Tuesday, May 21, 2024
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मुकेश को पहले जेल फिर बेल, ऐनवक्त पर कैंसिल

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  • सिविल लाइन थाने से कोर्ट तक बाइक पर लेकर पहुंची पुलिस
  • चलते-चलते पलटा देती है यूपी पुलिस की गाड़ी, बैठने से किया इनकार
  • हंगामे की आशंका के चलते अदालत के बाहर सुरक्षा के भारी इंतजाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सपा और एससी-एसटी आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष नेता मुकेश सिद्धार्थ को अदालत ने पहले जेल भेजा उसके बाद देर शाम उन्हें बेल यानि अंतरिम जमानत दे दी गयी, लेकिन एन मौके पर रिहाई पर रोक लगा दी गयी। इससे सोमवार को पुलिस ने पहले उन्हें एसीजेएम-पंचम की कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दे दिए गए। जैसे ही एसीजेएम-पंचम की कोर्ट से आदेश हासिल किया पैरोकारों की ओर से तुरंत ही अंतरिम जमानत के लिए एडीजी फर्स्ट की कोर्ट में जमानत की अर्जी दायर कर दी गयी।

वहां जमानत की अर्जी पर सुनवाई के लिए 16 तारीख लगा दी गयी। इसके तुरंत बाद अंतरिम जमानत की अर्जी दायर की गयी। इसको अदालत ने स्वीकार करते हुए तत्काल अंतरिक जमानत दे दी। मुकेश सिद्धांर्थ को अंतरिम जमानत 16 जनवरी तक मिली है। इससे पहले एसीजेएम-पंचम की कोर्ट में पेश करने के बाद उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया। वहीं दूसरी ओर जब अंतरिम जमानत की जानकारी मिली तो पुलिस अफसरों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में डीजीसी सर्वेश शर्मा से से संपर्क किया। एडीजी ने डीजे के यहां जमानत खारिज करने की अर्जी दायर की।

उन्होंने अर्जी में तर्क दिया कि आरोपी को जेल में दाखिल करने की बात अदालत से छिपाकर अंतरिम जमानत ली गयी है। इसके बाद जनपद न्यायधीश ने अंतरिम जमानत कैंसिल कर दी। वहीं, दूसरी ओर अंतरिम जमानत मिल जाने के बाद परिजन शाम को मुकेश सिद्धार्थ को लेने के लिए जिला कारागार पहुंच गए थे, लेकिन जब जानकारी मिली कि अंतरिम जमानत खारिज कर दी गयी है

तो निराश होकर लौट आए। बीते तीन जनवरी को कलक्ट्रेट में योगी सरकार के ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर को जिंदा जलाने समेत कई आपत्तिजनक माने जाने वाले बयान देने के मामले में सपा नेता को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहां से अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश कर दिए।

बाइक पर लाए कोर्ट

कथित भड़काऊ भाषण मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद अंडरग्राउंड हो गए सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ को दिल्ली से दबोचने के बाद उन्हें रात भर थाना सिविल लाइन में रखा गया। पुलिस ने साफ कर दिया था कि सोमवार सुबह उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। सुबह 10 बजे से ही थाने से उन्हें कोर्ट में लाने की तैयारी शुरू हो गयी थी। तमाम कागजात तैयार करने के बाद दोपहर को करीब एक बजे उन्हें बाइक पर लेकर पुलिस वाले अदालत पहुंचे।

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कोर्ट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अदालत के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कोर्ट रूम में जाने वाली सीढ़ियों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। समर्थकों पर परिजनों के अदालत के बाहर हंगामे की आशंका के चलते तमाम इंतजाम किए गए थे। हालांकि मुकेश सिद्धार्थ की पेशी के दौरान अदालत के बाहर हंगामे की तमाम आशंकाए निर्मूल साबित हुईं।

बयान पर हूं कायम, नहीं लूंगा वापस

कोर्ट रूम से जब मुकेश सिद्धार्थ बाहर आए तो पुलिस वालों ने सख्त घेरा बना रखा था। इस बात की ताकिद इन पुलिस वालों को की गई थी कि मीडिया के सामने पीसी ना कर पाएं। कोर्ट रूम की सीढ़ियों से उताकर जब पुलिस वाले उन्हें समीप खड़ी बाइक की तरफ लेकर चल रहे थे तब तमाम मीडिया वहां मौजूद थे, तब संवाददाता ने जब मुकेश सिद्धार्थ से सवाल किया तो उनका कहना था कि वह अपने बयान पर कायम है-बयान वापस नहीं लूंगा। एक नहीं चाहे 100 मुकदमे कायम कर दिए जाएं। अपने समाज के लिए लड़ता हूं

और लड़ता रहूंगा। जैसे ही उन्होंने इस संवाददाता से बातचीत शुरू की, पुलिस वालों ने उन्हें लगभग धकेलने के अंदाज में बाइक पर बैठाया, अगले ही पल बाइक स्टार्ट हो गयी और तेजी से वहां से निकल गयी। इससे पूर्व कोर्ट में विनोद हरित भी मौजूद थे। जब उनसे इस संवाददाता ने पूछा तो उन्होंने बताया कि उनकी आज तारीख थी, लेकिन मुकेश सिद्धार्थ से ना तो कोई बात हुई ना ही वह उनसे मिले।

संगठन और समाज की दूरी

आपत्तिजनक बयान मामले को लेकर और एससी-एसटी आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष व सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ पूरी तरह से अकेले व बेबस नजर आए। गिरफ्तारी के बाद थाना सिविल लाइन में लाए जाने से लेकर थाने से सोमवार सुबह पेशी के लिए अदालत लाए जाने से लेकर अदालत में पेश करने से लेकर जेल पहुंचाने तक न तो संगठन का कोई नुमाइंदा नजर आया और न ही जिस समाज के नाम उन्होंने कथित आपत्तिजनक बयान दिया थे, उनसे से कोई नजर आया। मसलन नगर निगम के जिन पार्षदों से मारपीट का आरोप लगाते हुए उन्होंने बयान दिया था, वो पार्षद भी नहीं दिखाई दिए। जिन्होंने हंगामा किया उन्हें रिश्तेदार या निजी समर्थक कहा जा सकता है।

चेहरे पर थकान और तनाव

भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच मुकेश सिद्धार्थ को जब कोर्ट रूम से बाहर लाया गया तो उनके चेहरे पर थाने में काटी रात की थकान और जो मुकदमे दर्ज किए गए हैं तथा जिनकी वजह से उन्हें जेल जाना पड़ रहा है उसको लेकर उसका तनाव साफ पढ़ा जा सकता था। वह पुलिस वालों पर भी झुझलाहट भरे अंदाज में बात कर रहे थे। कोर्ट रूम से जैसे ही सीढ़ियों से नीचे लाया गया,

एक सिपाही बाइक लेकर आ गया। साथ चल रहे थाना सिविल लाइन के दारोगा ने बाइक पर बैठने को कहा, लेकिन वह बाइक पर बैठने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि पैदल ही चलूंगा। तभी दारोगा ने उनके काम में कुछ कहा तो वह अनमने मन से बाइक पर बैठने के लिए राजी हो गए।

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समर्थकों का हंगामा

कहचरी परिसर में अदालत में पेश किए जाने के बाद जहां उन्हें कुछ समय के लिए रखा गया था। वहां पर कुछ करीबी व समर्थक जिनमें रिश्तेदार अधिक बताए जा रहे हैं, वो पहुंच गए और मिलवाने की बात कहते हुए हंगामा करने लगे। इस दौरान सुरक्षा में मौजूद पुलिस वालों से समर्थकों की तीखी नोकझोंक भी हुई, लेकिन पुलिस वालों के आगे किसी एक नहीं चली। पुलिस वालों का अंदाज बता रहा था कि उन्हें साफ हिदायत दी गई कि यदि कोई ज्यादा हो हल्ला करता है तो उसको वर्दी की ताकत बता दी जाए।

अग्रिम जमानत की कोशिश में धरे गए

आपत्तिजनक भाषण मामले में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ अंडर ग्राउंड होकर अग्रिम जमानत के प्रयास में थे। इधर मेरठ पुलिस जगह-जगह उनके संभावित ठिकानों पर दबिशें दे रही थी, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। दरअसल, जो मोबाइल नंबर वह यूज कर रहे थे, वो तो वह घर पर ही छोड़ गए थे। पुलिस के लिए उन तक पहुंचने के लिए एक मात्र सहारा या कहें सूत्र उनका मोबाइल नंबर ही था, अग्रिम जमानत के प्रयास में लगे सपा नेता ने नया या कहे दूसरा नंबर यूज करना शुरू कर दिया।

सपा नेता ने तो अपना नंबर बदल दिया मुकेश सिद्धार्थ अग्रिम जमानत का प्रयास कर रहे थे और दिल्ली में छिपे थे। इससे पहले उनको गिरफ्तार कर लिया। रात में ही पुलिस टीम सपा नेता को सिविल लाइन थाने लेकर पहुंची। सोमवार सुबह कोर्ट में पेश करने की बात कही जा रही है। पार्षदों की पिटाई के विरोध में शनिवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया गया था। विपक्ष के काफी नेता इसमें शामिल रहे। समाजवादी पार्टी के नेता मुकेश सिद्धार्थ भी रहे, जिन्होंने ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर को जिंदा जलाने की धमकी दी थी। हालांकि उनकी इसका विपक्ष के नेताओं ने भी आपत्ति की और वह अलग-थलग पड़ गये।

शनिवार रात ही 9 गंभीर धाराओं में सपा नेता पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस तलाश में जुट गई। शनिवार को पूरे दिन पुलिस टीम उन्ही तलाश में दौड़ती रही। इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि मुकेश सिद्धार्थ दिल्ली में छिपा है और अग्रिम जमानत के प्रयास में लगा है। पुलिस ने दिल्ली तक की दौड़ लगा दी और आखिरकार रात में ही मुकेश सिद्धार्थ को हिरासत में ले लिया गया। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण का कहना है कि मुकेश सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अभी और बढेÞगी मुकेश सिद्धार्थ की मुश्किले

जेल जाने के बाद भी फिलहाल सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ की मुश्किले कम होती नजर नहीं आ रही है। आने वाले दिनों में उनकी मुश्किले बढेÞगी। सूत्रों की मानें तो उनको लंबे वक्त तक सलाखों के पीछे रखने की तैयारी कर ली गयी है, लेकिन पुलिस प्रशासन से ज्यादा मुकेश सिद्धार्थ की परेशानी का कारण स्थानीय स्तर पर संगठन व समाज का स्पोट न मिलना माना जा रहा है।

दरअसल, तीन जनवरी को प्रदर्शन के दौरान जो कुछ भी उन्होंने कलक्ट्रेट में कहा उसके बाद संगठन ने उनके बयान से न केवल पल्ला झाड़ लिया, बल्कि उनके खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमों में भी पैरवी से किनारा कर लिया है। सोमवार को जब उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। उस दौरान भी न तो समाज न ही संगठन से कोई झांकने तक वहां पहुंचा। हां कुछ लोग जरूर ऐसे थे जो अपने मीडिया मित्रों की मार्फत कोर्ट रूम और सलाखों के पीछे पहुंचने तक की जेल यात्रा का अपडेट ले रहे थे।

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कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान राज्यमंत्री को जिंदा जलाने और शहर को आग लगाने की धमकी देने वाले मुकेश सिद्धार्थ के खिलाफ पुलिस प्रशासन की सख्त कार्रवाई के संकेत आला अफसरों ने देने शुरू कर दिए हैं। पुलिस सपा नेता की पुरानी कुंडली खंगाल रही है। उनके खिलाफ दर्जन भर से ज्यादा गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। उल्लेखनीय है कि विगत तीन जनवरी को नगर निगम प्रकरण को लेकर कलक्ट्रेट में सपा व दूसरे विपक्षी दलों की ओर से भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था। सपा विधायक अतुल प्रधान व पूर्व विधायक योगेश वर्मा का भाषण हो चुका था।

जब माइक हाथ में आया तो एससी-एसटी आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मुकेश सिद्धार्थ आपा खो बैठे और कुछ ऐसा कह दिया। जिसको कानून की परिभाषा में अपराध माना जाता है। दरअसल, उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर राज्यमंत्री सोमेन्द्र तोमर को जिंदा जलाने, उनकी गाड़ी, घर तथा शहर को जलाने की धमकी दी थी। वो यहीं नहीं रुके उन्होंने और भी काफी कुछ कहा डाला। तभी शनिवार की देर रात थाना सिविल लाइंस पर मुकेश सिद्धार्थ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दर्ज रिपोर्ट के बाद से ही पुलिस मुकेश सिद्धार्थ की तलाश कर रही थी।

वह अंडर ग्राउंड हो गए। उनकी तलाश में एसओजी व क्राइम ब्रांच की टीम को लगाया गया था। पुलिस की घेराबंदी होते ही मुकेश ने अग्रिम जमानत लेने या किसी पुराने मामले में जमानत तुड़वाकर जेल जाने की जुगतबाजी शुरू कर दी थी। रविवार देर रात पुलिस को सर्विलांस के माध्यम से पता चला कि मुकेश दिल्ली में अग्रिम जमानत की जुगतबाजी कर रहा है। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। मुकेश के खिलाफ पुलिस अब रासुका लगाने की तैयारियों में जुट गई है।

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