Wednesday, January 26, 2022
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‘तिरंगे का निशां थोड़ा मुझे भी तो मयस्सर हो, मेरे होठों पे जिंदाबाद हिंदुस्तान रह जाए’

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  • दुष्यंत सम्मान 2020 से विजय प्रेमी व मनोज कुमार सम्मानित

जनवाणी संवाददाता |

नजीबाबाद: अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में ग़ज़ल सम्राट साहित्यकार स्वर्गीय दुष्यंत त्यागी की स्मृति में उनकी पुण्यतिथि पर कवियों ने अपनी रचनाओं से सबका मन मोह लिया।

अभिव्यक्ति संस्था के संस्थापक अध्यक्ष प्रदीप डेजी के निवास स्थान पर एक सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। गोष्ठी का प्रारम्भ मेरठ से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार सुमनेश सुमन की सरस्वती वंदना से किया गया। दुष्यंत सम्मान 2020 मेरठ से वरिष्ठ साहित्यकार विजय प्रेमी और मेरठ के वरिष्ठ गीतकार मनोज कुमार मनोज को प्रदान किया गया।

तत्पश्चात कवि सम्मेलन हुआ…. विजय प्रेमी ने कहा कि हृदय की बांसुरी पर नाचने का नाम कविता है,आंसुओं को हंसी में ढालने का नाम कविता है। सुमनेश सुमन ने कहा तिरंगे का निशां थोड़ा मुझे भी तो मयस्सर हो ,मेरे होठों पे जिंदाबाद हिंदुस्तान रह जाए। रामगोपाल भारती ने कहा रिश्तो में वह पहली सी मोहब्बत नहीं रही, मेहमान नवाजी की भी आदत नहीं रही।

मुख्य अतिथि आकाशवाणी नजीबाबाद के सहायक निर्देशक अमर सिंह ने दुष्यन्त त्यागी के सम्बन्ध में अपने विचार रखे।कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली से बिजनौर मित्र मंडल के महामंत्री राकेश जाखेटिया ने की।विशिष्ट अतिथि दिल्ली से अवधेश अग्रवाल ने भी विचार रखे।

इनके अतिरिक्त प्रदीप डेजी, मनोज कुमार मनोज, राजेंद्र त्यागी, राजेश मिश्रा राजू, प्रमोद शर्मा प्रेम, प्रेम सडाना, अजय जौहरी, मनोज त्यागी, मंजू मधुर, जितेंद्र जैन, जितेंद्र कक्कड़, राकेश जाखेटिया, अशोक सविता, नीरज सिंघल, टीकम सिंह, देवपुत्र गुलफाम, जयप्रकाश जौली, सत्येंद्र गुप्ता, जसवंत सिंह और दृष्टि महेश्वरी आदि ने भी काव्य पाठ किया। संचालन प्रदीप डेजी ने किया।

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