- ईरान के मौलाना अम्मार रिजवी इमामबारगाह पंजतनी में पढ़ेगे मजलिस
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ‘जिसको नींद आती थी फातिमा के सीने पर, सो रहा है आज वो खाक के बिछोने पर’। आंखों को नम कर देने वाले कुछ इसी तरह के नोहों के बीच इस्लामी साल का पहला महीना मोहर्रम शुरू होने वाला है। इस दौरान लोगों के अश्क बहेंगे और सीने से आह निकलेगी। शहर व जैदी फॉर्म सहित लोहिया नगर, सरधना, मवाना, खिर्वा व रसूलपुर धौलड़ी सहित जिले भर की विभिन्न मातमी अंजुमनों ने मोहर्रम की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
अन्जुमन तन्जीम ए अब्बास के सैयद तालिब जैदी ने बताया कि सोग का यह महीना 31 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है। मोहर्रम का महीना ईद की तरह ही चांद देखकर शुरू होता है। उधर, मोहर्रम कमेटी के मीडिया प्रभारी अली हैदर रिजवी के अनुसार इस बार शहर में आयोजित होने वाली विभिन्न मजलिसों के लिए उलेमाओं की लिस्ट तैयार हो रही है जो कि मोहर्रम की मजलिसों में जंग-ए-कबला और सभी 72 शहीदों के जीवन पर प्रकाश डालेंगे।
इसके अलावा इमामबारगाह दरबार ए हुसैनी जैदी फॉर्म में मौलाना नदीम असगर मजलिस को सम्बोधित करेंगे। जैदी फॉर्म में ही पुरानी कोठी में आयोजित होने वाली मजलिसों को लखनऊ के मौलाना रिजवान हैदर सम्बोधित करेंगे। उन्होंने बताया कि जैदी सोसायटी स्थित इमामबारगाह पंजतनी में ईरान से आने वाले मौलाना अम्मार हैदर मजलिस को खिताब करेंगे।
गौरतलब है कि शहर में इस समय तीन मातमी अंजुमनें हैं जिनमें अंजुमन तन्जीम ए अब्बास, अंजुमन दस्ता ए हुसैनी व अंजुमन ए इमामिया शामिल हैं। इसके अलावा जैदी फॉर्म में अंजुमन फौज ए हुसैनी है। इसके अलावा हैदर अब्बास ने भी जानकारी देते हुए बताया कि मोहर्रम की चांद रात को सभी इमामबारगाहों व अजाखानों मेें अलम ए मुबारक सजा दिए जाएंगे।
शिया मुसलमान काले कपड़े पहन लेंगे और शिया महिलाएं भी अपनी चूड़ियां व अन्य जेवर उतार देंगे। मोहर्रम का यह सोग दो माह और आठ दिन तक मनाया जाएगा। बकौल तालिब जैदी मोहर्रम की पहली तारीख से मजलिसों व दो तारीख से मातमी जुलूसों का सिलसिला शुरु हो जाएगा।

