- डीएसओ का छापा सरकारी गेहूं की सूचना पर पहुंचे थे अधिकारी रामा फ्लोर मिल पर
- लॉकडाउन के दौरान भी शिकायत पर डीएसओ ने की थी कार्रवाई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सरकारी गेहूं की सूचना पर दबिश को पहुंचे जिला आपूर्ति कार्यालय के अधिकारियों ने मौके पर फफूंदी व कीडेÞ लगा ऐसा गेहूं पकड़ा जिसको पीस का आटा पैक कर बाजार में बेचने के लिए भेजा जा रहा था। गुरुवार को जिला आपूर्ति अधिकारी नीरज सिंह व एसडीएम सदर आदि अधिकारियों दलबल के साथ अचानक सदर स्थित रामा फ्लोर मिल पहुंचे तो वहां हड़कंप मच गया।
अधिकारियों को देखकर वहां कर्मचारी इधर-उधर निकलने का प्रयास करने लगे। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें सरकारी गेहूं की सूचना मिली है। इसके बाद वहां के मालिक व मैनेजर ने बताया कि गेहूं के सभी वैध कागजात उनके पास हैं। डीएसओ ने पेपरों की जांच की तो सही पाए गए, लेकिन इसके इतर वहां दूसरी बड़ी कारगुजारी की जा रही थी। इस फ्लोर मिल में पिसाई के लिए जो सरकारी गेहूं के बोरे रखे थे उसमें रखा गया गेहूं दो साल पुराना था। उसमें फफूंदी लग चुकी थी।
गेहूं इस लायक नहीं था कि पशु भी उसको खा सकें। उसमें सुंडियां लगी थीं। गिडार बिलबिला रहे थे। यह देखकर डीएसओ ने पिसाई कर रहे शख्स को बुलाकर हड़काना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि इस गेहूं का पिसा आटा खाकर लोग मरेंगे या जिंदा रहेंगे। इतने खराब गेहूं का आटा खाने के बाद किसी का भी बीमार पड़ना तय है। डीएसओ की सख्ती व नाराजगी को देखकर वहां काम रहे स्टाफ ने आनन-फानन में सडे हुए गेहूं के जो बोरे पिसाई के लिए आए गए थे, उन्हें हटाना शुरू कर दिया।
हालांकि इस बात की कोई गारंटी नहीं कि खराब गेहूं को फ्लोर मिल मालिक नष्ट कर देगा। अगर उन्हें नष्ट ही करना होता तो फिर खराब व सड़े हुए गेहूं की पिसाई भला क्यों करते। राम फ्लोर मिल पहली बार कारगुजारियों को लेकर चर्चा में नहीं आया है। इससे पहले लॉकडाउन के दौरान कथित रूप से काला बाजारी के आरोपों के चलते डीएसओ ने यहां छापा मारा था। इतना ही नहीं फ्लोर मिल पर एक अधिकारी की देखरेख में वितरण
कराया था।
ये कहना है कि डीएसओ का
जिलापूर्ति अधिकारी नीरज सिंह का कहना है कि सरकारी गेहूं की सूचना पर राम फ्लोर मिल पहुंचे थे। वहां जब जाकर जांच की गयी तो कागज वैध पाए गए, लेकिन गेहूं जो पिसा जा रहा था, वह ठीक नहीं था। फ्लोर मिल मालिक को कठोर शब्दों में चेतावनी दी गयी है।

