Sunday, March 15, 2026
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मायूस हुए साइकिल पर सवार पश्चिमी यूपी के कई सूरमा

  • इमरान मसूद, सलीम शेरवानी और संजय गर्ग को नहीं मिला मौका

जनवाणी संवाददाता  |

सहारनपुर:  जेठ महीने की झुलसाती गर्मी ने सूबे की सियासत में भी अजीब सी गर्माहट पैदा कर दी है। लू के थपेड़ों के बीच राज्य सभा के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही आरोपों की आंधी रफ्तार भरने लगी है।

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सत्तानशीं भारतीय जनता पार्टी और उसकी धुर विरोधी समाजवादी पार्टी में भाप उठने से अन्य दलों में भ खदबदाहट देखी जा रही है। दिलचस्प ये है कि सपा में फिर परिवारवाद के लक्षण साफ दिख रहे हैं। ऐसे में साइकिल पर सवार पश्चिम के कई नेताओं के मुंह लटक गए हैं।

भविष्य में सपा मेें विरोध के स्वर मुखर हों तो ताज्जुब नहीं। हां, सत्तानशीं भाजपा जरूर इतरा रही है। इसलिए कि उप्र से उसके सात उम्मीदवारों का उच्च सदन में पहुंचना तय है। बसपा और कांग्रेस तथा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक इन दिनों उठ रही सियासी लहरों को दूर से देखने को मजबूर हैं।

यह बताने की जरूरत नहीं कि राज्य सभा के लिए उप्र से 11 सीटों के लिए एक रोज पहले 24 मई से ही नामाकंन प्रक्रिया शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी, तीन लोगों को राज्यसभा भेजने की स्थिति में है। ये तीनों सीटें कुंवर रेवती रमण, विशंभर प्रसाद निषाद और चौधरी सुखराम सिंह यादव की हैं, जिनका कार्यकाल 4 जुलाई को समाप्त हो रहा है।

सपा में राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों को लेकर पिछले कई दिनों से मंथन चल रहा था। लेकिन, इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीन नामों पर मुहर लगा दी है। इसमें उनकी पत्नी व पूर्व सांसद डिंपल यादव, पूर्व कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा पूर्व राज्य सभा सदस्य जावेद अली हैं। इन तीनों के नाम पर अखिलेश यादव राजी हो चुके हैं। कबिल सिब्बल ने तो नामांकन भी दाखिल कर दिया है।

उधर, भाजपा गठबंधन की बात करें तो इसके पास 273 विधायक हैं, जिसके लिहाज से उसे सात सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश की विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, जिनमें से दो सीटें खाली हैं। इस तरह से 401 विधायक फिलहाल हंै। ऐसे में एक सीट के लिए 36 विधायकों का वोट चाहिए। भाजपा गठबंधन के पास 273 विधायक हैं।

इस लिहाज से वह सात सीटें जीत लेगी। सपा गठबंधन के पास 125 विधायक हैं जिससे उसे तीन सीटें जीतने में कोई दिक्कत नहीं होगी। 11 वीं सीट के लिए जरूर रस्साकशी होगी। फिलहाल, अखिलेश यादव पर एक बार फिर परिवारवाद का आरोप लग रहा है। क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी डिंंपल यादव को उच्चसदन में भेजने का निश्चय किया है।

अगर पश्चिम की बात करें तो यहां से तीन कद्दावर नेता आस लगाए बैठे थे। इनमें पूर्व विधायक इमरान मसूद, पांच बार के सांसद रहे सलीम इकबाल शेरवानी तथा दो बार के मंत्री रहे और समाजवादी पार्टी व्यापारी सभा के प्रदेश अध्यक्ष संजय गर्ग का नाम है। हालांकि, इन सभी का पत्ता साफ हो गया है। पश्चिम के मुस्लिम नेता थोड़ा मायूस हैं। उधर, विरोधी दल फिर से अखिलेश पर परिवारवाद का आरोप लगाने से नहीं चूक रहे हैं।

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