Monday, March 16, 2026
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ममता जाएंगी सुप्रीमकोर्ट: जानिए, केंद्र-बंगाल सरकार क्यों आए आमने-सामने ?

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कैडर के तीन आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति किए जाने पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तीन आईपीएस अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच शुक्रवार को शाम को राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर एक अभासी बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक के बाद ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने पर अंतिम निर्णय लेगी।

गृह मंत्रालय ने बीते गुरुवार को तीनों आईपीएस अधिकारियों डायमंड हार्बर के एसपी भोलानाथ पांडे, दक्षिण बंगाल के एडीजी राजीव मिश्रा और प्रेसिडेंसी रेंज के डीआईजी प्रवीण कुमार त्रिपाठी को प्रतिनियुक्ति के लिए दिल्ली में बुलाए जाने की पुष्टि की थी। ये सभी अधिकारी उस वक्त प्रभारी थे, जब नड्डा के काफिले पर गत गुरुवार को हमला हुआ था। साथ ही केंद्र की प्रतिनियुक्ति रोकने की ममता सरकार के फैसले को खारिज कर दिया था।

केंद्र के कदम को ममता ने बताया राज्य पर अतिक्रमण

केंद्र सरकार के इस कदम को ममता बनर्जी ने छद्म तरीके से राज्य को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश बताया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अगले साल होने वाले विधान सभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार की यह कार्रवाई संघीय ढांचे पर हमला है।

उन्होंने कहा कि यह कुछ और नहीं बल्कि राज्य के अधिकार क्षेत्र में घुसपैठ और पश्चिम बंगाल में कार्यरत अधिकारियों के मनोबल को ठेस पहुंचाने के लिए जानबूझकर किया गया प्रयास है। विशेषकर चुनाव से पहले उठाया गया यह कदम संघीय ढांचे के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। यह असंवैधानिक और पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

ममता बोलीं, नहीं झुकेगी राज्य सरकार 

ममता ने कहा कि हम केंद्र द्वारा राज्य की मशीनरी को छद्म रूप से नियंत्रित करने के इस प्रयास को अनुमति नहीं देंगे। पश्चिम बंगाल सरकार विस्तारवादी और अलोकतांत्रिक ताकतों के सामने झुकने वाला नहीं है।

केंद्र ने कहा, अधिकारियों को तत्काल कार्य मुक्त करें

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों को तत्काल कार्य मुक्त करने को कहा है। अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा है कि आईपीएस कैडर नियमों के मुताबिक, विवाद की स्थिति में राज्य को केंद्र का कहना मानना होग।

उन्होंने कहा कि तीन आईपीएस अधिकारियों को पहले ही जिम्मेदारियां दे दी गई हैं, जिनमें भोलानाथ पांडे को बीपीआरडी का एसपी बनाया गया है। प्रवीण त्रिपाठी को एसएसबी के डीआईजी के तौर पर नियुक्ति दी गई है जबकि राजीव मिश्रा को आईटीबीपी का आईजी नियुक्त किया गया है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का विरोध, अच्छी परंपरा नहीं 

ममता सरकार के रुख परकेंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से लगातार तीन आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का विरोध करना अच्छी परंपरा नहीं है।उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच संघर्ष लोकतंत्र को कमजोर करता है।

छत्तीसगढ़ में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री पटेल से तीन आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अपने समकक्ष ममता बनर्जी को समर्थन देते हुए केंद्र के विरोध करने को लेकर सवाल पूछा गया।

इसके जवाब में पटेल ने कहा, यदि कोई राज्य कहता है कि वह अपने अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं भेजेगा, तो मुझे लगता है कि यह अच्छा संकेत नहीं है, यह अच्छी परंपरा नहीं है। उन्होंने कहा कि चोह वह केजरीवाल हों या फिर ममता बनर्जी मैं कहना चाहूंगा कि इस तरह की झड़पें भारतीय लोकतंत्र मजबूत नहीं करेंगी बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करेंगी।

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