्थित सर्वर से जोड़ा गया था।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन लोन ऐप्स के सर्वर चीन में होने से ये देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। ये फेशियल रिकॉग्निशन वाली इमेज के साथ ही लोगों का पर्सनल डेटा भी ले लेते हैं। अगर व्यक्ति लोन लेते समय अपना आधार भी दे दे, तो व्यक्ति की अन्य डिटेल और ID प्रूफ से ये एक अलग आधार डेटाबेस तैयार कर सकते हैं।

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