जनवाणी ब्यूरो |
अंबेडकरनगर: जलालपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास का जिम्मा पांच साल में दो विधायकों के हवाले रहा। शुरुआती दौर में बसपा के रितेश पांडेय यहां दो वर्ष के लिए विधायक रहे। इन्होंने बिजली व सड़क पर विधायक निधि खर्च की। अधिकांश बजट ब्लाकों को देकर बीडीओ के माध्यम से व्यय किया।
शिक्षण संस्थानों समेत अन्य कार्यों पर कुछ भी व्यय नहीं किया। इलाज के लिए महज 80 हजार रुपये दिया। बिजली पर करीब 23 लाख रुपये दिया। दो साल के कार्यकाल में 32 परियोजनाओं पर एक करोड़ 61 लाख 76 हजार ही व्यय कर सके और लोकसभा चुनाव में सांसद बन गए। इनके दो साल के कार्यकाल में साढ़े तीन करोड़ रुपये में डेढ़ करोड़ बचे
रह गए।
इसके बाद वर्ष 2019 में यहां हुए उप चुनाव में सपा के सुभाष राय को जनता ने विधायक चुनकर विकास की बागडोर सौंपी। तीन साल के बचे कार्यकाल के वर्ष 2019-20 में सुभाष राय ने जिम्मेदारी संभाली और क्षेत्र को संवारने की कोशिश की। इनके सामने सड़क, बिजली और यातायात की सुविधा जनता को दिलाना सबसे बड़ी चुनौती बनी।
विधायक ने कोरोना काल में अपनी निधि से 16 लाख रुपये दिया। विधायक निधि तथा शासन से बजट हासिल कर सड़कों को संवारने पर खास ध्यान दिया। बिजली, पानी और पथ प्रकाश के लिए भी कुछ बजट दिया, लेकिन शिक्षण संस्थानों पर विधायक की विशेष कृपा रही।
महज दो साल में ही सात शिक्षण संस्थानों पर 30 लाख रुपये दिए हैं। कोरोना काल के वर्ष 2020-21 में विधायक निधि एक साल के लिए स्थगित थी। इसके बावजूद सुभाष राय ने पिछले साल की बची विधायक निधि को शिक्षण संस्थानों पर दिल खोलकर खर्च किया। कोरोना काल में ही पांच शिक्षण संस्थानों को 20 लाख रुपये दिए हैं।
15 सोलर लाइटें लगवाने पर 12 लाख 21 हजार रुपये व जलनिगम को दो लाख 47 हजार रुपये और बाकी बजट सड़कों पर खर्च किया है। करीब 52 परियोजनाओं के जरिए विकास करने के साथ निजी प्रयास से शासन से बजट हासिल कर प्रमुख सड़कों को संवारा है। इसके बाद भी विधानसभा क्षेत्र में समस्याओं का अंबार है।
जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व के ज्यादातर विधायक सत्तादल के साथ रहे। इसके बाद भी यहां विकास धरातल पर नजर नहीं आता। महिला कालेज व इंटर कालेज की सुविधा नहीं है। बेहतर यातायात के लिए कोई बस सेवा नहीं है। बिजली, स्वास्थ्य और सड़कों की हालत बेहद खराब है।
विकास की अपार चुनौतियों के बीच मुझे काम करने का कम वक्त मिला है, लेकिन दोगुनी ऊर्जा से समस्याओं को दूर करने में लगा हूं। सरकार को जलालपुर में बाइपास, धवरूआ में विद्युत उपकेंद्र, तीन पुल, खस्ताहाल प्रमुख 22 सड़कों को बनवाने का प्रस्ताव दिया गया है। विधायक निधि से 40 सड़कें बनवाई है। बिजली के ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़वाने व 200 से अधिक मरीजों के इलाज में शासन से बजट दिलाया। जलालपुर-रामगढ़ और मंगुराडिला-न्योरी मार्ग बनवाया। हाईवे बनने से आसपास की टूट रही सड़कों को बनवाने और परिवहन निगम की बस सेवा संचालित कराने की मांग शासन में उठाई है। -सुभाष राय, विधायक विधानसभा क्षेत्र, जलालपुर
जलालपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता के सामने एक-दो नहीं, समस्याओं का अंबार है। बिजली, पानी, सड़क, यातायात, स्वास्थ्य की सुविधा पाने में जनता लाचार है। राजनीतिक उठा-पटक के बीच जनता की नजर विधायक चुनने पर रही और विधायक निजी हितों को साधने में रह गए। यहां से चुने गए विधायकों के पास विकास कार्य के नाम पर बताने एवं दिखाने लिए कुछ भी नहीं है। तहसील, ब्लाक और नगरपालिका मुख्यालय होने के बाद भी यहां यातायात की सुविधाएं नहीं होना जनप्रतिनिधियों की नाकामी बयां करने को काफी है। बजट को कुछ लोगों और वर्ग पर ही खपाया गया है। -डा. छाया वर्मा, रनर
जनता के सुख-दुख में बगैर देरी किए विधायक सुभाष राय पहुंचते हैं। जनसमस्याओं को सरकार तक पहुंचाने के लिए सजग रहते हैं। हालांकि, धरातल पर विकास कार्य अभी कहीं दिख नहीं रहा है। सड़कें और बिजली आपूर्ति बहुत खराब है। इसे दुरुस्त कराने में विधायक को ध्यान देना चाहिए। -संतोष पाठक, समाजसेवी
जलालपुर विधानसभा क्षेत्र में फिलहाल विकास कार्य ठप है। अचलनगर-रामगढ़ पर छह किलोमीटर मार्ग निर्माण अधर में लटका है। नगपुर से जलालपुर तक सड़क की हालत खराब है। जलालपुर-रामगढ़ मार्ग का गोरखपुर लिक एक्सप्रेस-वे से जुड़ाव नहीं है। विधायक ने इसपर ध्यान नहीं दिया है। -दुर्गा प्रसाद मिश्र, किसान
विधायक सुभाष राय ने क्षेत्र के विकास पर कोई काम नहीं किया है। सड़कें बदहाल और बिजली की समस्या विकराल बनी है। जलालपुर के लिए यातायात की सुविधा नहीं है। परिवहन निगम की बसों का संचालन ठप है। यहां जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। -विपिन चौहान, अधिवक्ता
कोरोना काल की अड़चनों के चलते विधायक सुभाष राय विकास का कोई खास कार्य नहीं कर सके। जनता के दुख-दर्द में हमेशा शामिल रहे। जनहितों के मुद्दों को सदन में उठाकर निदान कराने का प्रयास किया है। सड़क और बिजली आपूर्ति की दुर्दशा मुसीबत बनी है। -शाहकार आलम, समाजसेवी

