Friday, March 27, 2026
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लोस चुनाव: कमल भी खूब खिला, साइकिल भी चली तेज

  • मेरठ की लोकसभा सीट पर कांटे के आसार
  • भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल और सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी सुनीता वर्मा के बीच सिमटा मुकाबला
  • दलितों और मुस्लिम मतदाताओं के रुझान ने ‘राम’ की बढ़ाई मुश्किलें
  • बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी ने लगाया अपनी पार्टी के पदाधिकारियों पर अपेक्षित सहयोग नहीं करने का आरोप

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। मतदान शांतिपूर्ण चला। कुछ स्थानों पर छिटपुट हंगामे के बाद 59 प्रतिशत मतदान हुआ। चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात रही। कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे. व आईजी नचिकेता झा फोर्स के साथ मतदान केन्द्र पर घूमे। डीएम दीपक मीणा और एसएसपी रोहित सजवाण मयफोर्स के मतदान केन्द्रों पर पहुंचे तथा शांति पूर्ण मतदान के लिए दिशा निर्देश दिये। पुलिस की सख्ती भी रही और बिना आधार कार्ड के मतदान नहीं करने दिया। सुबह मतदान केन्द्रों पर भीड़ जुटी, लेकिन दोपहर में मतदान केन्द्र सूने दिखाई दिये।

शहर के हिन्दू बाहुल्य साकेत, सदर बाजार, न्यू मोहनपुरी, ईव्ज चौराहा, सुभाष नगर, कैंट क्षेत्र गंगानगर, कंकरखेड़ा, रेलवे रोड, शंभुनगर, बागपत रोड पर खूब कमल खिला। भाजपा प्रत्याशी के लिए मतदाता सुबह से ही कतारों में मतदान करने के लिए लग गए थे। हिन्दू मतदाताओं में सुबह मतदान के प्रति काफी उत्साह दिखाई दिया, लेकिन चटख धूप से बढ़ी गर्मी के बाद अचानक हिन्दू इलाकों से मतदाता निकलने बंद हो गए। फिर शाम को मतदाता निकले, इसी वजह से हिन्दू इलाकों में मतदान का प्रतिशत कम दर्ज किया गया।

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कम मतदान प्रतिशत रहने से भाजपा नेताओं ने अचानक ई-रिक्शा भी हिन्दू क्षेत्रों में लगाई गयी, जो वोटरों को मतदान केन्द्र तक लेकर पहुंची। शाम को मतदान का प्रतिशत तब बढ़ा जब भाजपा नेताओं ने प्रत्येक मोहल्ले से वोटरों को निकालना शुरू किया। उधर, मुस्लिम-दलित बाहुल्य क्षेत्रों में साइकिल तेज चलती हुई दिखाई दी। मुस्लिमों का सुबह को मतदान का प्रतिशत कम रहा, लेकिन मस्जिदों से दोपहर में ऐलान होने के बाद दोपहर बाद मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के मतदान केन्द्र पर अचानक भीड़ बढ़नी शुरू हो गई थी। मुस्लिम महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर मतदान किया।

यूथ भी बड़ी तादाद में मतदान करने के लिए पहुंचा। भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल जिन-जिन मतदान केन्द्रों पर घूम रहे थे, वहीं पर भाजपा समर्थक वोटरों ने उन्हें घेर लिया। उनके साथ सेल्फी लेने लगे, लेकिन अरुण गोविल भीड़ बढ़ती देख आगे बढ़ जाते थे। प्रत्येक मतदान केन्द्र पर अरुण गोविल पहुंचे, वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी सुनीता वर्मा भी तमाम मतदान केन्द्रों पर घूम रही थी। दलित और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के जो मतदान केन्द्र थे, उन्हीं को सुनीता वर्मा ने फोकस कर रखा था।

गढ़ में जरूर भाजपा ने दिखाया दमखम

भाजपा के गढ़ की यदि बात की जाए तो वहां जरूर भगवा खेमे में दमखम दिखाया। सिविल लाइन के मोहनपुरी इलाके में भाजपा रंग नजर आया, लेकिन ऐसा भी नहीं कि साइकिल बिलकुल नहीं चली। मोहनपुरी व सुभाष नगर सरीखे हिन्दू बाहुल्य इलाकों में साइकिल खूब दौड़ी। जबकि शास्त्रीनगर में जरूर भाजपा का वर्चस्व नजर आया। इसके अलावा शर्मा नगर, विजय नगर, साकेत, विक्टोरिया पार्क, मंगल पांडे नगर और सबसे बड़ा कैंट विधानसभा में भाजपा का कमल खिलता दिखा। फूलबाग कालोनी के साथ पांडव नगर में भी भाजपा का रंग दिखा लेकिन साथ-साथ साइकिल चली।

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इस बार उदासीन आए नजर

भाजपा के वोटरों की बात करें तो इस बार कुछ ज्यादा उदासीन नजर आया। वोट के लिए जो उत्साह पूर्व के चुनावों में नजर आता था वैसा कुछ नजर नहीं आया। उसमें कमी साफ महसूस की जा सकती थी। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि सुबह 11 बजे के बाद हालात संभालने के लिए भाजपा के बडेÞ नेताओं को गर्मी में एसी छोड़कर बाहर निकल पड़ा।

चुनावी परीक्षा में अरुण गोविल पास होंगे या फिर नहीं ?

चुनावी परीक्षा में भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल पास होंगे या फिर नहीं ? भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल, सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा और बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी का भाग्य ईवीएम कैद हो गया। जनता ने अरुण गोविल के चुनाव मैदान में उतरने के बाद मेरठ लोकसभा सीट हॉट सीट हो गई थी। सभी की निगाहें इसी सीट पर लगी हुई थी। अरुण गोविल ने टीवी सीरियल रामायण में राम की भूमिका निभाई थी, जिसके चलते भाजपा शीर्ष नेताओं ने अरुण गोविल पर दांव लगाते हुए उन्हें मेरठ से चुनाव मैदान में उतार दिया था।

मेरठ में 59 प्रतिशत मतदान हुआ हैं, जो कम मतदान माना जा रहा हैं। कम मतदान का नुकसान किस पार्टी का होगा? ये अभी कहना मुश्किल हैं। राजनीतिक विशलेषक बता रहे है कि कम मतदान कैंट विधानसभा में हुआ, जो भाजपा के लिए चिंता की लकीर खींच रहा हैं। एक तरह से मेरठ सीट भाजपा का गढ़ हैं। भाजपा लगातार मेरठ पर जीत दर्ज कर अपना वर्चस्व बना रहा हैं। भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल का बड़ा नाम होने के बावजूद कांटे के मुकाबले में सपा के साथ फंस गए हैं।

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इसी को लेकर भाजपा में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। भाजपा नेताओं ने पार्टी चुनाव कार्यालय पर बूथ स्तर पर जो मतदान का प्रतिशत रहा, उसको लेकर भाजपा ने गणित दौड़ाया, उसके बाद भाजपा नेता अरुण गोविल की जीत के प्रति आश्वस्त दिखाई दिये। भाजपा नेताओं का कहना है कि अरुण गोविल कहीं खतरें में नहीं हैं। जो आंकड़े बूथ स्तर पर बता रहे हैं, उसमें भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल की स्थिति मजबूत हैं।

मतदान के घटते प्रतिशत ने बढ़ायी भगवा खेमे की चिंता

77 फीसदी तक मतदान की उम्मीद पर मतदाताओं के मूड खासतौर से जिन इलाकों को गढ़ माना जाता है, उन इलाकों में पानी फिर जाने से भगवा खेमे के लिए बुरी खबर मानी जा रही है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि चुनाव एकतरफा नहीं रह गया है। मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट को इंडिया गठबंधन ने चक्रव्यूह में फंसा दिया है। चुनावी जानकारों का कहना है कि जब-जब मतदान का प्रतिशत घटा है तब तब भगवा खेमे के लिए बुरी खबरें आयी हैं, लेकिन यदि मतदान का प्रतिशत सत्तर प्लस तक जा पहुंचा है तो कमल खिला है,

लेकिन मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट की यदि बात की जाए तो पूरा 60 फीसदी भी मतदान सारे भाजपाई मिलकर नहीं सके। उसमें भी एक फीसदी से ज्यादा की कसर रह गयी। मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए जितने भी हथकंडेÞ अपनाए जा सकते थे वो सभी अपनाए गए। 60 फीसदी से भी कम मतदान में यदि शहर और दक्षिण विधानसभा की बात की जाए इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कई इलाकों में शुक्रवार को ईद के जश्न सरीखा माहौल नजर आया। शहर व दक्षिण विधानसभा में भगवा पार्टी का हिस्सा बामुश्किल बीस फीसदी और बाकि अस्सी फीसदी में इंडिया गठबंधन। शहर व दक्षिण में इंडिया गठबंधन के हिस्से के इतर की बात करें

तो जिस साठ फीसदी से कम की बात कही जा रही है उसके अनुपात का घटा जोड किया जाए तो हालत अधिक पतली नजर आती है। हालांकि चुनावी नतीजों को लेकर कोई भविष्यवाणी जल्दबाजी होगी, इसीलिए यहां मतदान के कम प्रतिशत तक ही बात की जा रही है। कई ऐसा भी होता है कि लगता है कि अमुक के पक्ष में ज्यादा वोट पड़ गया और बाद में पता चलता है कि जिसको ज्यादा मतदान माने बैठे थे उसमें बड़ी संख्या में तो वोट ही कैसिंल हो गए। लेकिन इस बात को नहीं नकारा जा सकता कि मतदान का प्रतिशत सत्तर प्रतिशत से कम रह जाना मुश्किल भी खड़ी कर सकता है।

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