- सभी ट्रेनें होंगी पूरी तरह से स्टेनलेस स्टील से निर्मित
- पब्लिक सेक्टर यूनिट (पीएसयू) के तहत होगा कर्मचारियों का चयन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को धरातल पर उतारने के लिए इस समय दिल्ली से मेरठ तक रैपिड का काम अपनी पूरी गति के साथ चल रहा है। ट्रेन सेट के आॅर्डर दिए जा चुके हैं पटरियां बिछनी शुरु हो गई हैं। स्टेशन निर्माण ने और गति पकड़ ली है। मेरठ को कितनी रैपिड ट्रेनें और कितनी मेट्रों ट्रेनें मिलेंगी जानने की सभी को जिज्ञासा है।
यह सब कुछ फाइनल हो चुका है और तो और रैपिड ट्रेन का पहला सेट स्टेशन पर सज धज कर खड़ा भी हो चुका है। जितनी ट्रेनें (रैपिड व मेट्रो) मेरठ को मिल रही हैं वो सभी स्टेनलेस स्टील की बनी हुई होंगी और जो व्यक्ति इन दोनों सेवाओं में नौकरी पाएगा वो पब्लिक सेक्टर यूनिट के अन्तर्गत कार्य करेगा।
रैपिड से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार मेरठ को कुल 40 ट्रेनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें से 30 रैपिड ट्रेनें हैं जबकि 10 मेट्रो। सभी 30 रैपिड ट्रेन दिल्ली मेरठ के बीच 82 किलोमीटर लम्बे कॉरिडोर पर दौड़ेंगी और यात्रियों को मात्र 50 मिनट में दिल्ली से मेरठ ड्रॉप कर देंगी। इसी प्रकार बाकी की 10 मेट्रो ट्रेने शहर के भीतर चलेंगी।
सभी रैपिड और मेट्रो ट्रेनें पूरी तरह से स्टेनलेस स्टील से बनी हुई होंगी। इन सभी 40 रैपिड व मेट्रो की कुल कीमत ढाई हजार करोड़ रुपए होगी, जबकि पूरी परियोजना पर कुल लागत 30 हजार 274 करोड़ रुपये आएगी। रैपिड अधिकारियों के अनुसार रैपिड व मेट्रो सेवा के लिए जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति होगी वो पब्लिक सेक्टर यूनिट (पीएसयू) के अन्तर्गत कार्य करेंगे।
दिल्ली-मेरठ होगा पहला गलियारा
दिल्ली वाया गाजियाबाद टू मेरठ। 82.15 किलोमीटर लम्बा यह गलियारा देश में आरआरटीएस का पहला गलियारा होगा। यह गलियारा पूरी तरह से आधुनिक होगा और मल्टी मॉडल इंटीग्रेशन पर आधारित होगा। रैपिड सूत्रों के अनुसार इस गलियारे के तैयार होने के बाद दिल्ली पानीपत और दिल्ली गुड़गांव गलियारे पर भी काम शुरु हो जाएगा।
रैपिड: एक नजर
- मई 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरआरटीएस परियोजना की डीपीआर स्वीकृत की गई
- फरवरी 2019 में केन्द्र ने आरआरटीएस की इस परियोजना को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी
- मार्च 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस महत्तवपूर्ण परियोजना की आधारशीला रखी गई
- जून 2019 में रैपिड के इस 82 किलोमीटर लम्बे कॉरिडोर पर जगह जगह पिलर निर्माण कार्य शुरु

