Friday, March 20, 2026
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करोड़ों के बस स्टॉपेज झेल रहे बर्बादी की मार

  • निगम और रोडवेज का नहीं हो पाया अनुबंध, कबाड़ में तब्दील हुए स्टॉपेज

जनवाणी संवाददाता

मेरठ: शहर भर में लगाए सिटी बस स्टॉपेज इन दिनों बर्बादी की मार झेल रहे हैं। जेएनएनयूआरएम के बस स्टॉपेज जर्जर हालत में। न तो इन पर अब सिटी बसें रुकती हैं और न ही यात्री यहां खड़े दिखाई देते हैं। ऐसे में अब यह सिर्फ कबाड़ में ही तब्दील होते जा रहे हैं। वहीं, अब तो इन बस स्टॉपेज की सीटें भी गायब हो चुकी हैं।

जेएनएनयूआरएम योजना के तहत नगन निगम द्वारा सालों पहले शहर भर में यह स्टॉपेज बनाए गए थे। शहर में 17 विभिन्न जगहों पर बनाए गए बस स्टॉपेज को कुल 1.70 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। जिसमें प्रति बस स्टॉप की लागत करीब 10 लाख रुपये है, लेकिन इन दिनों यह समय और मौसम की मार ही झेल रहे हैं। सिर्फ जंग लगा ढांचा ही सड़कों के किनारा देखा जा सकता है, जो कभी पहले चमचमाते हुए डिजिटल बोर्ड लगे बस स्टॉप हुआ करते थे।

शुरूआत में इन बस स्टॉपेज पर निर्माण कंपनी ने आधुनिक तकनीक का डिजिटल बोर्ड लगाया था। जिन पर डिजिटल एडवरटाइजिंग की जानी थी, लेकिन बसों के न रुकने से यात्रियों का यहां रुकना बंद हो गया, इसी कारण विज्ञापन भी स्टॉपेज के लिए नहीं मिले। यही कारण है कि इनका रखरखाव ही होना बंद हो गया और स्टॉपेज की हालत खस्ता होती गई। सिटी बसों के लिए बने इन स्टॉपेज पर बैठने के लिए कुर्सियों की भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन इन दिनों स्टॉपेज पर एक कुर्सी तक दिखाई नहीं देती है। वहीं, कुछ जगहों पर यहां रात के समय नशेबाज लोग बैठे रहते हैं।

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कहीं बने कूड़ाघर, तो कहीं हुआ अतिक्रमण

इन बस स्टॉपेज की बदहाली यूं हो गई है कि कई जगहों पर तो कूड़ाघर ही नजर आते हैं। लोगों ने यहां कूड़ा डालना शुरू कर दिया है, जिसके बाद अब सिर्फ खत्ता ही नजर आता है। सूरजकुंड रोड स्थित पशु चिकित्सालय के निकट बस स्टॉपेज पर हाल ही में कूड़े का खत्ता हटाया गया है, लेकिन इस स्टॉपेज पर अब एक भी कुर्सी नहीं बची है, वहीं ईव्ज चौराहे के बस स्टॉपेज पर अतिक्रमण रहता है और इसका डिस्पले बोर्ड व नगर निगम का होर्डिंग तक हट चुका है। यह स्टॉपेज पर बस स्टॉपेज जैसे नजर नहीं आते हैं।

बर्बादी का कारण बना अनुबंध न हो पाना

सिटी बसों के लिए चौराहों पर बनाए गए इन स्टॉपेज को लोगों की सुविधाओं के लिए ही नगर निगम द्वारा तैयार किया गया था, लेकिन निगम द्वारा रोडवेज से बसों को रोकने के लिए अनुबंध ही नहीं हो पाया। जिस कारण बस इन स्टॉपेज पर रुकी ही नहीं और यात्रियों ने भी खड़ा होना बंद कर दिया। लोगों ने इन बस स्टॉपेज का इस्तेमाल भी इसलिए नहीं किया।

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