Saturday, February 27, 2021
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कोरोना महामारी में मरीजों को संक्रमित कर रहा मेडिकल

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  • वाशिंग प्लांट के पास पसरी गंदगी में सुखाए जा रहे हैं मरीजों के कपडे
  • कैंपस में तीमारदारों और मरीजों का खाना तक छीन कर ले जाते हैं आवारा पशु

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल में इलाज के बजाय मरीजों को बीमारी परोसी जा रही है। यह स्थिति तो तब है जब कोरोना महामारी दोबारा से सिर उठा रही है। ऐसे में बजाय गंभीरता से सावधानी बरतने के मरीजों तक संक्रमण पहुंचाने के रास्ते तलाश लिए हैं। मेडिकल कैंपस में सबसे बुरा हाल तो गंदगी का है।

यहां घूमने वाले आवारा पशु इस गंदगी को और भी फैलाने का काम करते हैं। आवारा पशु तो मरीजों के लिए सिर दर्द बने हुए हैं। कैंपस में ओपीडी के पर्चा काउंटर के बराबर वाले पार्क में मरीजों व तीमारदारों से खाना छीनकर ले जाते हैं।

कोरोना में परोस रहे संक्रमण

कोरोना संक्रमित मरीजों को रखने के लिए जनपद का सबसे बड़ा कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड मेडिकल के सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में बनाया गया है। यहां मरीज भी भर्ती हैं। इस वार्ड के पास ही वाशिंग प्लांट के समीप गंदगी का बुरा हाल है और उससे भी बुरा हाल वाशिंग प्लांट में मरीजों के जो कपडे खुलकर आते हैं उन्हें संक्रमण से बुरी तरह से बजबजा रही इसी आसपास की जगह पर सुखाया जाता है।

मेडिकल में वाशिंग प्लांट तो है, लेकिन इस प्लांट में धुलकर आने वाले कपड़ों को सुखाने के लिए कोई जगह नहीं है। जब गंदगी के ढेर पर मरीजों के कपडेÞ सुखाए जाएंगे तो फिर उन तक संक्रमण भी आसानी से पहुंच सकेगा।

आवारा पशु बने हैं मुसीबत

मेडिकल कैंपस में सबसे बड़ी मुसीबत आवारा पशु बने हुए हैं। इनके आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार तो कुत्ते सरीखे आवारा पशु मेडिकल स्टाफ को ही निशाना बनाते हैं। कई बार स्टॉफ के साथ कुत्तों के काटे जाने की भी घटनाएं हो चुकी हैं।

कुत्तों के अलावा बंदर तथा सुकर भी यहां मुसीबत बने हुए हैं। बंदरों का भी आतंक यहां कम नहीं। लॉकडाउन के दौरान एक बंदर मेडिकल की माइक्रोबॉयलोजी लैब के स्टॉफ से किसी संक्रमित मरीज सीरिंज लेकर भाग गया था। उसको लेकर खूब बबाल हुआ था।

खाना तक छीनकर ले जाते

आवारा पशु यहां मरीजों व तीमारदारों का खाना तक छीन कर ले जाते हैं। केवल कैंपस के परिसर ही नहीं बल्कि कई बार तो वार्ड तक आवारा पशु पहुंच जाते हैं। ओपीडी के पर्चा काउंटर के समीप बने पार्क में दिन भर मरीज व तीमारदार सुस्ताने के लिए बैठ जाते हैं। उनके पास खाना व दवाएं आदि की पोली बैग होते हैं। खाने के लालच में कुत्ते व दूसरे पशु यह सामान छीन कर ले जाते हैं।

ये कहना है मेडिकल प्राचार्य का

वहीं मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि आवारा पशुओ को पकड़ने के लिए कई बार नगर निगम को लिखा जा चुका है, लेकिन उनके द्वारा भेजे गए पत्रों के बाद भी मुसीबत बने आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगर निगम कोई अभियान नहीं चला रहा है।

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