- कभी 90 प्रतिशत मतदान होने का रिकॉर्ड भी चौबीसी के हैं नाम दर्ज
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: चौबीसी यानि कि क्षत्रिय समाज बाहुल्य क्षेत्र। कभी 90 प्रतिशत मतदान होने का रिकॉर्ड भी चौबीसी के नाम दर्ज हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में वोटों के बिखराव के साथ कम मतदान प्रतिशत ने भाजपा प्रत्याशी डा. संजीव बालियान की धड़कने बढ़ा दी हैं। ठाकुर चौबीसी के अधिकांश गांवों में वोट डालने को लेकर कोई खास उत्साह ग्रामीणों में नजर नहीं आया। जिस तरह से पंचायत और महापंचायत का दौर चला। उसको देखते हुए लगता था कि क्षत्रिय समाज वोट प्रतिशत विरोध में बढ़ा सकता हैं, लेकिन मत प्रतिशत उम्मीद से कहीं कम हुआ।
हालांकि मतदान प्रतिशत कम होने के पीछे का कारण कुछ भी हो, मगर भाजपा से नाराजगी साफ कहीं जा रही हैं। इस बार मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट की सरधना विधानसभा क्षेत्र में ठाकुर चौबीसी पर सभी की निगाहें टिकी हुई थी। नेता अपने वोट बैंक को लेकर नजर बनाए हुए थे। वहीं, अधिकारी शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पसीना बहाते नजर आए। इसके बीछे का कारण क्षत्रिय समाज में भाजपा के खिलाफ विरोध भी चलता रहा। ठाकुर चौबीसी में लगातार भाजपा के खिलाफ पंचायत व महापंचायत का दौर चला। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चौबीसी के रार्धना गांव में क्षत्रिय समाज को राष्ट्रधर्म का हवाला देते हुए एकजुट होने की अपील कर गए थे।

हालांकि इसके पांच दिन बाद ही खेड़ा में भाजपा के खिलाफ महापंचायत का आयोजन किया गया था। मगर मतदान का समय नजदीक आते ही क्षत्रिय समाज में फूट पड़नी शुरू हो गई। कई जगह भाजपा के पक्ष में पंचायत सजी। शुक्रवार को मतदान का दिन आया तो कई तरह से नजारे देखने को मिले। चुनावी रणभूमि पर क्षत्रिय समाज के बीच बिखराव देखने को मिला। हालांकि पक्ष विपक्ष के बीच भाजपा के प्रति नाराजगी का असर भी नजर आया। चौबीसी के जिन गांवों में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान करने का रिकॉर्ड दर्ज हैं, उन गांवों में मतदान का प्रतिशत बहुत कम रहा। दिनभर अधिकांश गांवों के मतदान केंद्र खाली पड़े रहे। जिससे समझ आता है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को वोट देने से बेहतर घर पर आराम करना ठीक समझा। कुल मिलाकर ठाकुर चौबीसी में हुई वोटिंग ने बड़े बड़े राजनीतिक धुरंधरों को हिसाब जोड़ने में पसीने दिला दिए हैं। अब चार जून को ठाकुर चौबीसी की नाराजगी और समर्थन का सही पता चलेगा।

