- गांव बहादुर पुर में आर्य समाज के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: युग प्रवर्तक, महान समाज सुधारक, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की 139 वीं पुण्यतिथि पर गांव बहादुरपुर में वार्षिकोत्सव का शुभारंभ देवयज्ञ से हुआ। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जातिवाद मिटेगा, तभी राष्ट्र की एकता, संप्रभुता और उन्नति होगी।
सदर तहसील के गांव बहादुरपुर में आर्य समाज के 23वें वार्षिकोत्सव में वेदों के पुर्नद्धारक महर्षि दयानंद सरस्वती का भावपूर्ण स्मरण किया गया। वेदमंत्रोच्चर से यज्ञ में ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं ने आहुतियां दी। यज्ञ ब्रह्म डॉ. धीरज कुमार रहे। यज्ञमान नरेंद्र आर्य को विधि विधान से वानप्रस्थ की दीक्षा देकर नरदेव मुनि नामकरण किया गया। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद अस्पृश्यता, छुआछूत और ऊंच-नीच के खिलाफ थे। गुण, कर्म, स्वभाव और आचरण से ही मनुष्य की सही पहचान होती है। महर्षि नवजागरण के सूर्य थे। गुलामी की दासता में जकड़े भारतीयों में उन्होंने आत्मबोध, आत्मगौरव, स्वाभिमान तथा स्वाधीनता की ज्योत्ति जगाई।
स्वामी आत्मानन्द सरस्वती ने कहा कि महर्षि ने अंधविश्वासों का प्रखरता से खंडन किया। प्रचलित मिथ्या धारणाओं को तोड़ा और अनुचित पुरातन परंपराओं पर प्रहार किया। स्वामी विश्वानन्द ने कहा कि ऋषि दयानंद ने समाज के लिए वेदों के अध्ययन के द्वार खोल दिये, जिससे भारतीय संस्कृति का पुर्नउत्थान का मार्ग प्रशस्त हुआ। स्वामी धर्मानन्द ने कहा कि आर्य समाज एक राष्ट्रभक्त संस्था है। ऋषि ने धर्मांतरण पर अंकुश लगाकर मातृभूमि की रक्षा की। भजनोपदेशक घनश्याम प्रेमी ने दशभक्ति गीत सुनाये। विदुषी निकिता आर्या ने ईश्वर भक्ति को प्रेरित किया।
आंनद पाल सिंह आर्य, आर.पी.शर्मा, ब्रज कुमार, राजपाल सिंह आर्य, प्रधानाचार्य राजकुमार, विजेंद्र कुमार, महाशय चंद्रपाल, भूपेंद्र कुमार, आचार्य कुसुमपाल आदि मौजूद रहे।

