जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम ने ये पुराने वाहन खरीदे थे। इनका कहीं पर भी पंजीकरण भी नहीं है। बिना पंजीकरण के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसको जनवाणी एक वर्ष पहले भी प्रकाशित कर चुका है, लेकिन बावजूद इसके नगर निगम के वाहनों का पंजीकरण नहीं कराया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस के नियम और कायदे केवल आम आदमी पर चलते हैं, लेकिन जिन वाहनों पर न नंबर प्लेट है न ही उनकी फिटनेस संबंधी प्रमाण पत्र है।
वह शहर में सैकड़ों की संख्या में घूम रहे हैं और पुलिस कुछ नहीं कर रही है। जी हां! हम बात कर रहे हैं। नगर निगम के कूड़ा उठाने वाले वाहनों की जिनकी हालत देख कर लगता है कि वह एक दिन भी सड़क पर न चले, लेकिन नियमों का उल्लंघन कर उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। जिससे आम पब्लिक की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन उन्हें कोई रोकने वाला नहीं है।
नगर निगम लाख दावे करें विकास के, लेकिन विभाग शहर में तो क्या विकास करेगा। वह अभी अपने विभाग को ही ठीक नहीं कर पाया है। नगर निगम सीमा क्षेत्र में शहर में 90 वार्ड हैं और इन वार्डों से कूड़ा उठाने के लिये प्रत्येक वार्ड में निगम की ओर से वाहनों को लगाया है, लेकिन इन वाहनों की हालत अगर आप देख लें तो कह सकते हैं कि इनसे कब बड़ा हादसा हो जाये कुछ कहा नहीं जा सकता उसके बावजूद इनपर लगाम नहीं लगी है।
जर्जर हालत में हैं वाहन, नहीं कोई देखने वाला
नगर निगम में सभी वार्डों से कूड़ा उठाकर डंपिंग जोन में डाला जाता है। जिन वाहनों से कूड़ा ले जाया जा रहा है। उनकी हालत जर्जर स्थिति में है। इन वाहनों पर न तो नंबर प्लेट लगी है और न ही इन वाहनों के पास कोई फिटनेस प्रमाण पत्र है। उसके बावजूद यह वाहन सड़कों पर घूम रहे हैं और न ही पुलिस और न ही आरटीओ से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जा रही है।
वाहनों में कूड़ा इस कदर ओवरलोड कर लिया जाता है कि वह कूड़ा सड़कों पर गिरता जाता है, लेकिन इसके बावजूद इनमें कूड़ा भरा जाता है और ले जाया जाता है। अब इससे कोई हादसा हो या न हो इसे कोई देखने वाला नहीं है। इन वाहनों की फिटनेस की बात की जाये तो ओवरलोड होने के बाद यह चलने की स्थिति में नहीं रहते, उसके बावजूद ड्राइवर इन्हें तेज गति से भगाते हैं और पुलिस आंखें बंद कर खड़ी रहती है। इससे आये दिन कोई न कोई हादस होता रहता है, लेकिन कोई नहीं रोकता।
आम लोगों पर कार्रवाई, नगर निगम पर नहीं
बात फिटनेस की की जाये तो ट्रैफिक पुलिस आम आदमी के वाहन को पकड़कर उसका चालान करती है। नंबर प्लेट न होने पर उनका चालान काटा जाता है, लेकिन नगर निगम के यह वाहन लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। कहा जाये तो अपनों पर करम गैरों पर सितम वाली कहावत यहां सिद्ध होती है। यानि पुलिस विभाग भी नगर निगम पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। जबकि इन वाहनों से हादसे हो रहे हैं। फिर भी अधिकारी इस ओर आंखें मूदे बैठे हैं।
निगम को भी होता नुकसान फिर भी नहीं खुलती आंखें
पुराने वाहनों से कूड़ा ढोये जाने में अतिरिक्त खर्च आता है, क्योंकि इन वाहनों में डीजल डाला जाता है और उनकी क्षमता भी कम होती है। पुराने वाहन का मायलेज अच्छा नहीं होता। उसके बावजूद नगर निगम की ओर से इन वाहनों से कूड़ा ढोया जाता है। यही नहीं नगर निगम ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का भी इस्तेमाल कूड़ा ढोने में करता है। जबकि ट्रैक्टर एक ही घंटे में कई लीटर डीजल पी जाता है। फिर भी अधिकारी आधुनिक वाहनों को लेना पसंद नहीं कर रहे हैं। इससे नगर निगम को ही नुकसान पहुंच रहा है।
पेट्रोल-डीजल चोरी के मामले भी आ चुके हैं सामने
यहां कूड़ा ढोने में अधिकारी तो लापरवाही बरतते ही हैं, लेकिन कर्मचारी भी इसका पूरा फायदा उठाते हैं। वार्डों में लगी छोटी गाड़ियों को पेट्रोल आदि भरवाकर कर्मचारी कहीं भी वार्डों में जाकर खड़े हो जाते हैं और फिर इसमें तेल चोरी का खेल चलता है। वार्ड-33 की ही बात करें तो काजीपुर, लोहियानगर समेत किसी भी जगह से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है। जबकि विभाग की ओर से यहां पर कूड़ा उठाने के लिये गाड़ियां लगी हैं। कर्मचारी गाड़ियों को लेकर पीएससी एन्क्लेव आदि के आसपास सुनसान मार्ग पर दिनभर खड़े रहते हैं और कोई कार्य नहीं होता।

