Friday, March 13, 2026
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शौचालयों पर लटके ताले, स्वच्छता की कमान कौन संभाले?

  • सरधना में बने अधिकांश सामुदायिक शौचालयों की हालत खराब
  • 13 शौचालयों में महज चार हो रहे इस्तेमाल

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: सरकार का स्वच्छ भारत मिशन सरधना नगर में मजाक बनकर रह गया है। सरधना में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए सामुदायिक शौचालयों पर लापरवाही के ताले लटके हुए हैं। जो इस्तेमाल हो रहे हैं, उनकी हालत भी दयनीय हो चली है। करीब तीन वर्ष पूर्व बने अधिकांश शौचालय कागजों में ही उपयोग में लाए जा रहे हैं। मतलब ज्यादातर शौचालयों पर ताले लटके हुए हैं।

बाकी की हालत बेहद खराब है। शौचालयों पर क्लीनर बैठना तो दूर की बात है। इतनी मोटी रकम खर्च होने के बाद भी यह शौचालय किसी काम के नहींं हैं। इस बात से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शौच के लिए राहगीरों को कहां जाना पड़ता है। कारण कुछ भी हो, लेकिन फिलहाल यह शौचालय देखरेख के अभाव में इस्तेमाल होने से पहले ही खंडहर हो रहे हैं। यानी एक करोड़ रुपये की संपत्ति की सुध लेने वाला कोई नहींं है।

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सरकार द्वारा स्वच्छ भारत की सपना देखा गया। जिसे साकार करने के लिए हर साल भारी भरकम बजट भी पास किया जा रहा है। शहर से लेकर कस्बे और गांव तक स्वच्छ बनाने के लिए दोनों हाथों से पैसा बांटा गया। सरधना नगर पालिका में भी स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर मोटा पैसा आया। जिसे इस तरह इस्तेमाल किया गया कि फाइलों में सरधना चांदनी चौक बन गया। मगर धरातल पर कुछ नजर नहींं आया।

करीब तीन वर्ष पूर्व पालिका द्वारा नगर में एक नहींं पूरे 13 सामुदायिक शौचालायों का निर्माण कराया गया था। जिनमें रामलीला मैदान के सामने महिलाओं के लिए एक पिंक शौचालय भी बनाया गया। प्रत्येक शौचालय की लागत करीब पांच लाख रुपये है। पहले तो शौचालयों के निर्माण में ही खेल कर दिया गया। शौचालयों में गुणवत्ता की हालत देखें तो सिर चकरा जाए कि पांच लाख रुपये लगे कहां हैं। उसमें भी ज्यादातर शौचालय आज तक इस्तेमाल नहींं हुए हैं। अधिकांश शौचालयों पर आज तक ताले लटके हुए हैं।

मतलब यह शौचालय बनने के बाद से अभी तक इस्तेमाल ही नहींं हुए हैं। 13 शौचालयों में से कुल 4-5 शौचालय ही इस्तेमाल हो सके हैं। जिनमें एक तो खुद पालिका में ही है। जबकि दूसरा तहसील व तीसरा चर्च परिसर में। बाकी शौचालय देखरेख के अभाव में खंड़हर ही बन रहे हैं। जो शौचालय इस्तेमाल हो रहे हैं, वह भी गंदगी की मार झेल रहे हैं। पालिका में बने शौचालयकी हालत तक खराब है। शौचालय के आगे गोबर का ढेर लगा रहता है। ऐसे में खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि राहगीर शौच करने कहा जाते हैं।

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चलो हम ही बता देते हैं। नगर में कहीं भी खुले में लोगों को शौच करते देखा जा सकता है। अब इस एक करोड़ रुपये की बरबादी का हिसाब लेने वाला कोई नजर नहींं आ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन का खुलकर मजाक बनाया जा रहा है। पता नहींं कब अधिकारियों की आंखें खुलेंगी और इन शौचालयों का सही इस्तेमाल होगा। वहीं, इस संबंध में चेयरपर्सन नगर पालिका परिषद सरधना, सबीला अंसारी का कहना है कि सरधना में कुल 13 शौचालयों का निर्माण कराया गया था। 5-6 शौचालय नियमित इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। बाकी शौचालयों को भी उपयोग के लिए खोला जाएगा। यदि शौचालयों पर केयर टेकर नहींं बैठ रहे हैं तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

जो इस्तेमाल हुए वह भी जर्जर

पालिका द्वारा प्रत्येक सामुदायिक शौचालय पर पांच लाख रुपये खर्च किए गए हैं। मगर शौचालयों की हालत देखें तो किसी का भी सिर चकरा जाए। कोई नहींं बता पाएगा कि पांच लाख रुपये शौचालय में कहां खपा दिए गए। हालत यह है कि जिन 4-5 शौचालयों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उनकी दशा भी खराब हो गई है। दरवाजे टूटने लगे हैं। शौचालयों की टंकी का कुछ पता नहींं है।

यहां बनवाए गए थे शौचालय

नगर पालिका द्वारा कुल 13 शौचालय बनवाए गए थे। जिनमें तहसील परिसर, नगर पालिका परिसर, थाना परिसर, पुलिस चौकी चौराहा, नंगला रोड, संत चार्ल्स इंटर कॉलेज, चर्च परिसर, मंदिर परिसर, तहसील रोड स्थित कब्रिस्तान परिसर, छावनी मोहल्ला, टंकी परिसर और रामलीला गेट के सामने महिलाओं के पिंक शौचालय का निर्माण कराया गया।

केयर टेकर भी नहींं आते नजर

नियमानुसार सामुदायिक शौचालयों पर केयर टेकर रखे गए हैं। मगर केयर टेकर भी कागजों में ही ड्यूटी कर रहे हैं। शौचालयों पर कोई केयर टेकर नजर नहीं आता है। इसके अलावा शौचालयों में साबुन, तोलिया आदि सामान की बात करना तो बेमानी सी है।

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