- अवनी परिधि के संविदा कर्मचारियों को पांच माह से नहीं मिला है वेतन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सोमवार को करीब पांच घंटे मेडिकल की तमाम आपात सेवाएं ठप रहीं। इतना ही नहीं पांच माह से वेतन न मिलने से नाराज संविदा अवनी कर्मचारियों ने प्राचार्य का घेराव किया। वहीं, दूसरी ओर इसकी वजह से मरीजों को मुसीबत उठानी पड़ी।
वहीं, दूसरी ओर मेडिकल के दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों पर भी एकाएक काम का बोझ आ पड़ा। आउट सोर्स कंपनी अवनी के द्वारा मेडिकल में संविदा पर रखे गए कर्मचारी छह माह से वेतन न मिलने के कारण विरोध स्वरूप पांच घंटे काम काज से दूर रहे।
मेडिकल अस्पताल के ओपीडी, इमरजेंसी, कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड, सर्जरी, ट्रोमा, मेडिसिन सरीखे तमाम स्थानों पर अवनी परिधि के संविदा करीब ढाई सौ कर्मचारी काम करते हैं। पूरी स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ इन्हीं संविदा कर्मचारियो कंधे पर है। प्रदेश के दूरदराज के इलाकों से यहां नौकरी कर रहे इन कर्मचारियों का करीब पांच माह का वेतन कंपनी पर बकाया है। बगैर वेतन के ही ये काम करने को मजबूर हैं।
आरोप है कि मेडिकल प्रशासन व कंपनी प्रबंधन बजाए वेतन की समस्या का समाधान करने के एक-दूसरे के पाले मे गेंद डाल देते हैं। यदि कोई आवाज उठाता है तो उसकी बर्खास्त कर दिया जाता है। वेतन के नाम पर मुंह बंद रखने की धमकी दी जाती है। वेतन न मिलने से बेहाल इन कर्मचारियों का सब्र सोमवार को जवाब दे गया।
उन्होंने अघोषित कार्य बहिष्कार कर दिया और सभी एकत्र होकर मेडिकल प्राचार्य के कक्ष पर जा पहुंचे और घेराव किया। कर्मचारी शिवकुमार गौतम, राहुल भड़ाना, मेघना, प्रभात, रजनी शर्मा आदि करीब दर्जन भर प्राचार्य कक्ष में जा पहुंचे। वहां घेराव कर दिया।
उनका कहना था कि पांच माह का वेतन नहीं दिया जा रहा है। उनका कसूर बताया जाए ऐसा क्यों किया जा रहा है। कोरोना में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने के बाद भी उनको वेतन के लिए तरसाया जा रहा है। प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने शीघ्र ही सेलरी रिलीज कराए जाने का आश्वासन दिया। उसके बाद कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर लौट आए। तब कहीं जाकर स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकीं।

