Tuesday, March 17, 2026
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अदालत के बाहर कई सीओ संभाल रहे थे सुरक्षा का जिम्मा

  • बम और डॉग स्क्वाड के अलावा रिजर्व फोर्स भी थी तैनात
  • खचाखच भीड़ से भरी हुई थी सेशन कोर्ट

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोतवाली के तिहरे हत्याकांड में सजा के ऐलान को देखते हुए सोमवार को अदालत और आसपास सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए गए थे। सुबह से ही वहां रिजर्व पुलिस फोर्स तैनात कर दी गयी थी। दो-दो सीओ लगाए गए थे। सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और सीओ कोतवाली आशुतोष के अलावा लोहिया नगर, लिसाड़ीगेट व कोतवाली थानों के अलावा थाना सिविल लाइन की भी पुलिस फोर्स लगायी गयी थी।

कोर्ट रूप 14 तक जाने वाले हर रास्ते पर पुलिस वाले मुस्तैद थे। आने जाने वालों के अलावा वहां घूमने वालों से भी रोका टोकी की जा रही थी। सुबह 10 बजे से ही फोर्स लगा दी गयी। अदालत के खुलने के कुछ देर बाद वहां बम व डॉग स्क्वाड पहुंच गया था। सामान्य कामकाज शुरू होने से पहले पूरे परिसर की सुरक्षा जांच की गयी। दोपहर को लंच के बाद जब अदालत बैठी तो सीओ कोतवाली व सीओ सिविल लाइन ने एक बार फिर से पूरे परिसर की डॉग स्क्वाड से जांच करायी गयी।

तीन बजे से जुटने लगे लोग

सजा सुनाए जाने का वक्त चार बजे का मुकर्रर किया गया था, लेकिन वहां पर तीन बजे से ही भारी संख्या में लोग जुटने लगे थे। यहां जुटने वालों में सबसे ज्यादा संख्या तो वकीलों की थी। इनके अलावा दोनों पक्षों के लोग भी वहां पहुंचे थे। आरोपियों के पक्ष से जो भी लोग पहुंच रहे थे उनका प्रयास था कि वो पहचान में ना आएं। सुनील ढाका, पुनीत गिरी व सुधीर उज्जवल के परिजन भी कोर्ट रूम में पहुंचे थे। हालांकि वो ज्यादा देर तक नहीं रुके। अपने अधिवक्ता से कुछ देर बात करने के बाद वहां से निकल गए। चार बजते-बजते कोर्ट रूम खचाखच भर गया। कोर्ट रूम के बाहर का परिसर तथा नीचे से ऊपर तक के पूरे रास्ते में जीने में भी लोग भरे हुए थे। सभी को सजा सुनाने का बेसब्री से इंतजार था।

सीओ को बुलाया चैंबर में

तिहरे हत्याकांड में सजा सुनाने से पहले अपर जिला जज ने अपने चैंबर में सीओ सिविल लाइन को बुलाया। वह काफी देर तक भीतर रहे। जब सीओ से भीतर बुलाए जाने की वजह को लेकर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि बाहर के माहौल व सुरक्षा इंतजामों की जानकारी देने के लिए गए थे। सीओ के अलावा दोनों पक्षों के वकील भी चैंबर में गए थे।

बड़ी संख्या में पहुंचे थे गुदड़ी बाजार और लिसाड़ीगेट से करीबी

तिहरे हत्याकांड में हाजी इजलाल, उसके भाइयों व अन्य करीबियों को सजा सुनाए जाने के चलते कोतवाली के गुदड़ी बाजार व लिसाड़ीगेट समेत शहर के तमाम इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इतना ही नहीं कोर्ट रूम में भीतर भी गुदड़ी बाजार में हाजी इजलाल के घर के समीप रहने वाले उसके कुछ पड़ोसी या फिर पैरोकार भी मौजूद थे। ये सुबह से ही कोर्ट रूम में आकर डट गए थे। चौकस निगाहों से कोर्टरूम व आसपास का जायजा ले रहे थे। दिन के गुजरने के साथ-साथ इनकी संख्या अदालत के आसपास बढ़ती चली गयी।

शाम के करीब चार बजे तक सेशन हवालात से लेकर नई बिल्डिंग के गेट तक जहां से सभी दस के दस को कोर्ट रूम के भीतर लेकर जाया गया, वहां भी बड़ी संख्या में इजलाल के समर्थक माने जाने वाले लोग मौजूद थे। इजलाल व अन्य के कोर्ट रूम में जाने से पहले उसके समर्थक वहां नजर आ रहे थे। एक बारंगी तो नजारा देखकर ऐसा लगा कि यदि जेल से आने वालों पर किसी ने हमले की हिमाकत की तो माहौल खराब हो सकता है। हालांकि पुलिस के पुख्ता इंतजामों के चलते ऐसी नौबत नहीं आयी। जेल से कोर्ट तक लाने और वापस भेजे जाने तक सब कुछ कडेÞ सुरक्षा घेरे में शांति से निपट गया था।

इस तरह किया जुर्माना

आजीवन कारावास की सजा के बाद अदालत ने जो जुर्माना लगाया है। उसके अनुसार हाजी इजलाल, वसीम कुरैशी, अफजाल व रिजवान इन सभी पर 1.37 लाख प्रत्येक पर। इनके अलावा महराज, कल्लू उर्फ कलवा, उर्फ अब्दुल रहमान, मन्नु उर्फ देवेन्द्र, बदरूद्दीन व इजहार पर 1.27 लाख प्रत्येक पर। इनके अलावा शीबा सिरोही पर 50 हजार के अलावा भी जुर्माना किया गया है।

चौकस थी पुलिस फोर्स

इजलाल व शीबा समेत सभी 10 आरोपियों को कोर्ट रूम में पेशी व सजा को लेकर पुलिस फोर्स जबरदस्त अलर्ट नजर आ रही थी। अदालत के 12 तैनात तमाम पुलिस कर्मी लोगों को वॉच कर रहे थे। उनकी एक-एक हरकत को नोटिस कर रहे थे। यह भी देख रहे थे कि कहीं कोई संदिग्ध तो नहीं है। इतना ही नहीं एलआईयू की भी पूरी टीम मुस्तैद थी। सादावर्दी में भी भीड़ के बीच कुछ पुलिस नजर आ रहे थे।

पीड़ित परिजनों ने फैसले का किया स्वागत डीजीसी बोले-दायर करेंगे रिवीजन

तिहरे हत्याकांड में कसूरवारों को आजीवन कारावास का सुनील ढाका, सुधीर गिरी व पुनीत उज्जवल के परिजनों ने स्वागत किया है। वहीं, दूसरी ओर डीजीसी सर्वेश शर्मा ने बताया कि अदालत का निर्णय बहुत अच्छा है, वह उसका स्वागत करते हैं। उन्हें अभी आदेश की कापी नहीं मिल पायी है। आदेश की कापी मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट में रिवीजन दाखिल किया जाएगा। इजलाल व शीबा सिरोही समेत कसूरवार ठहराए गए सभी आरोपियों को आजीवन कारावास व 50 हजार के जुर्माने की सजा पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील ढाका के भाई अनिल ढाका व परिवार के अन्य सदस्यों ने कहा कि उन्हें कोई गिला शिकवा नहीं।

अनिल ढाका कहते हैं कि 16 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते। यह सभी के सामूहिक परिश्रम का फल है कि आज यह लड़ाई नतीजे पर पहुंची। सजा सुना दी गयी। इसके बाद आगे के रास्ते खुले हैं। इस लड़ाई में जिनका पूरा साथ मिला है और जिनकी मेहनत से दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिली है, उन सभी से भी मंत्रणा की जाएगी। सुधीर गिरी के भाई सतीश गिरी ने बताया कि उनके दुख को अलफाजों में बयां नहीं किया जा सकता। जहां तक अदालत के फैसले का सवाल है तो उसका वह स्वागत करते हैं।

आजीवन कारावास की सजा दी गयी है। सभी को आजीवन कारावास की सजा दी है। यह एक अच्छा फैसला है। अदालत के फैसले से परिजन संतुष्ट हैं। डीजीसी सर्वेश शर्मा ने बताया कि अदालत का फैसला स्वीकार योग्य है। सभी को आजीवन कारावास व 50 हजार के जुर्माने की सजा कोई छोटी बात नहीं है। उन्होंने बताया कि उनका प्रयास होगा कि सजा बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में रिवीजन दाखिल किया जाए। कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर लिया जाए। उसके बाद ही आगे की लड़ाई या तैयारियों पर कुछ जानकारी पुख्ता तौर पर दी जा सकेगी।

मृत्युदंड की उम्मीद थी, अधिवक्ता जाएंगे हाईकोर्ट

16 साल बाद शहर को दहलाने वाले तिहरे हत्याकांड के अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, लेकिन कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को लेकर अधिवक्ताओं में भी असंतोष देखा गया। अधिवक्ता भावेश बेनिवाल ने कहा कि जिस तरह से तीन युवकों की निर्मम हत्या की गई थी, उसमें पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता को दोषियों को फांसी की सजा मिलने की उम्मीद थी। इसके साथ ही सभी अधिवक्ता भी यही चाहते थे, लेकिन कोर्ट ने साक्ष्य व गवाहों के आधार पर आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

हम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हैं, लेकिन फांसी की सजा के लिए हाईकोर्ट में अपील करेंगे। अधिवक्ता विक्रांत गोस्वामी का कहना है इस पूरे निर्मम हत्याकांड ने शहर को झकझोर कर रख दिया था। पिछले 16 साल से सभी की निगाहें दोषियों को मिलने वाली सजा पर टिकी थी। सभी को उम्मीद थी कि सजा के रूप में मृत्युदंड से कम कुछ नहीं हो सकता था, लेकिन कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं, लेकिन पीड़ित पक्ष फैसले से नाखुश है। जिसके बाद अब पीड़ित पक्ष के वकील हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे।

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