जनवाण ब्यूरो |
धर्म न्यूज: सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। वहीं, आज नवरात्रि का पांचवा दिन है। नवरात्रि के पांचवे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा रूप की पूजा होती है। यह रूप देवी दुर्गा के आठ महाअष्टमी के एक रूप के रूप में प्रसिद्ध है और इसे नवदुर्गा में पांचवें दिन पूजा जाता है। कूष्मांडा का अर्थ होता है “कूष्म” यानी “प्रकाश” और “आंडा” यानी “अंडा”। इस रूप में मां जगत की सृष्टि के उत्पत्ति की प्रतीक हैं और इसे सृष्टि की रचनाकार माना जाता है।
कैसा है कूष्मांडा देवी का रूप?
मां कूष्मांडा का रूप अत्यधिक तेजस्वी और आलोकित होता है। वह सूरज की भांति चमकती हैं और उनके शरीर से तीव्र प्रकाश निकलता है। वे अपने एक हाथ में बर्तन और दूसरे हाथ में कलश पकड़े हुए होती हैं। साथ ही उनके पास शस्त्रों और वरदान की शक्ति होती है।
पूजा और महत्व
मां कूष्मांडा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भक्त उन्हें सूर्योदय से पूर्व पूजा करते हैं। इस दिन विशेष रूप से सूरज की उपासना भी की जाती है, क्योंकि मां कूष्मांडा सूरज के समान चमकती हैं और उनका यह रूप शक्ति, संजीवनी और जीवन के कणों को प्रदान करता है।
माता कूष्मांडा के स्वरूप की पूजा का लाभ
- सृजन शक्ति: कूष्मांडा देवी का रूप सृष्टि के सृजन से जुड़ा हुआ है, इसलिए उनकी पूजा करने से जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि: यह रूप विशेष रूप से स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है।
- अच्छे परिणाम: कूष्मांडा देवी की पूजा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।