- विभिन्न मन्दिरों में जलाभिषेक के लिए उमड़े श्रद्धालु
- स्वयंभू मोटा महादेव मंदिर पर भी जलाभिषेक करने के लिए लगी रही लाइन
जनवाणी संवाददाता |
नजीबाबाद: महाशिवरात्रि पर्व के मौके पर श्रद्धालुओं ने विभिन्न शिवालयों में पहुंचकर महादेव को प्रसन्न करने के लिए चंदन व केसर का तिलक लगाकर शिवलिंग का जलाभिषेक किया तथा विल्व पत्र, विल्व फल, आकाश बेल, धतुरा, बेर, पुष्प व मिष्ठान आदि चढ़ाकर पूजा-अर्चना की।
हरिद्वार से कांवड़ में पवित्र गंगाजल भरकर लाने वाले कांवरियोंं ने अपने परिजनों के साथ क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक कर महादेव की पूजा-अर्चना कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरुवार को महाशिवरात्रि पर्व पर क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों को सुंदर ढंग से सजाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने शिवालयों में पहुंचना शुरु कर दिया। हालांकि विद्वान पंडितो की ओर से विशेष जलाभिषेेक का मुहुर्त अपराह्न बाद बताया गया। मंदिरों में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
चंदन व केसर का तिलक लगाकर विल्व पत्र, विल्व फल, आकाश बेल, धतुरा, बेर, पुष्प आदि अर्पित किए। साथ व्रत के दौरान ग्रहण करने वाले फलाहार का भोग लगाया।

कांवर लाने वाले श्रद्धालु अपने परिजनों के संग विभिन्न शिवालयों पर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कांवर में भरकर लाए गए गंगाजल से जलाभिषेक किया। नगर क्षेत्र में मालन नदी तट पर स्थित श्री टीला मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर तथा मुक्टेश्वर महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
उधर नजीबाबाद-हरिद्वार मार्ग स्थित स्वयंभू मोटा महादेव मंदिर पर भी जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में सुबह से ही पहुंचने शुरु हो गए। इस दौरान सुरक्षा के दृष्टिगत मंडावली थाना पुलिस भी मंदिर परिसर व आसपास मुश्तैदी के साथ मौजूद रही।
उक्त मंदिर पर जहां नगर से जलाभिषेक करने को श्रद्धालु पहुंचे, वहीं काफी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं ने पहुंचकर जलाभिषेक कर स्वयंभू मोटा महादेव शिवलिंग के दर्शन किए। एसडीएम नजीबाबाद बृजेश कुमार सिंह ने भी मोटा महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की तथा जलाभिषेक किया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न मंदिरों में ठंडाई का प्रसाद भी वितरित किया।
श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि पर पर व्रत रखा और व्रत को पूर्ण करने पर चौलाई, कुट्टू के आटे, सिंगाड़े के आटे से बनी सामग्री, फल आदि को आहार के रूप में लिया। पूरे दिन शिवालयों में हर-हर महादेव, ऊँ नम: शिवाय, जय भोलेनाथ के नारे गूंजते रहे।

