Saturday, March 7, 2026
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नालों-तालाबों में छोड़ी जाएंगी मासकीटोफिश गंबूसिया

  • मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की रणनीति

जनवाणी संवाददाता |

सहारनपुर: कोरोना के साथ ही अब मौसमी बीमारियों का खतरा शुरू हो गया है। डेंगू, मलेरिया, मियादी बुखार का प्रकोप जनपद के कई विकासखंड क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे में अन्य उपायों के साथ अब स्वास्थ्य विभाग ने तय किया है कि गंबूसिया मछलियों (मॉसकीटोफिश) को हथियार बनाकर इन बीमारियों को फैलाने वाले मच्छरों को खत्म किया जाएगा। जनपद के तालाबों और संवेदनशील तथा चिन्हित इलाकों में गंबूसिया मछलियों को छोड़ा जाएगा।

जिला मलेरिया अधिकारी डा. शिवांका गौड़ ने बताया कि गंबूसिया मछली डेंगू और मलेरिया को रोकने में कारगर साबित होगी। उन्होंने बताया कि गंबूसिया की खासियत होती है कि यह डेंगू और मलेरिया तथा अन्य मच्छरों के लार्वा को बहुत तेजी से चट कर जाती है। इसीलिए स्वास्थ्य विभाग ने तय किया है कि गंबूसिया मछली को जनपद के करीब डेढ़ सौ तालाबों में छोड़ा जाएगा। गंबूसिया की प्रजाति के लिए संपर्क साधा गया है।

इसे जल्द ही जनपद के नालों और तालाबों में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया जिन इलाकों में लंबे समय से बारिश का पानी अथवा जलभराव है, वहां पर गंबूसिया मछली छोड़ा जाना बेहद उपयोगी साबित होगा। कुछ वयस्क मछलियों को इसी मौसम में छोड़ा जाएगा, बाकी को अगले मौसम तक तैयार होने पर।

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया एक गंबूसिया मछली 24 घंटे के भीतर 100 से 300 तक लार्वा तक चट कर जाती है। मच्छरों का लार्वा इसका पसंदीदा भोजन है। यह नाले के गंदे पानी में आसानी से जिंदा रह सकती है। उन्होंने बताया गंबूसिया की खासियत यह भी है कि यह सशक्त एंटी लार्वा के तौर पर काम करती है। गंबूसिया औसतन एक से लेकर डेढ़ साल तक जीवित रहती है। यही नहीं, यह अपने जीवन काल में 60 मत्स्य बीज को जन्म देती है।

उल्लेखनीय है कि जनपद में संचारी रोग जागरूकता अभियान चल रहा है। घर-घर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दस्तक दे रही हैं। लोगों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्वच्छता पर जोर दिया जा रहा है, ताकि कोरोना काल में मौसमी बीमारियों से बचा जा सके।

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